सामान्य गर्भावस्था से अलग होते हैं जुड़वां गर्भावस्था के लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 17, 2013
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • दो अलग अंडो में भिन्न-भिन्न शुक्राणुओं द्वारा निषेचित होते हैं जुड़वा।
  • सामान्य गर्भावस्था के लक्षण जुड़वां गर्भावस्था से होते हैं थोड़े अलग।
  • जुड़वा बच्चों के मामले में लेबर पेन 36 या 37 सप्ताह के बीच हो सकता है। 
  • जुड़वां गर्भावस्था में सामान्य गर्भावस्था की तुलना में लगती है ज्यादा भूख।

गर्भवती महिला के एक ही गर्भावस्था के दौरान पैदा होने वाले दो बच्चों को जुड़वा कहते हैं। आमतौर पर जुड़वा या तो एक जैसे हो सकते हैं या फिर भिन्न-भिन्न प्रकृति के भी हो सकते हैं क्योंकि वे दो अलग अलग अंडो में दो भिन्न-भिन्न शुक्राणुओं द्वारा निषेचित होते हैं। आइये विस्तार से जाने कि क्या हैं जुड़़वा बच्चों के शुरूआती लक्षण।

गर्भवती महिला

जुड़वां गर्भधारण सामान्य गर्भधारण से काफी अलग हैं। जुडवां गर्भधारण में समय से पहले डिलिवरी और जन्म के समय बच्चे के वजन कम होने की अधिक संभावना होती है। । आइए जानें कि जुड़वा बच्चों की गर्भवती के शुरूआती लक्षण क्या-क्या है।

 

जुड़वा बच्चों के शुरूआती लक्षण


मॉर्निग सिक्नेस

जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती महिला के प्रारंभिक लक्षण में मॉर्निग सिक्नेस बहुत ज्यादा होती है। पचास प्रतिशत से अधिक महिलाएं अपनी गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में ही मतली और जी मिचलाना का अनुभव शुरू कर देती हैं। महिला जिनके जुड़वा बच्चे होने वाले है अन्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में मॉर्निग सिक्नेस का अनुभव अधिक करती है।

ब्लीडिंग और स्पोटिंग

एक महिला जो जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती है उसको स्पोटिंग और ब्लीडिंग होने की संभावना अधिक होती है। अगर आप गुलाबी और भूरे रंग के धब्बे नोटिस करते है तो यह अत्यंत सामान्य बात है। यदि आपके ब्लीडिंग हो रही है और साथ में बुखार और लाल खून के धब्बे नहीं है तो डरने की कोई बात नही हैं।

वजन

जुड़वां गर्भावस्था में वजन सामान्य गर्भावस्था की तुलना में अधिक होता है क्योंकि आपके दो बच्चे, दो प्लासन्टा और अधिक एमनियोटिक द्रव के साथ होते है। एक औसत गर्भावस्था में सामान्य वजन 25 पाउंड होता है जबकि जुड़वां गर्भावस्था में यह 30 से 35 पाउंड के बीच हो सकता हैं।

 

दो दिल

बच्चे के दिल की धड़कन पहली बार सुनना हर माता पिता के लिए सबसे यादगार अनुभव होता है। बच्चे के जन्म से पहले आप डॉपलर प्रणाली के माध्यम से अपने बच्चे के दिल की धड़कन सुन सकते हैं। गर्भावस्था के नौवें सप्ताह से जुड़वा बच्चों के दिल की धड़कन अलग-अलग से सुनी जा सकती है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं है क्योंकि इनकी पहचान को कभी-कभी अलग नहीं किया जा सकता है।

जल्दी डिलिवरी और सिजेरियन

जुड़वां गर्भावस्था के साथ महिलाओं में समय से पहले डिलिवरी होने की अधिक संभावना होती है। लेबर पेन गर्भावस्था के 36 या 37 सप्ताह के बीच में हो सकते है। इस के अलावा, जुड़वां गर्भावस्था में बच्चे ज्यादातर ब्रीच स्थिति में होते है जिस कारण डिलिवरी नॉर्मल की जगह सिजेरियन होने की संभावना बढ़ जाती है।

जुड़वां गर्भावस्था की संभावना

30 और 40 वर्ष में महिलाओं को जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती होने की संभावना अधिक होती हैं। इसका कारण यह है जैसे आप बड़े होते है ओवुलटरी चक्र में संघनता कम हो जाती है। इस स्तर पर अधिक संभावना होती है एक ही समय में दो बच्चों की। जुड़वा गर्भावस्था और सामान्य गर्भावस्था में बहुत अधिक अंतर नहीं होता, लेकिन जुड़वा गर्भावस्था में वजन और थकान अधिक बढ़ने लगती है। गर्भावस्था के सामान्य लक्षण रहते हुए भी जुड़वा गर्भावस्था में जोखिम कई बार बढ़ जाते हैं। बहरहाल, गर्भावस्था कैसी भी हो देखभाल और सावधानी बेहद जरूरी है।

हमेशा भूख लगना

जुड़वां गर्भावस्था के लक्षणों में से सबसे बड़ा लक्षण यह है कि आपको हमेशा भूख लगेगी। जुड़वां गर्भावस्था में महिला को सामान्य गर्भावस्था में महिला की तुलना में अधिक खाने की जरूरत महसूस होती है। यदि आप भी जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती हैं तो आपको भी लगातार भूख लगेगी।

 

Read More Article on Pregnancy in Hindi

Write a Review
Is it Helpful Article?YES103 Votes 61267 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर