मैमोग्राफी से जुड़ी जरुरी बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 13, 2013
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Quick Bites

  • मैमोग्राफी से की जाती है स्तन कैंसर की जांच।
  • स्तनों में होने वाले ट्यूमर का पता लगाया जाता है।
  • 40 साल की उम्र में मैमोग्राफी की कराएं नियमित स्क्रीनिंग।
  • इस पीड़ारहित परीक्षण में लगता है 30 मिनट से कम समय।

महिलाओं में होने वाली आम व गंभीर समस्या है स्तन कैंसर। सही समय पर इसका इलाज नहीं होने पर यह खतरनाक हो सकता है। मैमोग्राफी एक ऐसी तकनीक है जिसका प्रयोग स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है। इससे महिलाओं के स्तनों में होने वाले ट्यूमर का पता लगाया जाता है।
Mammography

मैमोग्राफी एक्स-रे की ही एक श्रृंखला है जो कि स्तन के कोमल टिश्यू के चित्र को दिखता है। यह एक मंहगी स्क्रीनिंग प्रक्रिया है, जिससे स्तन कैंसर की पहचान आसानी से हो सकती हैं। यह एक्स-रे गांठ महसूस होने से दो वर्षों तक किया जा सकता है।

पहले स्तन कैंसर की समस्या केवल उम्रदराज महिलाओं में होती थी लेकिन आजकल कम उम्र की महिलाओं में भी स्तन कैंसर की आशंका तेजी से बढ़ रही है। वार्षिक मैमोग्राम करवाने के लिए सभी 50 साल और उससे बड़ी उम्र की महिलाओं को बोला जाता है।

 

कुछ शोधों द्वारा यह बात भी सामने आई हैं कि सभी महिलाओं को 40 साल की उम्र में मैमोग्राफी के साथ नियमित स्क्रीनिंग शुरू करानी चाहिए। अगर आपके परिवार में पहले से ही किसी को स्तन कैंसर रहा है, तो आपको समय-समय पर मैमोग्राम करानी चाहिए।

मैमोग्राफी एक पीड़ारहित परीक्षण है, जो कि आमतौर पर 30 मिनट से भी कम समय लेता है। एक्स-रे का प्रयोग व्यक्ति विशेष के स्वास्‍थ्‍य को देखकर किया जाता है। एक्स–रे लेने में सिर्फ कुछ सेकंड लगते है, लेकिन इसमें अधिक समय इसलिए लग जाता है, क्योंकि प्रत्येक पोज़ीशन के लिए एक्स-रे की स्थिति भी बदलनी पड़ती है।

 

मैमोग्राफी से स्तन कैंसर के लगभग 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत केसेज़ में सुरक्षा की जा सकती है। यह असामान्य है कि एक मैमोग्राम से सब कुछ पता चल जाये, इसके लिए अतिरिक्त परीक्षण की आवश्यकता भी होती है।

 

ज्यादातर परिक्षण सुविधाएं प्रभावित असामान्य क्षेत्र की बडी-बड़ी छवियां लेती हैं। कभी-कभी असामान्य क्षेत्र को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड भी करना पड़ता है। एक मैमोग्राफी के दौरान बहुत सारी असामान्यताएं पाए जाने पर यह कैंसर नहीं होता हैं।
 

कुछ स्थितियों में, डॉक्टर सुई की मदद से बायोप्सी क्रम निर्धारित करने की सलाह देता है, अगर यह घातक हो तो बायोप्सी के इस प्रकार में स्तन के संदिग्ध क्षेत्र से कोशिकाओं को जांच के लिए एक सुई के प्रयोग से हटा कर, उसके बाद स्लाइड पर फैलाया जाता है। इसके पश्चाशत यह स्लाइड प्रयोगशाला में भेजी जाती है, जिसकी माइक्रोस्कोगप से जांच की जाती है।

मैमोग्राफी का मकसद स्तन कैंसर का पता लगाना है। समय पर स्तन कैंसर का पता लगने पर कैंसर से बचा जा सकता है और प्रारंभिक अवस्था में इसका पता लगने पर इससे बचना बहुत ही आसान है।

 

 

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