कैसे मनाएं ईको-फ्रेंडली दिवाली

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 26, 2016
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • पटाखे हैं पर्यावरण के लिए नकुसानदायक
  • इस बार ईको-फ्रेंडली पटाखे जलाएं
  • इस बार अपनों को दें ईको-फ्रेंडली गिफ्ट
  • लाइट की जगह दीयों से जगमगाएं घर

 

 

बेशक, दिवाली खुशियों का त्‍योहार है। लेकिन, खुशी मनाने के चक्‍कर में हम पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा देते हैं, कभी सोचा है इस बारे में। सजावट के सामान से लेकर, दिवाली में जलाए जाने वाले पटाखे भी कुदरत के लिए नुकसानदेह साबित होते हैं। तो, चलिए इस बार मनाते हैं असली दीपावली... खुशियों से भरपूर इको फ्रेंडली दिवाली। यानी खुशियों पर न लगे प्रदूषण की नजर:

 

eco friendly diwali

[इसे भी पढ़े- कैसे मनाएं दिवाली]

सजावट में भी रखें पर्यावरण का खयाल


याद कीजिए अपना घर सजाने के लिए रंगीन कागज और रंगोली का इस्‍तेमाल होता था। हैंड मेड पेपर से बनी कंदील आदि चीजें छतों से टंगी हुयी घर की शोभा बढ़ाती थीं। लेकिन, बीते कुछ सालों में घर सजाने में प्‍लास्टिक के सामान का इस्‍तेमाल बहुत बढ़ गया है। दिवाली पर तो यह घर सजाने के काम आते हैं, लेकिन कुछ‍ दिनों बाद ही ये सड़कों और गलियों में बिखरे देखे जा सकते हैं। ये नालियां तो जाम करते ही हैं साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। क्‍योंकि आप सभी जानते हैं कि प्‍लास्टिक गलता नहीं है। नतीजतन इसके असर दुष्‍प्रभावों के बारे में सोचना चाहिए।

न धूम न धमाका, इस बार नो पटाखा


पटाखे पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदेह है। लेकिन, कहते हैं ना कि 'चैरिटी बिगन्‍स एट होम' तो सबसे पहले स्‍वयं पटाखे न जलाने का प्रण लें। अपने बच्‍चों और मित्रों को भी दिवाली पर पटाखे न जलाने के लिए प्रेरित करें।

[इसे भी पढ़े- इस दीपावली एलर्जी से बचें]

इको-फ्रेंडली पटाखे भी हैं बाजार में


हालांकि इस बार पटाखा बाजार भी प्रदूषण से निपटने के लिए तैयारी कर मैदान में उतरा है। इस बार आप बाजार जाएं तो आपको इको फ्रेंडली पटाखे मिल जाएंगे। इनसे आवाज और धुआं भी कम निकलता है। समस्‍या यह है कि इन्‍हें ज्‍यादा पसंद नहीं कर रहे हैं, बड़ी तादाद में युवा वर्ग को शोर वाले पटाखे ही पसंद आते हैं।

रोशन करें जहां


दिवाली रोशनी का त्योहार है। इस मौके पर घरों को रोशन करने के लिए पहले मिट्टी के दीये जलाने का रिवाज था, लेकिन अब इनकी जगह चमचमाती लाइट्स ने ले ली है। इससे बिजली की खपत बढ़ती है। बेहतर होगा कि घरों को मिट्टी से बने दीयों से रोशन किया जाए। और इन लाइटों पर निर्भरता जरा कम की जाए।

[इसे भी पढ़े- दिल के मरीज़ रहें पटाखों से दूर]

इको फ्रेंडली हों उपहार


दिवाली पर परिजनों और शुभचिंतकों को उपहार दिए जाते हैं। इन उपहारों में डिजाइनर दीये, मिठाइयां, कलात्मक कृतियों आदि का शामिल किया जा सकता है।

 

Read More Article On- Fastival special in hindi

Write a Review
Is it Helpful Article?YES28 Votes 15520 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर