केवल बुढापा ही एल्जाइमर का कारण नहीं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 13, 2015
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Quick Bites

  • कम उम्र मे भी हो सकता है एल्जाइमर रोग।
  • धूम्रपान, अनुवांशिकता आदि होते है कारण।
  • भ्रम होना, व्यवहार परिवर्तन इसके लक्षण।
  • इससे आपके दिल को हो सकता है नुकसान।

ये एक गलत धारणा है कि डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसी बीमारी सिर्फ बुढ़ापे मे हो सकती है। जबकि शोध बताते है कि आजकल 30 से 40 की उम्र के लोगो मे भी ये बीमारी के लक्षण आसानी से देखे जा सकते है। छोटी-छोटी बातों को भूलने की आदत कब हमारे पहचानने, सोचने और समझने की शक्ति को छीन लेती है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों को एल्जाइमर और डिमेन्शिया जैसी बीमारी का शिकार बना देती है, पता ही नहीं चल पाता। इसलिए कम उम्र मे भी अगर आपको ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो तो डाक्टर्स से जरूर मिले।

Alzhmier in Hindi

कम उम्र मे अल्जाइमर

मस्तिष्क परिवर्तनशील है, जिसमें उम्र के साथ बदलाव होता रहता है। कम उम्र से ही स्वस्थ जीवनशैली संबंधी आदतों से दिमाग पर बुरे असर को कम किया जा सकता है। जैसे-जैसे पेट का आकार बढ़ता है, दिमाग सिकुड़ने लगता है।ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 30 वर्ष की आयु में मोटापे के शिकार लोगों में डिमेंशिया होने की आशंका तीन गुणा बढ़ जाती है। डिमेंशिया चालीस-पचास या उससे भी कम उम्र में हो सकता है।नामों को याद न रख पाना, भ्रम होना, व्यवहार परिवर्तन, मूड में तेजी से उतार-चढ़ाव, सामान्य संख्याओं को याद करने व लिखने में परेशानी होना, दिमाग पर संतुलन न रहना व सामान्य से अलग ढंग से पेश आना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
Dimensia in Hindi

क्या होते है इसके कारण

डब्ल्यूएचओ के अनुसार धूम्रपान करने वालों में डिमेंशिया का खतरा 45% अधिक होता है। दुनियाभर में अल्जाइमर के 14% मामलों में धूम्रपान प्रमुख कारण के रूप में पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। इससे दिमाग की रक्त धमनियां संकरी हो जाती हैं और मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।डिमेंशिया से पीड़ित लोगों को डिमेंशिया का खतरा अधिक होता है। डिप्रेशन व अधिकतनाव की स्थिति में शुरुआत से ही उपचार पर ध्यान देना अल्जाइमर को रोकता है। किसी एक अकेले कारण को एल्जाइमर रोग के लिए कारण के रूप में बतलाया नहीं गया है। यह संभव है कि आयु, आनुवांशिक विरासत और परिस्थितियों को शामिल कर संसर्ग कारक इसके लिए जिम्मेवार हैं। नाड़ी संबंधी डिमेंशिया दिमाग के लिए आपूर्ति करने वाली रक्त नसों को क्षति पहुंचने से होता है।


कम उम्र से इन समस्याओं से पीड़ित रहना मस्तिष्कीय प्रक्रिया को भी नुकसान पहुंचाता है। एक सीमा से अधिक ग्लूकोज स्तर का बढ़ना चीजों को याद रखने, निर्णय लेने और दिमाग के संकेतों को ग्रहण करने की क्षमता में बाधा पहुंचाता है।

 

Image Source- Getty

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