कैसे करें स्किन कैंसर की जांच

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 22, 2012
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kaise karen skin cancer ki jaanch

कैसे करें स्किन कैंसर की जांच
त्वचा कैंसर स्किन के बाहरी हिस्से में होता है। इसकी जांच के कई तरीके हैं। बायोप्सी और स्क्रीनिंग के जरिए त्वचा कैंसर की जांच की जा सकती है। स्किन कैंसर की समस्या धूप में रहने वाले ऐसे उम्रदराज लोगों को होने की संभावना अधिक होती है  जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो। इसके अलावा स्किन कैंसर ज्यादा गर्मी, किसी चोट और त्वचा पर हुए संक्रमण के कारण भी हो सकता है। त्वचा कैंसर ज्यादातर शरीर के चेहरा, गला, कान, नाक, होंठ, गरदन, हाथ पर होता है। लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सो में भी हो सकता है। आइए हम आपको बताते हैं कि त्वचा कैंसर की जांच कैसे की जा सकती है। 


स्किन कैंसर की जांच के तरीके – 

त्वचा की कई परते होती हैं। लेकिन, दो परते ही प्रमुख होती हैं – एपीडर्मिस (ऊपरी या बाहरी परत) और डर्मिस (निचली या आंतरिक परत)। त्वचा कैंसर ऊपरी परत यानी एपी‍डर्मिस में ही शुरू होता है। स्क्रीनिंग और बायोप्सी के जरिए त्वचा कैंसर की जांच की जा सकती है। 


स्क्रीनिंग- 
स्क्रीनिंग के जरिए कैंसर के लक्षण नजर आए बिना भी इसकी पहचान दिख जाती है। इसका मतलब यह कि अगर कैंसर अपने शुरूआती दौर में है तो स्क्रीनिंग के जरिए उसे पहचाना जा सकता है। ऐसे में उसका इलाज कर पाना आसान हो जाता है। स्क्रीनिंग के जरिए त्वचा कैंसर का पता लगाने में खतरा कम और फायदा ज्यादा होता है। स्क्रीनिंग के बाद कैंसर का इलाज करने में आसानी होती है। स्क्रीनिंग के जरिए चिकित्स‍क समय-समय पर त्वचा की जांच करते हैं। 


बायोप्सी  - 
बायोप्सी से यह निश्चित हो जाता है कि आपको कैंसर है या नहीं। बायोप्सी में त्वचा का नमूना लेकर माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है। लेकिन यह इस बात पर तय करता है कि कैंसर कितना फैल चुका है। बायोप्सी के तीन तरीके होते हैं जिनसे स्किन कैंसर का पता चलता है – इन्सीजनल बायोप्सी (इसमें त्वचा का नमूना लेने के लिए सर्जिकल चाकू का इस्तेमाल किया जाता है), पंच बायोप्सी (इसमें त्वचा के आंतरिक हिस्सों से ऊतकों का नमूना लिया जाता है) और शेव बायोप्सी (इसमें नमूने के लिए त्वचा का सबसे उपरी हिस्सा लिया जाता है)। बायोप्सी का परिणाम 2-3 सप्ताह के बीच में निकलता है। 


त्वचा कैंसर के कारण – 

त्वचा कैंसर के लक्षण बहुत देर में नजर आते हैं। अगर शुरुआत में इसका पता चल जाए तो इसके इलाज में आसानी हो सकती है। धूप की अल्ट्रावायलेट किरणें ही त्वचा कैंसर का प्रमुख कारण हैं। लेकिन, शरीर में विटामिन डी की कमी, त्वचा का संक्रमण, किसी चोट का दाग, शरीर पर मस्से भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। खान-पान और जंकफूड भी त्वचा कैंसर का कारण बन सकते है। ज्यादा देर तक धूप सेंकना भी त्वचा के लिए जोखिम कारक हो सकता है। 


त्वचा कैंसर का पता अगर देर से चले तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए अगर आपको त्व‍चा से संबंधित कोई संदेह हो तो चिकित्सक से संपर्क अवश्य कर लीजिए। 

