कैसे होता है ग्लूकोमा का उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 27, 2013
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Quick Bites

  • ऑप्टिक नर्व पर तरल का दबाव अधिक होने पर होता है ग्लूकोमा।
  • ग्लूकोमा की स्थिति और प्रकार पर निर्भर करता है इसका उपचार।
  • एंटी ऑक्सिडेंट, ऑक्सिजन और न्यूरो प्रोटेक्शन से हो सकता है इलाज।
  • इसके स्थाई निदान के लिए चिकित्सकों के प्रयास अभी भी हैं जारी।

हमारे देश और पूरी दुनिया में अंधापन एक बड़ी समस्या है। और इसके प्रमुख कारणों में से एक है काला मोतिया अर्थात ग्लूकोमा। इसलिए समय रहते ग्लूकोमा का इलाज करा लेना जरूरी होता है, ताकि अंधेपन से बचा जा सके। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि कैसे करें ग्लूकोमा का इलाज।

How to treat Glaucoma

सबसे पहले ग्लूकोमा के कारणों और इसके इलाज के बारे में बात करने से पहले हमें समझना होगा कि आंख की रचना क्या है और यह कैसे काम करती है। दरअसल आंख में मौजूद कॉर्निया के पीछे आंखों को सही आकार और पोषण देने वाला तरल पदार्थ होता है, जिसे एक्वेस ह्यूमर कहा जाता है। और लेंस के चारों ओर स्थित सीलियरी टिश्यू इस तरल पदार्थ को बनाते रहते हैं। और यह द्रव पुतलियों के माध्यम से आंख के भीतरी हिस्से में जाता है। इस तरह से आंखों में एक्वेस ह्यूमर का बनना और बहना लगातार जारी रहता है। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए इस प्रक्रिया का होना जरूरी होता है।

 

आंखों के अंदरूनी हिस्से में कितना दबाव रहे यह तरल पदार्थ की मात्रा पर निर्भर रहता है। लेकिन ग्लूकोमा हो जाता है तो आंखों में इस तरल पदार्थ का दबाव बहुत ज्यादो हो जाता है। यहां तक कि कभी-कभी आंखों की बहाव नलिकाएं भी रुक जाती हैं, लेकिन सीलियरी ऊतक फिर भी इसे लगातार बनाते ही रहते हैं। ऐसी स्थिति में जब आंखों में ऑप्टिक नर्व के ऊपर तरल का दबाव अचानक अधिक हो जाता है तो ग्लूकोमा बन जाता है। यदि आंखों में तरल का यह अधिक दबाव लंबे समय तक बना रहे तो आंखों की ऑप्टिक नर्व बरबाद हो सकती हैं। यदि समय रहते इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो इससे एंधापन हो सकता है।

 

ग्लूकोमा का लेजर उपचार-

ग्लूकोमा का उपचार पूरी तरह से उसकी स्थिति और प्रकार पर निर्भर करता है। आमतौर पर इसके उपचार में लगातार दवाइयां लेनी पड़ती हैं। ज्यादातर मरीजों का ग्लूकोमा दवाइयों से नियंत्रण में आ जाता है। लेकिन एक स्थित ऐसी भी आती है, जब दवाएं बेअसर होने लगती हैं और फिर ऐसे में लेजर सर्जरी करनी पड़ती है। हालांकि इसमें मरीज को अस्पताल में भर्ती कर चीर-फाड़ नहीं करनी पड़ती। इसकी सर्जरी के दौरान आंखों को थोड़ी देर के लिए सुन्न किया जाता है और फिर लेजर से इलाज किया जाता है।

 

आंखों में होने वाली ग्लूकोमा जैसी खतरनाक बीमारी के स्थायी निदान के लिए चिकित्सकों के प्रयास अभी जारी हैं। इसके लिए स्वास्थ संस्थाएं शोध करती भी रहती हैं। शोधकर्ता उस जीन का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जो इस बीमारी के लिए जिम्मेदार है। भारत में नेत्र चिकित्सकों ने लगभग 200 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि यह यह आनुवांशिक बीमारी है और उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी थी। डॉक्टर बताते हैं कि यदि उस जीन का पता लगा लिया जाए जिसकी वजह से ग्लूकोमा हुआ है, तो पीड़ित की आंखों की रौशनी बचाई या वापस लायी जा सकती है।

 

ग्लूकोमा के उपचार के लिए हर्बल दवा-

हाल ही में ग्लूकोमा के इलाज के लिए एक हर्बल दवा को बनाया गया है। इस दवा में एंटी ऑक्सिडेंट, ऑक्सिजन और न्यूरो प्रोटेक्शन वाले औषधीय पौधों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें तुलसी, एलोवेरा, आंवला और जड़माला जैसे आठ हर्बल प्लांट शामिल होते हैं। बाजार में मौजूद ग्लूकोमा के इलाज की एलोपैथी के जो भी आई ड्रॉप इस्तेमाल होते हैं, वे काफी महंगे हैं और साथ ही इसके कुछ साइड इफेक्ट भी देखे जाते हैं। इस हर्बल दवा में आंखों में ऑक्सिजन सप्लाई सामान्य करने के साथ-साथ  विजन का प्रेशर कम करके ग्लूकोमा ठीक करने व मोतियाबिंद डिजॉल्व करने के गुण भी होते हैं। इसके अलावा, इसमें न्यूरो प्रोटेक्शन तत्व भी हैं, जिससे दवा के इस्तेमाल से किसी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होता। इस लिहाज से यह हर्बल दवा ग्लूकामा के इलाज के लिए अच्छा विकल्प है। हालांकि यह उपचार अभी आरंभिक दौर में है, तो इसके प्रभावों को छीक से समझने में अभी समय लगेगा।

 

 

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