जानें प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों को

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 27, 2012
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Quick Bites

  • प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए धूम्रपान और नशे का सेवन कम करें।
  • ज्यादा चर्बी वाले मांस को खाने से परहेज कीजिए।
  • पेशाब करते वक्त जलन होना प्रोस्टेट कैंसर का लक्षण है।
  • प्रोस्टेट कैंसर 50 साल की उम्र पार करने के बाद पुरूषों में होती है।

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों का पता अगर शुरुआत में ही चल जाए तो इसके इलाज में आसानी होती है। प्रोस्टेट एक ग्रंथि है जो कि पेशाब की नली के ऊपरी भाग के चारों तरफ होती है। यह ग्रंथि अखरोट के आकार जैसी होती है जिसका काम वीर्य में मौजूद एक द्रव पदार्थ का निर्माण करना है।

jaane prostrate cancer ke lakshan

प्रोस्टेट कैंसर 50 साल की उम्र पार करने के बाद पुरूषों में होती है। इसके लक्षणों का पता लगाने के लिए आदमी को खून की जांच व यूरीनरी सिस्टम का अल्ट्रासाउंड भी करवाना चाहिए। यदि इन जांचों में कोई कमी पायी जाती है, तो यूरोलॉजिस्ट से इलाज करवाएं।
जानें प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों को

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों का पता अगर शुरुआत में ही चल जाए तो इसके इलाज में आसानी होती है। प्रोस्टेट एक ग्रंथि है जो कि पेशाब की नली के ऊपरी भाग के चारों तरफ होती है। यह ग्रंथि अखरोट के आकार जैसी होती है जिसका काम वीर्य में मौजूद एक द्रव पदार्थ का निर्माण करना है। प्रोस्टेट कैंसर 50 साल की उम्र पार करने के बाद पुरूषों में होती है। इसके लक्षणों का पता लगाने के लिए आदमी को खून की जांच व यूरीनरी सिस्टम का अल्ट्रासाउंड भी करवाना चाहिए। यदि इन जांचों में कोई कमी पायी जाती है, तो यूरोलॉजिस्ट से इलाज करवाएं।


प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण – 

प्रोस्टे‍ट कैंसर होने पर रात में पेशाब करने में दिक्कत होती है। 
रात में बार-बार पेशाब आता है और आदमी सामान्य अवस्था की तुलना में ज्यादा पेशाब करता है। 
पेशाब करने में कठिनाई होती है और पेशाब को रोका नही जा सकता है यानी पेशाब रोकने में बहुत तकलीफ होती है। 
पेशाब रुक-रुक कर आता है, जिसे कमजोर या टूटती मूत्रधारा कहते हैं। 
पेशाब करते वक्त जलन होती है। 
पेशाब करते वक्त पेशाब में खून निकलता है। वीर्य में भी खून निकलने की शिकायत होती है। 
शरीर में लगातार दर्द बना रहता है। 
कमर के निचले हिस्से या कूल्हे या जांघों के ऊपरी हिस्से में जकडाहट रहती है।


प्रोस्टेट कैंसर के कारण – 
प्रोस्टेट होने के असली कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया है लेकिन कुछ कारण हैं जो कैंसर के इस प्रकार के लिए जोखिम कारक हैं। धूम्रपान, मोटापा, सेक्स के दौरान फैला वायरस या फिर शारीरिक शिथिलता यानी की व्यायाम न करना प्रोस्टेट कैंसर का कारण हो सकता है। कभी-कभी असुरक्षित तरीके पुरूषों की नसबंदी भी प्रोस्टेट कैंसर का कारण बनता है। यदि परिवार में किसी को पहले भी प्रोस्टेट कैंसर हुआ है तो भी इस कैंसर के होने का जोखिम बना रहता है। ज्यादा वसायुक्त मांस खाना भी प्रोस्टेट कैंसर का कारण बन सकता है। जिन पुरूषों की प्रजनन क्षमता कम होती है उनको भी प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा होता है। लिंग गुणसूत्रों में गडबडी के कारण भी प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है। 


