किशोर गर्भावस्‍था से बच्‍चे और मां को होने वाली स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 13, 2012
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Quick Bites

  • स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का कारण बनता है पूरी तरह से शारीरिक विकास न होना।
  • कम उम्र में गर्भ धारण से महिला का गर्भाशय फटने का खतरा बना रहता है।
  • कुपोषण का शिकार हो सकता है किशोरावस्‍था में गर्भ में पलने वाला शिशु।
  • किशोरावस्‍था में गर्भ धारण करने से बढ़ जाती है संक्रमण की आशंका।

किशोर गर्भावस्था में गर्भवती महिला और होने वाले बच्‍चे दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थित‍ि में डिलिवरी के समय भी परेशानी हो सकती है, कुछ मामलों में इसके दुष्‍प्रभाव बाद में भी देखने को मिलते हैं।

health problem in teenage pregnancy

 

कई मामलों में देखा गया है कि किशोर गर्भावस्‍था का असर दीर्घकालिक होता है। ऐसे में बच्‍चे और मां दोनों के स्‍वास्‍थ्‍य पर विपरीत असर पड़ता है। इस लेख के जरिए हम आपको बताते हैं ऐसी स्थिति में किशोरी को किन-किन स्‍वास्‍‍थ्‍य समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है।


स्वास्थ्य समस्याएं

वजन एवं लंबाई
यदि गर्भावस्था के समय किशोरी या महिला का वजन सामान्‍य से कम है तो उन्‍हें डिलीवरी के समय परेशानियों का सामना कर पड़ सकता है, इसका कारण यह होता है कि उस समय उनका शरीर गर्भधारण के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होता। यह बच्‍चे और महिला दोनों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

 

पोषण
गर्भावस्था के दौरान पर्याप्‍त पोषण की जरूरत होती है, लेकिन यह दुर्भाग्‍य है कि देश में करोड़ों किशोरी कुपोषण और खून की कमी वाली स्थिति में बच्चे को जन्म देती हैं। इससे बच्चे और मां दोनों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। युवा अवस्था मे शरीर को ज्‍यादा पोषण की आवश्‍यकता होती है, इस समय गर्भधारण करने से गर्भस्‍थ शिशु के विकास और मां को पोषण दे पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में होने वाला शिशु भी कुपोषण का शिकार हो सकता है।

 

कम वजन के बच्‍चे
जन्म के समय बच्‍चे का वजन 2,500 ग्राम यानी ढाई किलो से कम है तो उस बच्‍चे को कम वजन वाला माना जाता है। कम वजन वाले बच्‍चों के जन्‍म की संभावना सामान्य माताओं की तुलना में उन माताओं में ज्यादा होती है जिनकी उम्र 20 वर्ष से कम होती है।



संक्रमण

कम उम्र में गर्भधारण से किशोरियों में डिलीवरी संबंधी समस्‍याओं के कारण संक्रमण्‍ा का खतरा बढ़ जाता है। यदि डॉक्‍टर की देख-रेख में डिलीवरी न कराई जाएं तो संक्रमण का खतरा और ज्‍यादा बढ़ जाता है। इस दौरान टेटनस और बैक्‍टीरिया से उत्‍पन्‍न संक्रमण का खतरा ज्‍यादा होता है। इसलिए किशोर गर्भावस्‍था से बचने की ही कोशिश करें।



दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं
किशोरावस्था मे डिलीवरी के दौरान आने वाली समस्याएं, बच्चे के जन्म के बाद भी बनी रह सकती है। डिलीवरी के दौरान होने वाली पीडा स्थायी रुप से प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा बहुत सारी दीर्घकालिक समस्याएं जैसे गर्भाशय का फटना, संक्रमण, डिलीवरी संबंधी समस्याएं उत्त्पन हो सकती हैं।

 

गर्भपात
किशोरावस्था में गर्भधारण के बाद कई बार गर्भपात भी कराना पड सकता है। सामाजिक-आर्थिक कारणों से इस प्रकार के निर्णय लेने में कई बार देर हो जाती है। ऐसा होने पर किशोरियों को गैर कानूनी गर्भपात कराना पड़ता है, जो असुरक्षित होता है और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन जाता है। ऐसे मामलों में कई बार किशोरी की मृत्‍यु भी हो जाती है। किशोरावस्‍था में गर्भपात कराने से बाद में गर्भधारण में भी परेशानी हो सकती है।

 

 

 

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