कैसे करें हाइपरथायराइडिज्म का निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 26, 2012
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हाइपरथायराइडिज्म के कई लक्षण काफी आम होते हैं। इसी वजह से कई बार इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कई बार इन्हें थकान व कमजोरी समझकर अनदेखा कर दिया जाता है और आगे चलकर यह एक गंभीर समस्या  का रूप ले लेती है।हाइपरथायराइडिज्म में पार्याप्त भोजन करने के बाद भी रोगी का वजन घटता जाता है। उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने लगता है। आम दिनों की अपेक्षा थायराइड में रोगी जल्दी-जल्दी थक जाता है।  

जब भी आपको इस तरह के लक्षण महसूस करें तो डॉक्टर से जरूर  संपर्क करें । डॉक्टरी जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि आखिर इन सब लक्षणों के पीछे क्या कारण हैं। क्या ये लक्षण हाइपरथायरइडिज्म के हैं या किसी अन्य वजह से आपको इस तरह की परेशानियों की सामना करना पड़ रह है। जानिए हाइपरथायराइडिज्म का निदान कैसे हो सकता है।


टीसीएच टेस्ट  

 

हाइपरथायराइडिज्म की पहचान के लिए सबसे पहले टीसीएच जांच का सहारा लिया जाता है। इस जांच के जरिए रोगी के रक्त में टीसीएच की थोड़ी सी भी मात्रा के बारे में जाना जा सकता है साथ ही थायराइड कितना सक्रिय है इसकी भी सही जानकारी मिलती है। टीसीएच टेस्ट विशेष रुप से कम हाइपरथायराइडिज्म की पहचान के लिए किया जाता है। सामान्य रुप से टीसीएच की मात्रा सामान्य से नीचे हो तो रोगी को हाइपरथायराइडिज्म और अगर टीसीएच की मात्रा सामान्य से ज्यादा है तो रोगी को हाइपोथायराइडिज्म की शिकायत होती है।

 

[इसे भी पढ़ें: आर्युवेद से हाइपरथाइराडिज्म का इलाज]


टी3 व टी4 टेस्ट

इस जांच से रक्त में टी3 व टी4 की मात्रा का पता लगाया जाता है। हाइपरथायराइडिज्म में इन दोनों में से किसी एक हार्मोंन का या दोनों हार्मोंन का स्तर रक्त में सामान्य से ज्यादा होता है।   

 

टीएसआई टेस्ट

 

इस जांच थायराइडस्टीम्यूलैटिंग एंटीबॉडी टेस्ट भी कहते हैं, जिसमें रक्त में टीएसआई की मात्रा मापी जाती है। ज्यादातर लोग जो ग्रेव्स रोग से ग्रस्त होते हैं उनमें यह एंटीबॉडी पाया जाता है लेकिन वे लोग जिनको हाइपरथायराडिज्म किसी अन्य वजह से है उनमें यह नहीं पाया जाता है। 

 

[इसे भी पढ़ें: क्यों होता है हाइपरथायराइडिज्म]


रेडियोएक्टिव आयोडीन जांच

 

इस जांच के जरिए रक्त से थायराइड ग्रंथि द्वारा एकत्र किए गए आयोडीन की मात्रा का पता लगाया जाता है। रोगी के थायराइड में आयोडीन की मात्रा से पता चलता है कि हाइपरथायराडिज्म के पीछे क्या वजह है। जैसे अगर आयोडीन की मात्रा कम है तो यह थाईरोइडिटिस और अगर आयोडीन की मात्रा ज्यादा है तो यह ग्रेव्स रोग की ओर संकेत करता है।    

 

थायराइड स्कैन

 

थायराइड स्कैन यह दिखाता है कि थायराइड में कैसे और कहां-कहां आयोडीन की मात्रा पहुंची है। नोड्यूल्स के चित्र व अन्य संभावित अनियमिताओं के जरिए हाइपरथायराइडिज्म का पता लगाया जा सकता है।

 

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