विटामिन 'ई' के लाभ और महत्व

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 20, 2014
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Quick Bites

  • अच्छे एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है विटामिन 'ई'।
  • 6 महीने के शिशु को यह 4 मिलिग्राम प्रतिदिन मिलना चाहिए।
  • विटामिन 'ई' शरीर में लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण करता है।
  • विटामिन 'ई' की सही मात्रा मानसिक समस्‍याओं से बचाती है।

हमारे शरीर के लिए सभी विटामिन्स का अपना अलग-अलग महत्व है, और उसे किसी न किसी रूप में विटामिन की जरूरत पड़ती ही है। लेकिन इनमें से कुछ विटामिन महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। ऐसा ही एक विटामिन है, 'विटामिन ई'। विटामिन ई शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आइये जानते हैं विटामिन ई के लाभ और महत्व क्या है।

Benefits of Vitamin E


विटामिन 'ई' का महत्व

यूं तो हमारे शरीर के लिए सभी विटामिन्स का अपना-अपना महत्व है, लेकिन उनमें कुछ की खास भूमिका होती है। ऐसे विटामिन्स में एक प्रमुख है विटामिन ई। चाहे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाए रखने की बात हो या शरीर को एलर्जी से बचाए रखने की या फिर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में प्रमुख भूमिका निभाने की, यह विटामिन बहुत जी जरूरी होता है। विटामिन ई एक ऐसा विटामिन है जो, हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होता है। यह वसा में घुलनशील होता है, और एक अच्छे एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है। शरीर में विटामिन ई की कमी से कई बीमारियां हो सकती हैं।

 

 

शरीर को स्वस्थ बनाएं रखने के लिए विटामिन ई काफी लाभदायक होता है। सही मात्रा में इसके सेवन से शरीर कई प्रकार की बीमारियां से बचा रहता है और त्वचा पर भी निखार बना रहता है। इसे प्राप्त करना भी बहुत मुश्किल नहीं है। विटामिन ई वनस्‍पति तेल, गेंहू, हरे साग, चना, जौ, शकरकंद, खजूर, चावल के मांढ, क्रीम, बटर, स्‍प्राउट, कड लीवर ऑयल, आम, पपीता, कद्दू, पॉपकार्न और फ्रूट में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा यह मछली में भी अधिक होता है।

 


इसके आठ अलग-अलग रूप होते हैं। कोशिकाएं एक दूसरे से इंटरएक्ट करने में विटामिन ई का उपयोग करती हैं और कई महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। आपको प्रतिदिन कितने विटामिन ई की आवश्यकता है, यह आपकी उम्र और लिंग पर निर्भर करता है। किस उम्र में कितना विटामिन ई चाहिए, जानिए-

 

  • 6 महीने के शिशु को 4 मिलिग्राम प्रतिदिन (नवजात शिशु)
  • 7 से 12 महीने के शिशु को 5 मिलिग्राम प्रतिदिन (नवजात शिशु)
  • 1 से लेकर 3 साल के बच्चे को 6 मिलिग्राम प्रतिदिन
  • 4 से लेकर 8 साल के बच्चे को 7 मिलिग्राम प्रतिदिन
  • 9 से लेकर 13 साल के बच्चे को 11 मिलिग्राम प्रतिदिन
  • 14 साल और उससे बडे मनुष्यों को 15 मिलिग्राम प्रतिदिन
  • स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 17 मिलिग्राम प्रतिदिन

 

विटामिन 'ई' की कमी से नुकसान


विटामिन ई की कमी से वीर्य निर्बल हो जाना, नपुंसकता, बांझपन, आंतों में घाव, गंजापन, गठिया, पीलिया, मधुमेह तथा लिमर व हार्ट प्रोबलम्स हो सकती हैं। इसके अलावा विटामिन ई की कमी से शरीर के अंगों का सुचारू रूप से कार्य न कर पाना, मांसपेशियों में अचानक से कमजोरी आ जाना तथा नजर कमजोर हो जाना व दिखने में झिलमिलाहट महसूस होना, जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

 

विटामिन 'ई' के लाभ

 

एंटीऑक्‍सीडेंट

विटामिन ई युक्त चीजों के सेवन से शरीर में एंटीऑक्‍सीडेंट को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन विटामिन ई के लिए केवल प्राकृतिक खाद्य पदार्थो का इस्‍तेमाल करना चाहिए।

 

लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण

विटामिन ई, शरीर में खून को बनाने वाली रेड ब्‍लड सेल्‍स यानि लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। अगर प्रेग्‍नेंसी के दौरान गर्भवती स्‍त्री विटामिन ई का सेवन नहीं करती है तो उसके बच्‍चे को एनीमिया यानि खून की कमी की शिकायत रहेगी।

 

त्वचा को निखारे

विटामिन ई त्‍वचा में कसाव और दमक बनाए रखता है। विटामिन – ई बेहद लाभकारी त्वचा के लिए बेहद लाभदायक होता है, इसके सेवन से त्‍वचा पर आई झुर्रियां भी दूर हो जाती हैं।

 

थॉयराइड और पिट्यूटरी ग्रंथी की कार्यशैली में सहायक

शरीर में विटामिन ई की कमी का सबसे ज्‍यादा प्रभाव थॉयराइड ग्रंथी और पिट्यूटरी ग्रंथी की कार्य क्षमता पर पड़ता है। इसकी कमी से यह दोनों ही ग्रंथियां धीमे काम करने लगती हैं, जिससे शरीर में काफी थकान और भारीपन होने लगता है।

 

सेल मेमब्रेन बनना

शरीर में सेल मेमब्रेन वे परत होती हैं जो ब्‍लड सेल्‍स को बनाएं रखने के उनके ऊपर चढ़ी होती हैं। यदि शरीर में विटामिन ई की कमी हो जाए तो यह परत धीरे–धीरे कमजोर पड जाती हैं, और बाद में ब्‍लड सेल्‍स के बनने में मदद नहीं कर पाती। जिस कारण शरीर में खून की कमी हो सकती है।

 

मानसिक समस्‍याएं करे दूर

शरीर में विटामिन ई की पर्याप्‍त मात्रा होने पर व्‍यक्ति मानसिक तनाव और समस्‍याएं से बचा रहता है। शओध बताते हैं कि विटामिन ई की कमी से मानसिक समस्‍याएं भी हो सकती हैं।


ध्यान रहे कि सप्लीमेंट के रूप में विटामिन ई के हाई डोज लेना हानिकारक हो सकता है। शरीर में इसकी अधिकता से इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा पैदा हो जाता है। गर्भवती महिला के शरीर में विटामिन ई की अधिक मात्रा से बच्चे में जन्म दोष भी हो सकते हैं। इसलिए विटामिन ई के सप्लीमेंट बिना डॉक्टर की सलाह के कतई न लें। साथ ही वे लोग जिनमें उन लोगों जिनमें विटामिन 'के' की कमी हो, को भी विटामिन ई का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए

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