एनीमिया का कारण बनती हैं गर्भावस्था में आयरन की कमी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 23, 2011
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Quick Bites

  • आयरन कमी से जन्म लेने वाले शिशु में कमजोरी और एनीमिया।
  • अतिरिक्त आयरन की आवश्यकता होती है गर्भावस्था के दौरान।  
  • 35-75 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को हीमोग्लोबिन की कमी।
  • पालक, मेथी, सरसों, बथुआ और पुदीना जैसी सब्जियां खाएं।

गर्भावस्था के दौरान सबसे अधिक पाई जाने वाली समस्याओं में हीमोग्लोबिन की कमी सबसे अधिक होती है। गर्भावस्था में आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती हैं।

iron deficiency during pregnancy
गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी को रक्त जांच में होने वाले हीमोग्लोबिन टेस्ट से पता लगाया जा सकता है। आयरन की कमी तब होती है जब लाल रक्त कोशिकाओं से शरीर में ऑक्सीजन वहन करने के लिए पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं होता।


आयरन की कमी जन्म लेने वाले शिशु में कमजोरी और एनीमिया का कारण बनती है। डॉक्टर्स कई बार आयरन की कमी होने पर गर्भावस्था के दौरान आयरन की गोलियां या आयरन सप्लीमेंट्स देते हैं जिससे गर्भवती महिला स्वस्थ रहें। आइए जानें गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी से क्या-क्या‍ नुकसान हो सकते हैं।

 

गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी

 

  • गर्भावस्था के दौरान आपको सामान्य से दोगुने यानी अतिरिक्त आयरन की आवश्यकता होती है ताकि आप तथा आपका शिशु स्वस्थ रहें। यदि आपके शरीर में हीमोग्लोबिन के उत्पादन हेतु आयरन की पर्याप्त मात्रा नहीं है तो आपको एनीमिया हो सकता है।
  • गर्भवती महिला के शरीर को सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक रक्त की मात्रा चाहिए होती है, अत: गर्भवती महिला की आयरन की आवश्यकता भी उसी हिसाब से बढ़ जाती है।
  • डब्ल्यू एच ओ की रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में 35-75 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को हीमोग्लोबिन की कमी होती है। यही नहीं, हमारे देश में होने वाले मलेरिया जैसे रोग रक्त की कमी के कारण और बढ़ जाते हैं।
  • कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के शुरुआती दौर में आयरन की अच्छी मात्रा होती है इसलिए उन्हें दूसरी अथवा तीसरी तिमाही में ही डॉक्टर्स आयरन सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं।
  • आयरन सप्लीमेंट तभी सर्वोत्तम रूप से समाहित होते हैं जब उन्हें खाली पेट लिया जाए, परन्तु गर्भावस्था में ऐसा करना मुश्किल हो सकता है। भोजन करने से लगभग एक घंटा पहले इन सप्लीमेंट्स को लेने का प्रयास करें।
  • यदि एनीमिया का पता चल जाए और गर्भावस्था में ही इसका उपचार हो जाए तो आपके शिशु पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि गर्भावस्था के मध्य में यानी दूसरे ट्राइमेंस्टर के दौरान शिशु सबसे अधिक आयरन का प्रयोग करता है जिससे शरीर में आयरन की कमी हो सकती है।
  • आयरन की कमी से होने वाले बच्चे के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो सकता है, बच्चे के वजन पर असर पड़ सकता है, बच्चे को सांस संबंधी बीमारियां या फिर एनीमिया की शिकायत हो सकती है। 
  • विटामिन सी आपके शरीर में भोजन से आयरन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। आप दाल के साथ पालक, मेथी, सरसों, बथुआ, धनिया और पुदीना जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां भी खाएं। संतरे के जूस की भरपूर मात्रा पीने से भी आप हीमोग्लोबिन की कमी से बच सकती हैं।
  • इसके अलावा आप कच्चे नारियल के कुछ टुकड़े, मेवे, किशमिश तथा खजूर का सेवन करें। मूंगफली की पट्टी, रेवड़ी आदि में आयरन की भरपूर मात्रा होती है।


गर्भावस्था में रक्त की कमी के सबसे आम लक्षण हैं सांस लेने में कठिनाई एवं थकान होना। वैसे आयरन की कमी का सही तरह से निदान ब्लड जांच से ही लगाना चाहिए।



 

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