प्रोस्टेट कैंसर का इलाज - 
वृद्धावस्था में प्रोस्टेट कैंसर होने की ज्यादा संभावना होती है। यदि प्रोस्टेट कैंसर का पता स्टेज-1 और स्टेज-2 में चल जाए तो इसका बेहतर इलाज रैडिकल प्रोस्टेक्टमी नामक ऑपरेशन से होता है। लेकिन, यदि प्रोस्टेट कैंसर का पता स्टेज-3 व स्टेज-4 में चलता है तो इसका उपचार हार्मोनल थेरैपी से किया जाता है। गौरतलब है कि प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं की खुराक टेस्टोस्टेरान नामक हार्मोन से होती है। इसलिए पीड़ित पुरुष के टेस्टिकल्स को निकाल देने से इस कैंसर को नियंत्रित किया जा सकता है।



खान-पान और दिनचर्या में बदलाव करके प्रोस्टेट कैंसर की संभावना को कम किया जा सकता है। ज्यादा चर्बी वाले मांस को खाने से परहेज कीजिए। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने से बचिए। यदि आपको प्रोस्टेट कैंसर की आशंका दिखे तो चिकित्सक से संपर्क जरूर कीजिए। 

 

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण – 

  • प्रोस्टे‍ट कैंसर होने पर रात में पेशाब करने में दिक्कत होती है। 
  • रात में बार-बार पेशाब आता है और आदमी सामान्य अवस्था की तुलना में ज्यादा पेशाब करता है। 
  • पेशाब करने में कठिनाई होती है और पेशाब को रोका नही जा सकता है यानी पेशाब रोकने में बहुत तकलीफ होती है। 
  • पेशाब रुक-रुक कर आता है, जिसे कमजोर या टूटती मूत्रधारा कहते हैं। 
  • पेशाब करते वक्त जलन होती है। 
  • पेशाब करते वक्त पेशाब में खून निकलता है। वीर्य में भी खून निकलने की शिकायत होती है। 
  • शरीर में लगातार दर्द बना रहता है। 
  • कमर के निचले हिस्से या कूल्हे या जांघों के ऊपरी हिस्से में जकडाहट रहती है।

 

प्रोस्टेट कैंसर के कारण – 

प्रोस्टेट होने के असली कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया है लेकिन कुछ कारण हैं जो कैंसर के इस प्रकार के लिए जोखिम कारक हैं। धूम्रपान, मोटापा, सेक्स के दौरान फैला वायरस या फिर शारीरिक शिथिलता यानी की व्यायाम न करना प्रोस्टेट कैंसर का कारण हो सकता है। कभी-कभी असुरक्षित तरीके पुरूषों की नसबंदी भी प्रोस्टेट कैंसर का कारण बनता है। यदि परिवार में किसी को पहले भी प्रोस्टेट कैंसर हुआ है तो भी इस कैंसर के होने का जोखिम बना रहता है। ज्यादा वसायुक्त मांस खाना भी प्रोस्टेट कैंसर का कारण बन सकता है। जिन पुरूषों की प्रजनन क्षमता कम होती है उनको भी प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा होता है। लिंग गुणसूत्रों में गडबडी के कारण भी प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है। 

 

प्रोस्टेट कैंसर का इलाज - 

वृद्धावस्था में प्रोस्टेट कैंसर होने की ज्यादा संभावना होती है। यदि प्रोस्टेट कैंसर का पता स्टेज-1 और स्टेज-2 में चल जाए तो इसका बेहतर इलाज रैडिकल प्रोस्टेक्टमी नामक ऑपरेशन से होता है। लेकिन, यदि प्रोस्टेट कैंसर का पता स्टेज-3 व स्टेज-4 में चलता है तो इसका उपचार हार्मोनल थेरैपी से किया जाता है। गौरतलब है कि प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं की खुराक टेस्टोस्टेरान नामक हार्मोन से होती है। इसलिए पीड़ित पुरुष के टेस्टिकल्स को निकाल देने से इस कैंसर को नियंत्रित किया जा सकता है।

 

खान-पान और दिनचर्या में बदलाव करके प्रोस्टेट कैंसर की संभावना को कम किया जा सकता है। ज्यादा चर्बी वाले मांस को खाने से परहेज कीजिए। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने से बचिए। यदि आपको प्रोस्टेट कैंसर की आशंका दिखे तो चिकित्सक से संपर्क जरूर कीजिए। 

 

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