यह हमारी नाक है उसका पसीना नहीं

By  ,  दैनिक जागरण
Aug 08, 2011
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-शोधकर्ताओं ने बताया, शरीर की गंध महसूस करने के पीछे एक जीन होता है जिम्मेदार

 

-जीन में भिन्नता गंध को वैनिला में तब्दील कर सकती है या फिर उसे गंधहीन बना सकती है

 

सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन है सच। किसी आदमी के शरीर की गंध के लिए दरअसल हम खुद जिम्मेदार होते हैं। यानी किसी का पसीना आपको ज्यादा बदबूदार लग रहा है तो इसमें उस व्यक्ति का दोष नहीं। अमेरिका में हुए एक अध्ययन में बताया गया है कि दरअसल यह एक जीन है जो गंध को महसूस कराने में अहम भूमिका निभाता है। यानी किसी व्यक्ति के पसीने की गंध किसी व्यक्ति को वैनिला जैसी महक सकती है तो किसी को यूरिन जैसी और किसी को तो गंधहीन ही भी लग सकती है। उत्तरी कैरोलिना की ड्यूक यूनिवर्सिटी के हीरोकी मात्सुनामी ने बताया कि यह पहली बार है जब इस बात पर रोशनी डाली गई है कि कोई गंध किसी को कैसी लगती है, यह महसूस करने वाले (ओडर रिसेप्टर) पर निर्भर करता है। मात्सुनामी और उनके साथियों ने अध्ययन के दौरान अपना ध्यान एंड्रोस्टेनोन पर केंद्रित किया। एंड्रोस्टेनोन पुरुष और महिला दोनों के पसीने में पाया जाने वाला स्टेरायड है। हालांकि पुरुष के पसीने में इसकी मात्रा ज्यादा होती है। अब पसीने की गंध किसी को कैसी महसूस हो रही है यह महसूस करने वाले में पाए जाने वाले ओआर 7डी 4 नामके जीन पर निर्भर करता है। मात्सुनामी ने बताया कि यह बात पहले भी मालूम थी कि भिन्न-भिन्न लोगों में अलग-अलग प्रकार का एंड्रोस्टेनोन मौजूद होता है। लेकिन इसके पीछे वजह क्या है यह नहीं पता था।

 

अध्ययन के दौरान पसीने और रसायन की गंध को अलग करने के लिए 400 ओडर रिसेप्टर बुलाए गए। इन्हें अपनी नाक से गंध सूंघ कर उन्हें पहचाना था। मात्सुनामी ने पाया गया कि यह ओआर7डी4 जीन है जो गंध को महसूस करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि दो लोगों के जीन में जरा सी भिन्नता उन्हें एक व्यक्ति के पसीने की गंध को अलग-अलग ढंग की लग सकती है। किसी को वैनिला की तरह तो किसी को गंधहीन ।

 

 

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