इस न्यूरान की मदद से मस्तिष्क लेता है जोखिम भरा फैसला

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 05, 2016
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किसी भी फैसले को लेने से पहले हम कई बार सोचते है जो हमारे दिमाग पर जोर डालता है। फिर जैसा हमारा दिमाग सही बताता है हम उस फैसले को मान लेते है। पर अक्सर हमारे मन में ये ख्याल आता है कि मस्तिष्क इस फैसले को लेता कैसे होगा। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की एक शोध के अनुसार वेंट्रल पैलिडियम में न्यूरॉन का समूह, मस्तिष्क का वह हिस्सा है, डोपामाइनन के लेवल के नियंत्रण में खास भूमिका निभाता है। यह अणु न्यूरॉन्स के बीच संकेत देने का काम करता है, जिससे हमें अच्छा महसूस होता है। यह तब निष्क्रिय हो जाता है, जब व्यक्ति किसी सुरक्षित विकल्प की जगह जोखिम भरा काम चुनता है।

इसके शोधकर्ता सहायक प्रोफेसर इल्या मॉनसोव ने कहा, “वेंट्रल पैलिडियम डोपामाइन न्यूरॉन्स को रोकने का काम करता है, और जोखिम भरे फैसले के चुनाव से डोपामाइन का स्राव बढ़ जाता है।”

अध्ययन में यह भी पता चला है कि मस्तिष्क के जिस हिस्से में यह न्यूरॉन्स पाए जाते हैं, उसे मिडियल बेसल फोरब्रेन कहते हैं। बंदर पर किए गए परीक्षण में यह देखा गया कि जोखिम लेने के फैसले के बाद यह हिस्सा में उनमें ज्यादा सक्रिय हो गया। लेकिन अपने जोखिम भरे फैसले के परिणाम स्वरूप उन्हें सीखने का मौका मिला।

मिडियल बेसल फोरब्रेन मस्तिष्क का वह भाग है, जो कार्टिकल ब्रेन के बड़े भाग को सूचनाएं देने का काम करता है। यह सीखने और याददाश्त से जुड़ा होता है।


शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन से मनोवैज्ञानिक और मानसिक विकृतियों जैसे जोखिम को लेकर गलत राय बनाने और चिंता से जुड़ी विकृतियों के उपचार में मदद मिल सकेगी।

 

Image Source-Getty

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