खाने-सोने के समय में बार बार बदलाव कर सकता है मोटा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 01, 2012
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khane sone ke samay me bar bar badlav kar sakta hai mota

आजकल की लाइफस्टाइल में लोगों के खाने व सोने का समय निश्चित नहीं होता है, लोगों को जब मन करता है उसी के अनुसार वे खाते व सोते हैं लेकिन यह आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है। बार बार खाने व सोने का समय बदलने से आप मोटापे का शिकार हो सकते हैं। एक नए शोध में सामने आया है कि सोने और खाने की दिनचर्या में तब्दीली करने से शरीर के वजन में बढ़ोतरी हो सकती है।

 

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शोधकर्ताओं का कहना है कि 24 घंटे के दौरान सोने, जागने और भोजन के पचने का समय निर्धारित होता है। यदि इस दिनचर्या में बदलाव किया जाए तो इन तमाम गतिविधियों के दौरान शरीर से निकलने वाले हॉर्मोन और अन्य अंगों के कामकाज पर असर पड़ता है, जिससे शरीर पर अतिरिक्त चर्बी चढ़ती है।

 

 

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पेड़ पौधों, जानवरों और इन्सानों की दिनचर्या में प्रकाश का विशेष स्थान होता है, जो सूर्य और पृथ्वी के बीच के सामंजस्य के अनुरूप निर्धारित होता है। ‘‘बिजली की रोशनी के कारण इंसान का यह सदियों पुराना दिनचर्या चक्र प्रभावित होता है। एबरडीन विश्वविद्यालय की डॉक्टर कैथी वायस ने यह जानकारी दी।

 

 

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शोध के मुताबिक पिछली एक शताब्दी में हमारे भोजन, नींद और काम के समय की लय धीरे धीरे समाप्त हो गई है। इंसान के भीतर की प्राकृतिक प्रणाली इस नयी व्यवस्था के अनुरूप खुद को ढालने के लिए संघर्ष करती है, जिसका परिणाम बीमारियों के रूप में सामने आता है। उनका कहना है कि पेड़ पौधों और जानवरों की शारीरिक प्रणाली उनके अस्तित्व को बनाए रखने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।

 

चूहों पर किए गए प्रयोग से पता चला कि शरीर की घड़ी में जब बदलाव आता है तो लीवर के जीन्स भी प्रभावित होते हैं जो वसा और ग्लूकोज के नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं।

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