इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन क्यों है हमारे लिए खतरनाक, जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 01, 2016
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • विद्युत चुंबकीय विकिरण से मानव शरीर को नुकसान पहुंच सकता है।
  • एक्स-किरणें, गामा-किरणें, रेडियो तरंगे आदि सभी विद्युत चुंबकीय तरंगे हैं।
  • इनके लगातार संपर्क में बने रहने से प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • कुछ न्यूरोलॉजिस्ट का मानना है कि मोबाइल रेडिएशन नुकसानदायक है।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन अर्थात विद्युत चुंबकीय विकिरण से मानव शरीर को होने वालो नुकसान को समझने से पहले हमें इसकी परिभाषा को जानना होगा। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन शून्य (स्पेस) एवं अन्य माध्यमों से स्वयं-प्रसारित तरंग होती है। इसे प्रकाश भी कहा जाता है किन्तु वास्तव में प्रकाश, विद्युत चुंबकीय विकिरण का एक छोटा सा भाग है। दृष्य प्रकाश, एक्स-किरणें, गामा-किरणें, रेडियो तरंगे आदि सभी विद्युतचुंबकीय तरंगे हैं।

इसे भी पढ़ें : खुद को है सेफ रखना, तो रात भर चार्जिंग में फोन कभी ना छोड़ना!

मोबाइल नेटवर्क की वजह से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन काफी होता है और ऐसा माना जाता है कि इसकी वजह से कई नुकसान भी होते हैं। हालांकि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से होने वाले नुकसान को लेकर विशेषज्ञों के मत भिन्न हैं। कुछ मानते हैं कि इससे नुकसान होते हैं, जबकि कुछ इसके विपरीत किसी नुकसान की बात को नकारते हैं। आज हम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के कारण होने वाले नुकसानों के बारे में बात कर रहे हैं।

मोबाइल टॉवर

 

क्या कहते हैं शोध

कुछ शोध बताते हैं कि मोबाइल रेडिएशन के लंबे समय तक लगातार संपर्क में बने रहने से प्रजनन क्षमता में कमी, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर और मिस-कैरेज की आशंका भी पैदा हो सकती है। दरअसल, हमारे शरीर में 70 प्रतिशत पानी होता है और दिमाग में भी 90 प्रतिशत तक पानी ही होता है। और फिर यह पानी धीरे-धीरे बॉडी रेडिएशन को सोखने लगता है और आगे चलकर सेहत के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकता है। कुछ समय पूर्व पेश हुई डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल से कैंसर तक होने की आशंका होती है। इंटरफोन स्टडी में कहा गया कि हर दिन आधे घंटे या उससे ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल करने पर 8-10 साल में ब्रेन ट्यूमर की आशंका 200-400 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

 

कुछ अन्य शोध के परिणाम

-2010 में डब्ल्यूएचओ द्वारा पेश एक रिसर्च से पता चला कि मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का जोखिम रहता है।
-हंगरी के शोधकर्ताओं ने अपने एक शोध के दौरान पाया कि जो युवक बहुत ज्यादा सेल फोन का इस्तेमाल करते थे, उनके स्पर्म की संख्या कम हो गई।
-केरल में हुए एक शोध के मुताबिक सेल फोन टॉवरों से होने वाले रेडिएशन से मधुमक्खियों की कमर्शल पॉप्युलेशन 60 प्रतिशत तक कम हो गई है।
-वहीं सेल फोन टावरों के पास जिन गौरेयों (एक प्रकार की घरेलू चिड़िया) ने अंडे दिए, 30 दिन के बाद भी उनमें से बच्चे नहीं निकले, जबकि आमतौर पर इस काम में 10-14 दिन ही लगते हैं।

 

मानव जीवन पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का प्रभाव

भारत सरकार की मौजूदा गाइडलाइन ऐसी है जैसे कि किसी इंसान को रोज 19 मिनट तक माइक्रोवेव में भूनें और कहें कि यह सुरक्षित है। विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि रेडिएशन की वजह से सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, मेमोरी प्रॉब्लम घुटनों का दर्द, हार्मोनल इम्बैलेंस, दिल से संबंधित बीमारियां व आंत में कैसर तक होने की आशंका रहती है।

 

कुछ कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि..

कुछ कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि मोबाइल रेडिएशन सभी के लिए नुकसानदेह है लेकिन बच्चे, महिलाएं, बुजुर्गों और मरीजों को इससे ज्यादा नुकसान हो सकता है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स ऐडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार बच्चों और किशोरों को मोबाइल पर ज्यादा वक्त नहीं बिताना चाहिए और स्पीकर फोन या हैंडसेट का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि सिर और मोबाइल के बीच दूरी बनी रहे।


Image Source : Getty

Read More Articles on Healthy Living In Hindi

Write Comment Read ReviewDisclaimer Feedback
Is it Helpful Article?YES2 Votes 1444 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर