कामसूत्र के बारे में आप कितना जानते हैं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 24, 2013
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कामसूत्र... आज भी सार्वजनिक रूप से इस पुस्‍तक की चर्चा करना तो दूर इसका नाम लेना भी कई लोगों को असहज कर देता है। लोगों की नजर में इस ग्रंथ की बात करना अनैतिक माना जाता है। लोग यही मानते हैं कि यह एक यौन ग्रंथ है जिसमें केवल सेक्‍स की बातें की गयी हैं। और सेक्‍स तो वैसे ही भारतीय समाज में चारदीवारी के पीछे बोले जाने वाली शब्‍दावली का हिस्‍सा है। इस पर न तो सार्वजनिक मंचों पर चर्चा की जाती है और ही ऐसा करना उचित ही माना जाता है।

kamasutra ke bare me aap kitna jaante hainऐसे में कामसूत्र जैसी महान रचना पर बात की सोची भी नहीं जा सकती। हालांकि, जिन लोगों ने भी कामसूत्र को पढ़ा है या इसके बारे में आम लोगों से ज्‍यादा जानते हैं, उन्‍हें पता है कि कामसूत्र महज एक यौन आधारित पुस्‍तक नहीं है। इसमें काफी कुछ समाहित किया गया है। वास्‍तव में यह जीवनशैली पर चर्चा करती है। यह बताती है कि कामसूत्र में काम यानी सेक्‍स तो है, लेकिन उस काम का किसी मनुष्‍य के जीवन पर क्‍या असर पड़ता है और कैसे इसके जरिए मनुष्‍य अपने जीवन को सकारात्‍मक बना सकता है।

 

[इसे भी पढ़ें : सात भागों में समाया कामसूत्र का ज्ञान]

कामसूत्र के बारे में -

  • इसमें मनुष्‍य के जीवन के उद्देश्‍य की चर्चा है, तो दूसरी ओर संभोग की 64 ऐसी विधाओं के बारे में बात है, जो रतिक्रीड़ा को सुखी और आनंददायक बना सकते हैं।
  • वात्स्यायन के कामसूत्र में कुल सात भाग हैं। कामसूत्र के सात भागों को 36 अध्‍यायों में बांटा गया है। इनमें कुल 1250 श्लोक हैं। यह रचना 1500 से 2000 वर्ष पुरानी है। सात भाग में से एक भाग में प्रेम कला को 8 श्रेणियों में बांटा गया है जिनमें 8-8 भेद हैं। यानी सेक्स के लिए 64 पोजीशंस की बात की गई है।
  • आचार्य वात्स्यायन ने कामसूत्र की शुरुआत करते हुए पहले ही सूत्र में धर्म को महत्व दिया है तथा धर्म, अर्थ और काम को जीवन का सार बनाया है।
  • भारतीय सभ्यता की आधारशिला 4 वर्गों में होती है - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। मनुष्य की सारी इच्छाएं इन्ही चारों के अंदर मौजूद होती है।
  • इसके अंतर्गत शरीर, बुद्धि, मन और आत्मा, सारी जरूरतों और इच्छाओं के लिए होती है। इनकी पूर्ति धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष द्वारा होती है।

 

[स्‍लाइड शो - कामसूत्र : प्‍यार जताने के 64 तरीके]

 

शरीर के विकास और पोषण के लिए अर्थ की जरूरत होती है। शरीर के पोषण के बाद उसका झुकाव संभोग की ओर होता है। बुद्धि के लिए धर्म ज्ञान देता है। जिस तरह से बुद्धि और ज्ञान एक ही है उसी तरह धर्म और ज्ञान भी एक ही पदार्थ के दो भाग है क्योंकि ज्ञान के बढ़ने से धर्म की बढ़ोतरी होती है। धर्म के ज्ञान में जितना भाग मिलता है तथा ज्ञान के अंतर्गत धर्म का जितना भाग पाया जाता है उसी के मुताबिक बुद्धि में स्थिरता पैदा होती है।


कामसूत्र के सात अध्‍यायों में  - जीवन के लक्ष्‍य, मनुष्‍य की इच्‍छाओं, शादी, अकेले रहने के तरीके, मनुष्‍य के आचरण, स्‍त्री-पुरुष के आपसी व्‍यवहार, प्रेमी के चयन में सावधानियां और शारीरिक आकर्षक बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गयी है।

वात्स्यायन का कामसूत्र वासनाओं को भड़काने के लिए नहीं है बल्कि जो लोग काम और मोक्ष को सहायक मानते है तथा धर्म के अनुसार स्त्री का उपभोग करते हैं, उन्ही के लिए है। इसी वजह से धर्म,अर्थ और काम के मूलतत्व का बोध कराते हैं।

 

 

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