जानें क्‍या इम्‍यून सिस्‍टम से जुड़ी बीमारी है सीजोफ्रेनिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 25, 2016
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Quick Bites

  •  सिजोफ्रेनिया मरीज को उसकी दुनिया से बाहर नहीं आने देता।
  • सिजोफ्रेनिया पारिवारिक इतिहास के चलते हो सकता है।
  • सिजोफ्रेनिया युवाओं में फैलने वाली सबसे घातक बीमारी है।
  •  सिजोफ्रेनिया तनाव और सामाजिक दबाव के चलते होता है।

यूं तो कोई आरती को देखे तो एक क्षण को उसकी नजर उस पर ही टिक जाए। देखने में निहायत खूबसूरत। यही नहीं जब बातें करती है तो किसी का भी मन मोह लेती है। इन खूबियों के बावजूद आरती के पिता उसे किसी से मिलने नहीं देते। अकसर कमरे में बंद रखते हैं। हैरानी तो तब होती है जब स्नातक कर चुकी आरती खुद को कमरे में बंद करने पर कोई विरोध भी नहीं करती। वह अपनी दुनिया में ही रहना चाहती है। उसे अपनी दुनिया में किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं। लेकिन 20 वर्षीय आरती विमल को छोड़ने को राजी नहीं है। वह उसके साथ रहता है, उसके साथ ही खाता है, पीता है। विमल मानो आरती के वजूद का हिस्सा बन गया है। दरअसल विमल उसका काल्पनिक दोस्त है। आरती के पास जैसे ही कोई आता है, विमल गायब हो जाता है। जबकि आरती को यह कतई पसंद नहीं कि विमल उसके पास से एक क्षण को दूर हो।वास्तव में आरती सिजोफ्रेनिया जैसी घातक बीमारी का शिकार है। उसके माता-पिता चाहकर भी उसे विमल यानी सिजोफ्रेनिया से दूर नहीं कर पा रहे। असल में आरती अपनी काल्पनिक दुनिया को अपनी असली दुनिया मानती है जिसमें उसके माता-पिता उसके लिए किसी दुश्मन सरीखे हैं। अकेली आरती ऐसी मरीज नहीं है जो सिजोफ्रेनिया की शिकार है। ऐसे लाखों नहीं बल्कि समूचे विश्व में करोड़ों युवा मरीज हैं जो इस घातक बीमारी की चुंगल में हैं।

क्या है सिजोफ्रोनिया

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक सिजोफ्रेनिया युवाओं की सबसे बड़ी क्षमतानाशक बीमारी है। विश्व की दस सबसे घातक बीमारियों में सिजोफ्रेनिया शामिल है। आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि 15 से 35 वर्ष की उम्र के समूचे विश्व में लगभग ढाई करोड़ लोग सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हैं। अकेले भारत में इसके लाखों मरीज मौजूद है। सिजोफ्रेनिया अकसर युवाओं को ही प्रभावित करती है। यह बीमारी न सिर्फ मरीज के सिरदर्द है बल्कि मरीज के परिजनों के लिए किसी समस्या कम नहीं है। सामान्यतः शुरुआती स्तर पर सिजोफ्रेनिया मरीज की आम समस्या सरीखी होती है। जानकारी के अभाव के चलते जब तक इस बीमारी के बारे में पता चलता है, यह अपनी चरम सीमा तक पहुंच जाता है। अतः यह जानना जरूरी है कि सिजोफ्रेनिया क्या है, क्यों होता है और इसका प्रतिरक्षा प्रणाली से क्या सम्बंध है।
  • यह एक ऐसी बीमारी है जो मरीज की सोचने समझने की क्षमता को लील जाती है। इस रोगी गो दृष्टिभ्रम, मूड़ में बदलाव, बेहद अमीर होने का भ्रम, किसी से प्यार होने का भ्रम, किसी से बहुत अधिक ईष्र्या करने की समस्या हो जाती है। सामान्यतः यह बीमारी कुल आबादी के महज एक फीसदी लोगों में होने की आशंका होती है। जबकि यदि किसी के पारिवारिक इतिहास में सिजोफ्रेनिया शामिल है तो इससे घर के बच्चों या परिजनों के होने की आशंक 10 फीसदी ज्यादा बढ़ जाती है।
  • सिजोफ्रेनिया के कई कारण हो सकते हैं। पारिवारिक इतिहास तमाम कारणों में सबसे पहली वजह है। इसके अलावा न्यूरो-केमिकल असहजता, हारमोनल असंतुलिन, तनाव आदि के कारण भी सिजोफ्रेनिया व्यक्ति को धर दबोच सकती है। साथ ही सामाजिक दबाव भी सिजोफ्रेनिया का एक बड़ा कारण है।
  • तमाम शोध सर्वेक्षण इस बात की तस्दीक करते हैं कि सिजोफ्रेनिय और प्रतिरक्षा प्रणाली का गहरा सम्बंध है। बात सिर्फ सिजोफ्रेनिया की नहीं है। वास्तव में तमाम मस्तिष्क सम्बंधी बीमारियां जैसे आटिज्म या सिजोफ्रेनिया के मरीजों में सामाजिक बर्ताव गहरी छाप छोड़ती है। यही  नहीं यदि ऐसे मरीजों को समाज मदद करे तो उनके इलाज के लिए नए दरवाजे भी खुलते हैं। वास्तव में प्रतिरक्षा तंत्र और सिजोफ्रेनिया का न सिर्फ सम्बंध है वरन बीमारी के अनुसार ही प्रतिरक्षा तंत्र बर्ताव करती है। अतः इस बात की अनदेखी नहीं की जा सकती कि सिजोफ्रेनिया में प्रतिरक्षा तंत्र का बदला बर्ताव आवश्यक है।
  •  यदि आपके घर का कोई सदस्य एकाएक अपनी दुनिया में खोने लगे। उसे किसी से बात करना पसंद न हो। अकसर कमरे में बंद रहे। यही नहीं खोया खोया सा ही रहे। तनाव से भरा लगे। कमरे से जब बाहर निकले तो खुश सा महसूस हो, किसी व्यक्ति से बात करते हुए उसे परेशानी हो तो समझ जाएं कि सावधान होने का समय आ गया है। यदि घर के किसी भी सदस्य में इस तरह के लक्षण देखें तो नोटिस करें कि वह अकेले कमरे में क्या करता है? कहीं किसी से बातें तो नहीं करता? कहीं उसे दूसरों से बातें करते हुए कोफ्त तो नहीं होती। पारिवारिक सहयोग से भी इसका इलाज किया जा सकता है।


 जैसे आपको सिजोफ्रेनिया जैसी घातक बीमारी के उपरोक्त कोई भी लक्षण देखने को मिले तो न सिर्फ सावधान होएं वरन घर के अन्य सदस्यों को भी इसके बारे में सूचित करें। इतना ही नहीं डाक्टर से संपर्क करें। सिजोफ्रेनिया के मरीज खुद को बीमार नहीं मानते। अतः उनका इलाज कराते हुए उन्हें एहसास न होने दें कि वे बीमार हैं। इसके उलट संभव हो तो डाक्टर को उनाक दोस्त बनाएं और फिर इलाज आगे बढ़ाएं।

 

Image Source-Getty

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