किशोर गर्भावस्‍था में युवती को सताता है आत्‍म सम्‍मान का डर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 04, 2012
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Quick Bites

  • शिक्षा और कैरियर पर असर डालती है किशोर गर्भावस्‍था।
  • कुछ मामलों में बच्‍चे के जन्‍म के बाद पड़ता है विपरीत असर।
  • किशोर गर्भावस्‍था सामाजिक संबंधों पर भी डालती है प्रभाव।
  • आत्‍म सम्‍मान को लेकर चिंतिंत रहती हैं अधिकतर किशोरी।

किशोर गर्भावस्‍था का सबसे ज्‍यादा असर महिला के मन पर पड़ता है। कम उम्र में होने वाले बदलावों का उस पर गहरा मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ता है। कम उम्र में युवती के प्रेग्‍नेंट होने से किशोरी के लिए कई तरह की समस्‍याएं हो सकती हैं। इनमें भावनात्‍मक, वित्तीय और शैक्षिक परेशानियां प्रमुख होती हैं।

psychosocial effect of teenage pregnancy

गर्भवती किशोरी को सिर्फ अल्‍ट्रासांउड ही नहीं अन्‍य मामलों जैसे वित्तीय, पढाई या कैरियर से जुड़े मामलों में भी सलाह की जरूरत होती है। इस समय उसे जरूरत होती है एक ऐसे व्‍यक्ति की जिससे वह अपनी बातों को शेयर कर सकें। जिससे उसे यह अहसास हो कि अकेले नही है। इस लेख के जरिए हम आपको बताते हैं कि किशोर गर्भावस्‍था के मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्‍या-क्‍या होते हैं?

 

किशोर गर्भावस्था के मनोवैज्ञानिक प्रभाव

कम उम्र में गर्भवती होना युवती के लिए शारीरिक रूप से ही नुकसादेह नहीं होता, बल्कि इसके बहुत से मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी होते हैं। कुछ ऐसे ही मनोवैज्ञानिक प्रभावों के बारे में हम नीचे बात करते हैं।

 

पहचान

किशोर अवस्‍था में किशोरों की अपने दम पर पहचान बनने की चाहत होती हैं। यह‍ उम्र मस्‍ती से भरी हुई और बदलाव पसंद करने वाली होती है। इसमें युवक और युवती शा‍रीरिक आकर्षण पर ध्‍यान देते हैं और आकर्षण को ही अपनी पहचान मानते हैं। गर्भावस्था में वजन बढ़ना, स्तन वृद्धि और शरीर में सूजन आना कई ऐसे परिवर्तन होते हैं जो किशोरी की सुन्‍दरता पर विपरीत असर डालते हैं। जिससे उसके मन पर प्रभाव पड़ता है।

 

आत्म सम्मान

किशोर अवस्‍था में मां बनने से किशोरी में आत्‍म सम्‍मान की कमी और निराशा की भावना आ जाती है। आत्‍म सम्‍मान की कमी से हीन भावना आ जाती है और कई तरह की समस्‍याएं हो सकती हैं। इनमें थकान, उदासी, नींद में कमी और एकाग्रता में कमी भी आ सकती है। ध्‍यान न देने पर ये लक्षण डिप्रेशन या अनेक प्रकार के भावनात्मक और शारीरिक विकारों को जन्‍म देते हैं।

 

शिक्षा और कैरियर विकल्प

कम उम्र में मां बनने से किशोरी की शिक्षा पर विपरीत असर पड़ता है, उसे मजबूर होकर अपनी पढ़ाई या तो बंद करनी पड़ती है या उसमें व्‍यवधान पैदा हो जाता है। शिक्षा की कमी से कैरियर पर भी असर पड़ता है। अच्‍छी जॉब के ऑफर भी प्रभावित होते हैं। शिक्षा अभाव में उन्‍हें अच्‍छी नौकरी नहीं मिलती और यह गरीबी का कारण बन जाता है।

 

जन्म से पूर्व और बाद की परेशानियां

आधी से ज्‍यादा किशोरी गर्भधारण को जारी रखती हैं और बच्‍चे को जन्‍म देती है। लेकिन किशोरी को डिप्रेशन, जन्म जटिलताओं, रक्‍त की कमी और यहां तक कि मौत का सामना भी करना पड़ता है। जो किशोरियां बच्‍चे को जन्‍म देने और मां बनाने के लिए भावनात्‍मक रुप से तैयार नहीं होती उन्‍हें असफलताओं, डिप्रेशन, चिंता और असंतोष की भावनाओं का सामना करना पड़ता है।

 

सामाजिक संबंध

भारतीय समाज में किशोर गर्भावस्‍था को आज भी एक कलंक माना जाता है। यहां किशोर गर्भवस्‍था शर्म की बात है। दूसरी तरफ किशोरियां अपराध, क्रोध और अवसाद की भावनाओं के साथ जिंदगी बिता रही हैं। किशोर गर्भवस्‍था न केवल भविष्‍य में आर्थिक और रोजगार संबंधी समस्‍याओं को जन्‍म देती हैं बल्कि नकारात्‍मक आत्‍म-सम्‍मान को भी जन्‍म देती है। किशोरियां अपने दोस्तों, मां-बाप या परिवार के सदस्यों को गर्भावस्था के बारे में बताने से डरते हैं।

 

गर्भपात का असर

एक आंकड़े के मुताबिक 43 फीसदी किशोरियां गर्भधारण के बाद गर्भपात करा लेती है। गर्भपात से भी कई तरह के मनोवैज्ञानिक प्रभाव देखने को मिलते हैं। गर्भपात कराने से युवती को डिप्रेशन और तनाव के साथ ही शरीर में कमजोरी की समस्‍या भी आ सकती है। यह असर लंबे समय तक भी रह सकता है।

यौन शिक्षा की जानकारी और किशोर गर्भावस्‍था से बचाव से आप इस तरह के होने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों से दूर रह सकती हैं। इसलिए गर्भावस्‍था और इससे जुड़े मामलों के बारे में आपको उचित जानकारी होनी चाहिए।

 

 

 


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