किडनी कैंसर के ईलाज के अतिरिक्त प्रभाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 19, 2012
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किडनी कैंसर के लिए इलाज की जिस विधि को अपनाया जाता है, वह बहुत ही शक्‍ितशाली होती है जिससे आसानी से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जा सकता है। लेकिन इसके साथ ही स्वस्थ कोशिकाएं भी नष्ट हो जाती हैं। वैसे भी किडनी कैंसर के इलाज के साइड इफेक्ट्स इस बात पर निर्भर करते हैं कि किडनी कैंसर का उपचार किस तरह से किया जा रहा है।  यहां हम आपको कुछ किडनी कैंसर के इलाज के प्रकार बता रहे हैं साथ ही उस इलाज के क्या साइड इफेक्ट्स होंगे।

  • नेफ्रेक्टमी- यदि किडनी कैंसर में ये सर्जरी की जाती है तो मरीजों को दर्द दूर करने के लिए दवाएं दी जाती है।  इस सर्जरी के बाद मरीजों को सांस लेने में परेशानी आती है लेकिन दवाईयों से फेफड़ों को साफ करने और सांस संबंधी समस्याओं को दूर करने की कोशिश की जाती है।

  • एंबोलाइज़ेशन - इस इलाज के दौरान मरीजों को दर्द, मितली, बुखार या उल्‍टी इत्या‍दि की शिकायत होने लगती है।

  • रेडिएशन थेरपी- रेडिएशन थेरेपी से मरीज अचानक से थकावट महसूस करने लगता है। इसीलिए जब मरीजों को इलाज के दौरान रेडिएशन थेरेपी दी जाती है तो रोगी को अधिक से अधिक आराम करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा रोगी की त्वचा सूखी हो जाती है और रेडिश भी हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर्स सूरज की किरणों से बचने की सलाह देते हैं। साथ ही मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह पर क्रीम और लोशन इत्यादि लगाने के लिए भी मना किया जाता है।

  • हार्मोंन थेरेपी- हार्मोंन थेरेपी के दुष्प्रभाव थोड़े कम होते हैं। किडनी कैंसर में आमतौर पर प्रोजेस्ट्रोन हार्मोंन का इस्तेमाल किया जाता है। इस थेरेपी का प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग होता है। आमतौर पर हार्मोंन थेरेपी के साइड इफेक्ट के रूप में वजन बढ़ जाता है।

  • बायोलोजिकल थेरेपिज- इस थेरेपी का प्रभाव भी व्यक्ति पर निर्भर करता है। आमतौर पर मरीजों को इस थेरेपी के दौरान फ्लू जैसे बुखार होना, ठंड लगना, मसल्स में दर्द होना, कमजोरी महसूस होना, मितली और उल्टी की शिकायत, भूख कम लगना इत्यादि होने लगता है। कई बार ट्रीटमेंट के दौरान भी रोगी को ऐसी शिकायतें होने लगती हैं।

  • कीमोथेरेपी ड्रग्स- कीमोथेरेपी में कई ड्रग्स इस्तेमाल की जाती हैं जो कि किडनी कैंसर की कोशिकाओं को धीरे-धीरे मार देती हैं। ये दवा पर निर्भर करता है कि मरीज को कितनी डोज दी जा रही है।


कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान सभी व्यक्तियों पर पड़ने वाले प्रभाव अलग-अलग होते हैं। आमतौर पर किडनी कैंसर के इलाज के दौरान जो साइड इफेक्ट देखा जाता है वह ब्लीडिंग होना। डॉक्टर्स शुरूआत में ही मरीज को इसके इलाज के होने वाले साइड इफेक्ट्स को अवगत करवा देते हैं। दिलचस्प बात ये है कि किडनी कैंसर के साइड इफेक्ट्स बहुत लंबे समय तक नहीं रहते। डॉक्टर के दिशा-निर्देशों पर चल इन साइड इफेक्ट्स से जल्दी निजात पाई जा सकती है।

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