क्‍या एक लड़का और लड़की सिर्फ दोस्‍त हो सकते हैं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 11, 2013
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वक्त बदल रहा है और कई मायनों में लोगों की सोच भी। अब वो दौर नहीं रहा जब 'लड़का और लड़की दोस्त नहीं हो सकते' जैसी बातों पर तवज्जो दी जाती थी। अब वे न सिर्फ आपस में दोस्त हैं, बल्कि 'बॅस्ट बडी' भी होते हैं। वे एक दूसरे के साथ वैसे ही रहते और बर्ताव करते हैं जैसा वे किसी अन्य दोस्त के साथ करते हैं।

kya ladka ladki sirf dost ho sakte hainआज के दौर में यह सवाल पूछना भी शायद बेमानी हो। क्योंकि आज लड़कियों की सशक्त मौजूदगी हर उस क्षेत्र में है, जहां पहले केवल पुरुषों का आधिपत्य माना जाता था। लड़का और लड़की साथ पढ़ते हैं, साथ काम करते हैं और कई जगह महज एक दोस्तो की तरह साथ रहते हैं।

 

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बदल रहे हैं हम ?

यह वैश्विक युग है। यहां दफ्तरों में लड़के-लड़कियां साथ काम करते हैं, साथ पढ़ते हैं। एक दूसरे से अपने दिल की बातें करते हैं। यानी वे सभी वर्जनाएं जिनमें समाज सदियों से जकड़ा हुआ था, धीरे-धीरे ही सही दरकने लगी हैं। इस वैश्विक होते सामाजिक परिवेश में इस तरह की वर्जनाओं के लिए अधिक स्थान रह भी नहीं जाता। लैंगिक आधार पर भेदभाव भले ही आज भी मौजूद हो, लेकिन लड़के और लड़की की दोस्ती को अब पहले से अधिक सामान्य दृष्टि से देखा जाता है। लड़का और लड़की भी अपने रिश्तों को अधिक सहजता से लेने लगे हैं। आम मध्यमवर्गीय शहरी परिवारों में भी उनके रिश्ते को लेकर अब स्वीकार्यता बढ़ने लगी है। लेकिन, यह सोच हमेशा से चली आ रही है कि एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नही हो सकते। और आज भी बड़ी संख्या में लोग इस बात को अपने अंतर्मन में बिठाए हुए हैं कि 'लड़का और लड़की दोस्ती नहीं हो सकते'।

 

इस बात को मानने वाले लोगों का तर्क होता है कि क्योंकि दोनों विपरीत सेक्स के होते हैं तो ऐसे में एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होना काफी स्वाभाविक होता है। दोनों के बीच जब 'दोस्ती ' होती है, तो उनमें प्यार और 'सेक्स' होने की आशंकाएं ही ऐसे लोगों को डराती रहती हैं।

 

समाज, फिर चाहे वो शहरी हो या ग्रामीण, मोटे तौर पर अभी भी लड़के और लड़की की दोस्ती. को पचा नहीं पाता। अक्सर वे उनके रिश्ते को लेकर वैचारिक मंथन करते रहते हैं। बड़ी बात यह है कि उनमें से ज्यारदातर लोग उन दोनों से निजी रूप से परिचित भी नहीं होते। उनके मन में यह बात होती है कि जरूर इनके बीच कुछ होगा।

 

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दोस्ती है धागा विश्वास का

रिश्ता कोई भी हो, बस विश्वास के धागे से बंधा होता है। लेकिन, अगर यह रिश्ता लड़के और लड़की की दोस्ती का हो, तो मामला जरा पेचीदा हो जाता है। ना जाने क्यों कई लोगों को ये रिश्ते अखरने लगते हैं। ना जाने क्यों ये उनकी आंखों की किरकिरी बनने लगते हैं। भले ही यह सवाल अपना अस्तित्व खो रहा हो, लेकिन यह बिलकुल ही मौजूं नहीं है, ऐसा भी कहा जा सकता। बेशक, इस राय से असहमत होने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है, लेकिन फिर भी सवाल पूरी तरह से खत्म, हो गया ऐसा नहीं है।

