मिडलाइफ के बाद भी कर सकते हैं खानपान में स्‍वस्‍थ सुधार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 15, 2014
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Quick Bites

  • 40 और 50 की उम्र में खानपान में होती है समस्‍या।
  • इस दौरान व्‍यक्ति पर नकारात्‍मक विचार होते हैं हावी।
  • तनाव और अवसाद के साथ वजन बढ़ने लगता है।
  • नियमित व्‍यायाम और प्रोटीन का अधिक सेवन करें।

उम्र बढ़ने के साथ कई तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें होने लगती हैं, इसका प्रमुख कारण है खानपान में पौस्टिक तत्‍वों का अभाव। क्‍योंकि उम्र के इस पड़ाव पर हम खानपान को लेकर लापरवाह हो जाते हैं। 40 और 50 की उम्र में खानपान में अनियमितता के कारण व्‍यक्ति का वजन बढ़ता है। अगर आपके साथ भी इस तरह की समस्‍या हो रही है तो स्‍वस्‍थ आहार का सेवन दोबारा शुरू कर सकते हैं, इस तरह आप अपने खानपान पर नियंत्रण कर सकते हैं और बढ़ते वजन को भी कम कर सकते हैं। इस लेख में विस्‍तार से जानिये मिडलाइफ में खानपान में होने वाली अनियमितता और उसमें सुधार करने के तरीके के बारे में।
 Post-Midlife Crisis

मिडलाइफ और खानपान

जब व्‍यक्ति की उम्र 40 और 50 की होती है तब उसके दिमाग में नकारात्‍मक विचार अधिक आते हैं। इसके लिए उसकी पारिवारिक जिम्‍मेदारियां ही उत्‍तरदायी होती हैं। कुछ लोगों के बच्‍चे घर से दूर चले जाते हैं तो कुछ के बच्‍चे उन्‍हें छोड़ देते हैं, अकेलेपन के शिकार ऐसे लोगों में इसका असर उनके खानपान पर दिखता है। कुछ लोग को अपने जीवन में निर्धारित उद्देश्‍य नहीं मिल पाता है इसके कारण भी वे दुखी रहते हैं। इन सबका असर खानपान पर पड़ता है और मिडलाइफ में खानपान से संबंधित समस्‍यायें होने लगती हैं।


भावनात्‍मक दर्द अधिक रहता है

उम्र के इस पड़ाव पर व्‍यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव भावनाओं का पड़ता है। अपनी इच्‍छाओं की पूर्ति न कर पाने के काराण व्‍यक्ति इमोशनली कमजोर होने लगता है। इसके कारण तनाव और अवसाद उसके साथी हो जाते हैं, वजन भी बढ़ने लगता है। ऐसे लोग अकेलापन दूर करने के लिए शराब और धूम्रपान का सहारा लेते हैं।

हार्मोन का संतुलन बनायें

उम्र बढ़ने के साथ हार्मोन में असंतुलन होने लगता है, इसके लिए सबसे अधिक खानपान की अस्‍वस्‍थ आदतें जिम्‍मेदार होती हैं। जैसे-जैसे प्रोजेस्टेरोन का स्‍तर गिरता है एस्ट्रेजन (पुरुषों में भी एस्ट्रेजन होता है) ज्यादा प्रभावशाली होने लगता है। इसके कारण शरीर में फैट जमने लगता है। इसे सामान्‍य बनाये रखने के लिए उम्र के इस पड़ाव पर पत्ता गोभी, ब्रोकोली, शलजम आदि सब्जियों का सेवन करें, इससे एस्ट्रोजन की अधिक मात्रा को कम करने में में मदद मिलती है। अघुलनशील फाइबर भी अतिरिक्त एस्ट्रोजन को बाहर निकालने में मदद करता है।


ब्‍लड शुगर और डायबिटीज

अगर खानपा में अनियमितता हो तो उम्र के इस पड़ाव पर इंसुलिन के उत्‍पादन में भी कमी आती है जिसके कारण डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है। अधिक वजन का भी इसमें पम्रुख योगदान होता है। जैसे-जैसे हम चालिस की उम्र पार करते हैं, हमारा शरीर पर्याप्त मात्रा में ब्लड शुगर प्रोसेस के लिए संघर्ष करता है। ब्लड शुगर घटने या बढ़ने का सामना करने के लिए शरीर हमेशा कठिन परिश्रम करता है लेकिन जब व्यक्ति चालिस या उससे अधिक का हो जाये तब पैनक्रियाज पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

Midlife Eating Crisis in Hindi
खानपान में कैसे बनायें संतुलन

अपने खानपान में सुधार के लिए सबसे पहले अपनी सोच को बदलें, सकारात्‍मक सोच रखें। 40 की उम्र पार करने का मतलब यह नहीं कि सबकुछ खत्‍म हो गया। नियमित रूप से व्‍यायाम करना शुरू कीजिए, व्‍यायाम से इंडोर्फिन हार्मोन का स्राव बढ़ेगा और मूड अच्‍छा होगा। इसके बाद आप नियमित रूप से जितनी कैलोरी ले रहे हैं उसका ध्‍यान रखें, शरीर के लिए कैलोरी की भरपाई के लिए फैट की बजाय प्रोटीन का अधिक सेवन करें। स्‍नैक्‍स में सूखे मेवे और फल शामिल करें। सोने से दो घंटे पहले डिनर करें, इससे खाना पचने में आसानी होती है।

मिडलाइफ में स्‍वस्‍थ खानपान के साथ नियमित रूप से जांच भी जरूरी है, अगर आपका वजन अधिक है तो शुगर के स्‍तर की जांच कराते रहें और नियमित रूप से चिकित्‍सक के संपर्क में रहें।

 

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