त्वचा कैंसर स्किन के बाहरी हिस्से में होता है। इसकी जांच के कई तरीके हैं। बायोप्सी और स्क्रीनिंग के जरिए त्वचा कैंसर की जांच की जा सकती है। स्किन कैंसर की समस्या धूप में रहने वाले ऐसे उम्रदराज लोगों को होने की संभावना अधिक होती है  जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो। इसके अलावा स्किन कैंसर ज्यादा गर्मी, किसी चोट और त्वचा पर हुए संक्रमण के कारण भी हो सकता है। त्वचा कैंसर ज्यादातर शरीर के चेहरा, गला, कान, नाक, होंठ, गरदन, हाथ पर होता है। लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सो में भी हो सकता है। आइए हम आपको बताते हैं कि त्वचा कैंसर की जांच कैसे की जा सकती है। 

 

स्किन कैंसर की जांच के तरीके – त्वचा की कई परते होती हैं। लेकिन, दो परते ही प्रमुख होती हैं – एपीडर्मिस (ऊपरी या बाहरी परत) और डर्मिस (निचली या आंतरिक परत)। त्वचा कैंसर ऊपरी परत यानी एपी‍डर्मिस में ही शुरू होता है। स्क्रीनिंग और बायोप्सी के जरिए त्वचा कैंसर की जांच की जा सकती है। 

 

स्क्रीनिंग- स्क्रीनिंग के जरिए कैंसर के लक्षण नजर आए बिना भी इसकी पहचान दिख जाती है। इसका मतलब यह कि अगर कैंसर अपने शुरूआती दौर में है तो स्क्रीनिंग के जरिए उसे पहचाना जा सकता है। ऐसे में उसका इलाज कर पाना आसान हो जाता है। स्क्रीनिंग के जरिए त्वचा कैंसर का पता लगाने में खतरा कम और फायदा ज्यादा होता है। स्क्रीनिंग के बाद कैंसर का इलाज करने में आसानी होती है। स्क्रीनिंग के जरिए चिकित्स‍क समय-समय पर त्वचा की जांच करते हैं। 

 

बायोप्सी  - बायोप्सी से यह निश्चित हो जाता है कि आपको कैंसर है या नहीं। बायोप्सी में त्वचा का नमूना लेकर माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है। लेकिन यह इस बात पर तय करता है कि कैंसर कितना फैल चुका है। बायोप्सी के तीन तरीके होते हैं जिनसे स्किन कैंसर का पता चलता है – इन्सीजनल बायोप्सी (इसमें त्वचा का नमूना लेने के लिए सर्जिकल चाकू का इस्तेमाल किया जाता है), पंच बायोप्सी (इसमें त्वचा के आंतरिक हिस्सों से ऊतकों का नमूना लिया जाता है) और शेव बायोप्सी (इसमें नमूने के लिए त्वचा का सबसे उपरी हिस्सा लिया जाता है)। बायोप्सी का परिणाम 2-3 सप्ताह के बीच में निकलता है। 

 

त्वचा कैंसर के कारण – त्वचा कैंसर के लक्षण बहुत देर में नजर आते हैं। अगर शुरुआत में इसका पता चल जाए तो इसके इलाज में आसानी हो सकती है। धूप की अल्ट्रावायलेट किरणें ही त्वचा कैंसर का प्रमुख कारण हैं। लेकिन, शरीर में विटामिन डी की कमी, त्वचा का संक्रमण, किसी चोट का दाग, शरीर पर मस्से भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। खान-पान और जंकफूड भी त्वचा कैंसर का कारण बन सकते है। ज्यादा देर तक धूप सेंकना भी त्वचा के लिए जोखिम कारक हो सकता है। 

 

 

त्वचा कैंसर का पता अगर देर से चले तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए अगर आपको त्व‍चा से संबंधित कोई संदेह हो तो चिकित्सक से संपर्क अवश्य कर लीजिए। 

 

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