 

दूरियां मिटाता अंतरजाल

इंटरनेट (अंतरजाल) ने दुनिया को समेट दिया है। आज अपने आप में आधी दुनिया को समाने वाला फेसबुक इस बात का गवाह है की दोस्तों के मन में दोस्ती अभी जिन्दा है। फेसबुक पर दोस्ती की कोई सीमा नही है, कोई भी किसी का दोस्‍त हो सकता है। चाहे वह बड़ा हो या छोटा, लड़का हो या लड़की। यहां तक आज एक पिता भी अपने बेटे का अच्छा दोस्त हो सकता है। दोस्त सिर्फ दोस्त होता है। उसके समक्ष यह सवाल कहीं नहीं ठहरता कि दोस्त लड़का है या लड़की। इस रिश्ते को वे ही निभा पाते है जो दोस्ती को समझते हैं और उनकी भावनाएं पाक होती हैं।


लड़का और लड़की सिर्फ दोस्ते हो सकते हैं

आजकल लोग हर रिश्ते को बड़ी आसानी से अपनी सोच और जरूरत के अनुसार बदल लेते हैं। हम बात कर रहे हैं दोस्ती की जो एक बेहद खूबसूरत रिश्ता है, जिसकी गरमाहट हर किसी को भाती है। और जो रिश्ता हमें किसी वंश या परंपरा के तहत नहीं मिलता, बल्कि हम खुद बनाते हैं। दोस्ती का रिश्ता हर तरह के भेदभाव से परे होता है। सबसे साफ, सबसे पाक, हर बनावट से दूर, जाति-धर्म से जिसका कोई सरोकार नहीं होता, अमीरी-गरीबी जिसे कभी छू नहीं पाई। फिर हमेशा इस रिश्ते को लैंगिक भेदभाव से क्यों जोड़ा जाता है? दोस्त सिर्फ दोस्त होता है। उसके समक्ष यह सवाल कहीं नहीं ठहरता कि दोस्त लड़का है या लड़की।

 

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सोच का फर्क

लोगों की सोच में समय के सा‍थ परिवर्तन हुआ है। बात चाहे दोस्ती की हो या रिश्तों की, लोग अब खुलकर सोचते है। मगर आज भी ज्यादातर लोग, बल्कि पढ़े-लिखे युवा भी कई बार दोस्ती में इस फर्क को जाहिर करते हैं। एक लड़का और लड़की सिर्फ दोस्त नहीं हो सकते, यह बात अब पुरानी हो चुकी है। फिर भी अगर दोस्ती लड़का-लड़की के बीच है तो उस पर नजर सदा पैनी ही रखी जाती है। अगर एक लड़की किसी लड़के दोस्त के साथ दोस्ती करे तो न सिर्फ उस पर शक कि सुई घुमा दी जाती है, बल्कि उसे दोषी ही मान लिया जाता है।

 

दोस्ती में साकारात्मक सोच रखें


दोस्ती का रिश्ता भी उतना ही सच्चा और पवित्र होता है जितना और कोई रिश्ता। लेकिन फिर भी इसे सदा शक के घेरे में रखा जाता है। अगर दोस्त पर प्यार आए तो भी जाहिर न करो, उसे गले लगाने का दिल करे तो भी मत लगाओ, क्योंकि वह विपरीत लिंगी है। अगर किसी ने ऐसा किया तो गजब हो जाएगा। सवाल है कि भला दोस्ती के रिश्ते में ये कैसे बंधन हैं और यह कैसे गलत है। क्या सिर्फ इसलिए कि यह लड़की और लड़के के बीच है?  

हर रिश्ते की अपनी जगह होती है, अपना वजूद होता है। जो दोस्ती को समझते हैं, वे संकीर्णताओं से परे होते हैं और उनकी भावनाएं पाक होती हैं। खासतौर पर इस तरह की भावनाएं अपने सबसे अच्छे दोस्त के लिए जाहिर की जाती हैं।

इस रिश्ते की पवित्रता को कही न कही समाज का एक वर्ग बाखूबी समझ रहा है और वो उसे स्वीकार भी कर रहा है। 

 

 

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