किडनी के कैंसर से संबंधी जीन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 13, 2013
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kidney cancer se sambandhi jeen

अधिकतर किडनी का कैंसर लगातार बढ़ता है और तब तक फैलता रहता है जब तक कि इसकी जांच नहीं की जाती । अगर सर्जरी की मदद से कैंसर को निकाल दिया जाता है तो चिकित्सा संभव हो पाती है । नान सर्जिकल चिकित्सा से किडनी के कैंसर का विकास धीमा हो जाता है लेकिन इससे ट्यूमर को नहीं निकाला जा सकता। लेकिन, बहुत से छोटे किडनी के कैंसर का पता आकस्मिक तौर पर चलता है। ऐसी भी कुछ स्थितियां हैं जो कि ट्यूमर के स्थान पर, उम्र पर और मरीज़ के स्वास्थ्य पर निर्भर करती हैं जबकि कैंसर की चिकित्सा नहीं की जा सकती है और समय-समय पर उसका ध्यान देना होता है ।

ट्यूमर के बढ़ने की स्थिति में कुछ ध्यान देने योग्य बातें: 

  1. किडनी कैंसर की स्थिति में आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली ट्यूमर के सेल्स  के लिए बहुत सक्रिय हो जाती है, लेकिन यह कैंसर की किस हद तक रोकथाम करता है यह बदलता रहता है । सिर्फ कुछ दुर्लभ स्थितियों को छोड़कर कैंसर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कैंसर की रोकथाम के लिए काफी नहीं होती । लेकिन कैंसर के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के लिए लगभग 10 प्रतिशत मेटास्टैनटिक रेनल सेल कार्सिनामा से प्रभावित लोग रेमिशन का अनुभव करते हैं जबकि कैंसर की स्थिति बहुत पीड़ादायक नहीं होती ।
  2. बुजुर्गो में गुर्दे का कैंसर एक आम बीमारी होती जा रही है गुर्दो का कैंसर भी आम है। संयोग से एक तिहाई मरीजों में कैंसर का पता चल जाता है। अधिकाश मामलों में रोगी स्वस्थ दिखाई देता है। इसका तब पता चलता है जब जाच के लिए पेट का अल्ट्रासाउड किया जाता है या अन्य जाच की जाती है।
  3. इंसान के दो गुर्दे होते है। रोगी बिल्कुल निश्िचत होता है क्योंकि दूसरा गुर्दा पूरी तरह से काम करता है। रोग बढ़ने पर ट्यूमर बढ़ता है। यह पेट में एक गाठ बना सकता है या उसके फ्लैंक में दर्द हो सकता है या पेशाब में खून आता है। अन्य दुर्लभ मामलों में बुखार, अनीमिया, वजन का घटना और थकान आदि शामिल है। अनेक रोगियों जिनमें गुर्दा, कैंसर काफी बढ़ जाता है तथा दर्द इफीरियर- वेना- केवा के माध्यम से दिल तक पहुचता है और उसके बाद भी इसका अहसास नहीं होता।
  4. अधिकाश जल्दी गुर्दा कैंसर का उपचार बिना चीरफाड़ लेप्रोस्कोपी से किया जा सकता है। रोगी की रिकवरी तेजी से होती है और वह न्यूनतम निशान के साथ वापस घर चला जाता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कैंसर नियंत्रण का अच्छा उपचार है, रोगी को कम से कम असुविधा होती है क्योंकि रोगी सर्जरी के उसी दिन चलने में काबिल हो जाता है और कुछ घटे बाद ही खाना शुरू कर देता है तथा सर्जरी के पहले दिन ही ऐसा संभव है।

 

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