बढ़ रही है एड्स के प्रति जागरूकता

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 01, 2011
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Jaagruk hote aids rogi

कुछ साल पहले तक एड्स दुनियाभर में एक महामारी का रूप लिए हुए था, लेकिन खुशी की बात ये है कि इस महामारी को कम करने के प्रयास लगातार सफल हो रहे हैं। यही वजह है कि एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या में भारी कमी आ रही है। और इसके कारणों में सबसे प्रमुख है, लोगों में एड्स के प्रति बढ़ती जागरूकता।
 
एड्स पीड़ित लोगों के नजरिये में भी पिछले कुछ सालों में पॉजिटिव बदलाव आया है। जो लोग एड्स पीड़ित हैं वे अब निराश होकर बैठने के बजाय जीवन को सकारात्मक तरह से जीना सीख रहे हैं। यानी अब उन्होंने एड्स के साथ जीना सीख लिया है। वे दूसरे एड्स पीड़ितों की मदद करने में जुटे हैं। अन्य लोगों की काउंसलिंग करना या फिर एड्स विरोधी दूसरे अभियानों में भाग लेना इन लोगों को अच्छा लगने लगा है। हैं। इस तरह के कामों से ये लोग आत्मनिर्भर होने लगे हैं और आराम से अपना इलाज करवा रहे हैं।
 
दिलचस्प रूप से एड्स पीड़ितों की मदद करने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ये संगठन एड्स पीड़ितों को जीने की नई राह दिखा रहे हैं।
एड्स पीड़ितों के लिए समाज के हर क्षेत्र में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। यहां तक कि ऐसे कानून भी बन रहे हैं, जिसके तहत ऐसे लोगों को नौकरी मिलने के साथ-साथ समाज की मुख्यधारा में मिलने का अधिकार मिल जाएगा। इतना ही नहीं एड्स के दौरान इलाज में होने वाली दिक्कतों को भी दूर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
 
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एड्स के मरीजों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन भी तैयार कर ली है, जिसके अनुसार, नए एआरटी सेंटर खुलेंगे  और 150 सीडी 4 के बजाय 300 सीडी 4 की थेरेपी शुरू होगी। सीडी 4 सेल्स की मात्रा बढ़ने से एड्स के मरीजों के जीवन काल को और अधिक बढ़ाया जा सकेगा।
 
एड्स पीड़ित जो लोग नौकरी कर रहे हैं, उनके लिए जीवन जीना आसान है। लेकिन जो लोग बेरोजगार हैं, उनके लिए तमाम स्वयं सेवी संगठनों और नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी की मदद से आय के कई विकल्प खोजे जा चुके हैं। जिससे एड्स मरीज सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकेंगे।
 
क्या आप जानते हैं, एड्स का निदान संभव है। यदि एड्स का निदान समय पर किया जाए तो एड्स पीड़ित मरीज को असमय मृत्यु होने से रोका जा सकता है।

 

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यदि समय से पहले एड्स के निदान से संबंधित जांचे और उपचार करवाया जाएं और उपचार के दौरान 300 सीडी 4 या एआरटी थेरेपी दी जाएं लंबे समय तक एड्स मरीज भी सहज जिंदगी जी सकते हैं। गौरतलब है कि एड्स के निदान के लिए एलीसा टेस्टा, वेस्टमर्न ब्लॉगट टेस्टै, एचआईवी पी-24 एंटीजेन (पीसीआर) और सीडी-4 काउंट इत्यादि टेस्ट किए जाते हैं।
 
बदलते समाज और आधुनिकता के कारण ही आज एड्स के मरीज सम्मान जनक जीवन जीने की ओर अग्रसर हैं। यदि आपके आसपास भी एड्स पीड़ित हैं तो आप भी उन्हें आशावादी जीवन जीने के लिए प्रोत्साहन दे सकते हैं। बस इसके लिए जरूरत है तो सिर्फ उनके साथ आम इंसान की तरह व्यवहार करने की। जिससे एड्स मरीज भी सहज जीवन जी सकें।

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