डिब्बाबंद दूध नवजात शिशु के लिए है जहर समान, जानें!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 20, 2017
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Quick Bites

  • वर्तमान में कई लोग शिशुओं को दे रहे हैं डिब्बाबंद दूध।
  • डिब्बाबंद दूध पाउडर में होता है मेलामिन नामक तत्व।
  • 2011 में 68.4 फीसदी डिब्बाबंद दूध नकली पाया गया।

आजकल नवजात शिशु को डिब्बाबंद दूध पिलाने का चलन काफी चला हुआ है। ऐसा लोग डिब्बेबंद दूध को हेल्दी मानने की वजह से करते हैं। लेकिन क्या आपको मालुम है कि डिब्बाबंद दूध शिशुओं के लिए जहर के समान होता है। अगर आप भी अपने नन्हे-मुन्ने को डिब्बाबंद दूध दे रही हैं तो जान लें कि आप उन्हें आहार की जगह एक तरह से जहर का सेवन करा रही हैं। 

 

मिले रहता है मेलामिन नाम का एक तत्व

कई बार माताएं स्तनों में दूध ना बनने के कारण शिशु को डिब्बाबंद दूध बच्चों को पिलाती हैं। डिब्बाबंद दूध कितनी भी अच्छी क्वालिटी का क्यों ना हो, लेकिन वो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसा इस दूध में मेलामिन नामक तत्व के मिले होने के कारण होता है।

दरअसल सभी तरह के डिब्बाबंद दूध पाउडर में मेलामिन नाम का एक तत्व मिला रहता है जो शिशु के लिए नुकसानदायक होता है। इस संबंध में कई शिशु चिकित्सक भी कह चुके हैं कि इस डिब्बाबंद दूध से नवजात शिशु को हैजा, अस्थमा, डायबिटीज, किडनी स्टोन आदि अन्य तरह की बीमारियां हो जाती हैं।

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आज देश में नवजातों का एक बहुत बड़ा हिस्सा डिब्बाबंद दूध पाउडर पर निर्भर है। लेकिन इसके बावजूद इन दूध के मानकों पर कोई ध्यान नहीं देता। जबकि हर साल 2.5 करोड़ नवजातों को डिब्बाबंद दूध पाउडर आहार के रुप में दिया जाता है। इस कारण इस उत्पाद के पोषक-तत्वों को सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।

 

तो दूषित है डिब्बाबंद दूध पाउडर

अगर कोई महिला अपने बच्चे को डिब्बाबंद दूध पाउडर खिलाती है और इसके बावजूद भी शिशु को डायरिया है तो जरूरत आपका डिब्बाबंद दूध पाउडर दूषित है।


आपको जानकर हैरानी होगी की 2011 में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार देश में वितरित किए गए दूध में से 68.4 फीसदी दूध नकली पाया गया। इस आंकड़े से आप इस स्थिति की गंभीरता को समझ सकते हैं। जबकि इन आंकड़ों से सभी संस्थाएं पल्ला झाड़ने में लगी हैं। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंर्डडस (बीआईएस) का कहना है कि वह सुरक्षा मानक तय नहीं करती। वह केवल पैकेजिंग को स्वीकृति देती है। सुरक्षा मानक तय करना उसकी जिम्मेदारी नहीं है।


ये देश की अजीब ही विडंबना है कि वर्तमान में 1.25 अरब आबादी वाले इस देश में दूध का सही मापदंड या कोई कानून नहीं है।

 

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