क्या मधुमेह शरीर में कम्पन का कारण है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 21, 2013
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kya madhumeh sharir me kampan ka karan hai

मधुमेह केवल एक बीमारी ही नहीं है, बल्कि इससे कई अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इससे हमारा शरीर कमजोर हो जाता है, आंखों पर असर होता है और भी जाने क्या-क्या प्रभाव दिखाई देते हैं। तो क्या शरीर में होने वाला कम्पन भी इस बीमारी के चलते होता है-  

क्यों होती है कंपन की समस्या
ज्यादातर वृद्ध मधुमेह रोगियों में कम्पन की समस्या देखी जा सकती है। शरीर में कम्पन होना यह संकेत देता है कि रोगी के शरीर में ब्लड शुगर काफी कम हो गया है। लेकिन कई बार हाई ब्लड ग्लूकोज जिसे डायबिटीक न्यूरोपैथी के नाम से जाना जाता है, भी हाथों में कम्पन की वजह होता है।

कंपन के प्रकार

हाथों में कम्पन की मुख्यत: तीन वजह होती हैं। एक तो आराम की मुद्रा में हाथों का कांपना, दूसरा काइनिटीक जब आप कोई गतिविधि करते हैं, तीसरा आसनीय कम्पन जिसमें आपका हाथ किसी स्टैटिक पोजीशन में रहता है, जैसे पेन से लिखते हुए या कप पकड़े हुए। हाथों में कम्पन की कई वजह हो सकती हैं, अगर आप बार-बार इस  कम्पन को महसूस करते हैं तो यह एक गंभीर समस्या है इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करें।

 

[इसे भी पढ़ें: मधुमेह से बचाव के तरीके]

जानिए किस तरह मधुमेह कम्पन की समस्या का कारण हो सकता है :-  

हाइपोग्लाइसिमिया
अगर आपका डायबिटीज का इलाज चल रहा है, तो आपको हाइपोग्लाइमिक होने की आंशका हो सकती है। हिलने का अनुभव जैसे हाथों में कम्पन यह संकेत देते हैं कि आपको हाइपोग्लाइसिमिया हो सकता है। इस समस्या का पता तब चलता है जब आपका ब्लड शुगर सामान्य स्तर के नीचे पहुंच जाता है।  

डायबिटीक न्यूरोपैथी
हाथों में कंपन की एक वजह डायबिटीक न्यूरोपैथी भी हो सकती है। रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाने पर डायबिटीक न्यूरोपैथी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसमें शरीर के नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है जिसके फलस्वरुप हाथों में कम्पन की समस्या शुरू हो जाती है। डायबिटीक न्यूरोपैथी से बचने के लिए ब्लड ग्लूकोज को सामान्य स्तर से ऊपर ना जाने दें।  

 

[इसे भी पढ़ें: अनेक बीमारियों की जड़ है डायबिटीज]

ध्यान दें
यदि आपका बीपी 130/80, कोलस्ट्रोल (एलडीएल) 100 से कम व (एचबीए1सी) सात प्रतिशत से कम हो एवं शुगर फास्टिंग 130 से कम एवं पीपी 180 से कम हो, तो आप मधुमेह से होने वाली गंभीर समस्याओं से बचे रह सकते हैं।

नियमित जांच कराएं
सुगर, बीपी, कोलेस्ट्रोल, आंखों की जांच वर्ष में एक बार, दांतों की जांच साल में दो बार, किडनी - टीएमटी तीन साल में एक बार।

 

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