आठ लक्षण जो करें कैंसर की पहचान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 24, 2012
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Quick Bites

  • कैंसर के प्रकार पर निर्भर करते हैं इसके लक्षण।
  • स्‍तन में गांठ होना स्‍तन कैंसर का सामान्‍य लक्षण।
  • पेशाब में खून आने पर अग्‍नाश्‍य कैंसर हो सकता है।
  • लक्षण नजर आते ही फौरन करायें चिकित्‍सीय जांच।

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षणों का पता इस बीमारी की शुरूआत में नहीं लगता है। लेकिन अगर कैंसर की पहचान इसकी शुरूआत में न हो पाए तो यह जानलेवा हो सकता है। लोगों में जब तक इस बीमारी का पता चलता है बहुत देर हो चुकी होती हे। अगर कैंसर का पता शुरूआत में चल जाए तो इसका इलाज संभव है। कैंसर के 200 से भी ज्यादा प्रकार हैं और सबके अपने अगल-अगल लक्षण हैं। लेकिन अगर स्वास्‍थ्‍य में असामान्य  परिवर्तन हो तो कैंसर की जांच करानी चाहिए। 


शोधकर्ताओं के अनुसार – 
कैंसर ऐसी बीमारी है जिसपर लगातार शोध हो रहे हैं लेकिन अभी तक पूरी तरह से इसका ईलाज संभव नहीं हो पाया है। फिर भी शोधकर्ताओं ने इसके आठ प्रमुख लक्षणों को माना है जिसे दिखाई देने पर कैंसर का पता लगाया जा सकता है। कैंसर का पता चलने पर जांच जरूर करवाएं। कैंसर का पता अगर शुरूआती दौर में चल जाए तो इसके इलाज के सफल होने की ज्यादा संभावना होती है।
 

कैंसर के शुरूआती लक्षण – 
कैंसर कई प्रकार का होता है और सबके अलग-अलग लक्षण भी हैं। लेकिन कैंसर के आठ प्रमुख लक्षण हैं - 

पेशाब में खून आना – 
पेशाब में अगर खून निकल रहा है तो तुरंत कैंसर की जांच करानी चाहिए। यूरिन के टेस्ट से पेट और अग्नाशय के कैंसर का पता लगाया जा सकता है। पेशाब में मौजूद प्रोटीन की जांच करके कैंसर का पता लगाया जाता है। अन्य सभी जांच की तुलना में पेशाब की जांच से कैंसर का पता सबसे जल्दी चलता है। 


खून की कमी – 
कैंसर की शुरूआत में खून की कमी हो जाती है। खून की कमी के कारण एनीमिया रोग हो जाता है। एनी‍मिया होने पर कैंसर की जांच करानी चाहिए। एनीमिया कैंसर का शुरूआती लक्षण है। 

स्टूल में खून आना – 
स्टूल में खून आना भी कैंसर का लक्षण है। खान-पान में लापरवाही के कारण भी स्टूल में खून आ सकता है। लेकिन, अगर यह समस्या कई दिनों तक बनी रहे तो कैंसर की जांच करानी चाहिए। 

स्तन में गांठ – 
ब्रेस्ट कैंसर होने पर स्तन में गांठ बनती है। महिलाओं में यूटरस और ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए ब्रेस्ट में अगर कोई भी गांठ हो तो कैंसर की जांच अवश्य कराएं। 

खांसी में खून आना- 
कैंसर होने पर सामान्य खांसी में भी खून आने लगता है। टीबी होने पर भी खांसी आती हैं। लेकिन फेफडे का कैंसर होने पर सांस लेने में दिक्कत होती है और खांसी आने पर खून निकलता है। खांसी में खून निकलने पर कैंसर की जांच कराइए। 

निगलने में दिक्कत – 
मुंह का कैंसर होने पर कुछ भी निगलने में दिक्कत होती है। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने वालों को मुंह का कैंसर होने की ज्यादा संभावना होती है। 

मीनोपॉज के बाद खून निकलना – 
महिलाओं में मासिक धर्म होने के बाद भी कई दिनों तक खून निकलना कैंसर का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में कैंसर की जांच कराना चाहिए। 

चक्कर आना – 
कैंसर होने पर जी मचलाता है और चक्कर आता है। लगातार कई दिनों तक ऐसी समस्या होने पर कैंसर की जांच कराना चाहिए। 


कैंसर की जांच – 

बायोप्सी के द्वारा – 
बायोप्सी के जरिए यह तय किया जा सकता है कि आपको कैंसर है अथवा नहीं। इसमें मरीज के कैंसर ग्रस्त हिस्से से ऊतक का एक छोटा सा हिस्सा लेकर कैंसर की जांच करते हैं। 

एंडोस्कोपी द्वारा – 
इस विधि से पैंक्रियाज में होने वाले छोटे-छोटे कैंसर का पता लगाया जा सकता है। एंडोस्कोपी विधि में अल्ट्रासाउंड के माध्यम से खाने की थैली व पित्त की नली में होने वाले कैंसर का पता लगाया जाता है। अल्ट्रासाउंड से कैंसर के स्टेजेज़ का भी पता चलता है। 

कैंसर अगर पूरी तरह से फैल जाए तो इसका ईलाज नहीं हो सकता है। लेकिन अगर शुरूआती स्टेज पर कैंसर का पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। कैंसर के लक्षण दिखने पर चिकित्सक से परामर्श अवश्य लीजिए। 

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षणों का पता इस बीमारी की शुरूआत में नहीं लगता है। लेकिन अगर कैंसर की पहचान इसकी शुरूआत में न हो पाए तो यह जानलेवा हो सकता है। लोगों में जब तक इस बीमारी का पता चलता है बहुत देर हो चुकी होती हे। अगर कैंसर का पता शुरूआत में चल जाए तो इसका इलाज संभव है। कैंसर के 200 से भी ज्यादा प्रकार हैं और सबके अपने अगल-अगल लक्षण हैं। लेकिन अगर स्वास्‍थ्‍य में असामान्य  परिवर्तन हो तो कैंसर की जांच करानी चाहिए। 

cancer ki pahchan

कैंसर पर लगातार शोध हो रहे हैं और विज्ञान के जरिये इस बीमारी का इलाज काफी हद तक संभव भी हो पाया है। यदि कैंसर को उसकी शुरुआती अवस्‍था में ही पता लगा लिया जाए, तो इसका इलाज करना आसान हो जाता है। ऐसे में इसके लक्षणों को सही प्रकार से पहचानना और फिर बीमारी का निदान करना और भी जरूरी हो जाता है। इस बीमारी के इसके आठ प्रमुख लक्षणों को माना है जिसे दिखाई देने पर कैंसर का पता लगाया जा सकता है। कैंसर का पता चलने पर जांच जरूर करवाएं। कैंसर का पता अगर शुरूआती दौर में चल जाए तो इसके इलाज के सफल होने की ज्यादा संभावना होती है।

 

कैंसर के शुरुआती लक्षण – 

कैंसर कई प्रकार का होता है और सबके अलग-अलग लक्षण भी हैं। लेकिन कैंसर के आठ प्रमुख लक्षण हैं - 

 

पेशाब में खून आना

पेशाब में अगर खून निकल रहा है तो तुरंत कैंसर की जांच करानी चाहिए। यूरिन के टेस्ट से पेट और अग्नाशय के कैंसर का पता लगाया जा सकता है। पेशाब में मौजूद प्रोटीन की जांच करके कैंसर का पता लगाया जाता है। अन्य सभी जांच की तुलना में पेशाब की जांच से कैंसर का पता सबसे जल्दी चलता है। 

 

खून की कमी

कैंसर की शुरूआत में खून की कमी हो जाती है। खून की कमी के कारण एनीमिया रोग हो जाता है। एनी‍मिया होने पर कैंसर की जांच करानी चाहिए। एनीमिया कैंसर का शुरूआती लक्षण है 

 

स्‍थूल में खून आना

स्थूल में खून आना भी कैंसर का लक्षण है। खान-पान में लापरवाही के कारण भी स्थूल में खून आ सकता है। लेकिन, अगर यह समस्या कई दिनों तक बनी रहे तो कैंसर की जांच करानी चाहिए। 

स्‍तन में गांठ

ब्रेस्ट कैंसर होने पर स्तन में गांठ बनती है। महिलाओं में यूटरस और ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए ब्रेस्ट में अगर कोई भी गांठ हो तो कैंसर की जांच अवश्य कराएं। 

 

खांसी में खून आना

कैंसर होने पर सामान्य खांसी में भी खून आने लगता है। टीबी होने पर भी खांसी आती हैं। लेकिन फेफडे का कैंसर होने पर सांस लेने में दिक्कत होती है और खांसी आने पर खून निकलता है। खांसी में खून निकलने पर कैंसर की जांच कराइए। 

 

निगलने में दिक्‍कत

मुंह का कैंसर होने पर कुछ भी निगलने में दिक्कत होती है। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने वालों को मुंह का कैंसर होने की ज्यादा संभावना होती है। 

 

मेनोपॉज के बाद खून आना

महिलाओं में मासिक धर्म होने के बाद भी कई दिनों तक खून निकलना कैंसर का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में कैंसर की जांच कराना चाहिए। 

symptoms of cancer

चक्‍कर आना

कैंसर होने पर जी मचलाता है और चक्कर आता है। लगातार कई दिनों तक ऐसी समस्या होने पर कैंसर की जांच कराना चाहिए। 

 

कैंसर की जांच

 

बायोप्सी द्वारा

बायोप्सी के जरिए यह तय किया जा सकता है कि आपको कैंसर है अथवा नहीं। इसमें मरीज के कैंसर ग्रस्त हिस्से से ऊतक का एक छोटा सा हिस्सा लेकर कैंसर की जांच करते हैं। 

 

एंडोस्कोपी द्वारा

इस विधि से पैंक्रियाज में होने वाले छोटे-छोटे कैंसर का पता लगाया जा सकता है। एंडोस्कोपी विधि में अल्ट्रासाउंड के माध्यम से खाने की थैली व पित्त की नली में होने वाले कैंसर का पता लगाया जाता है। अल्ट्रासाउंड से कैंसर के स्टेजेज़ का भी पता चलता है। 

 

कैंसर अगर पूरी तरह से फैल जाए तो इसका ईलाज लगभग असंभव हो जाता है। लेकिन शुरुआती स्टेज पर कैंसर का पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। कैंसर के लक्षण दिखने पर चिकित्सक से परामर्श अवश्य लीजिए।

 

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