सफर के दौरान हैजा से कैसे बचें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 22, 2014
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Quick Bites

  • हैजा रोग से बचने के लिए खुले में बिकने वाला खाना ना खाएं।
  • घर से खाना और पानी लेकर ही चलें।
  • जिन खाद्य पदार्थो पर मक्खियां बैठी हो उन्हें ना खाएं।
  • फलों को बिना धोएं कभी ना खाएं।

हैजा एक संक्रामक रोग है जो कि 'विबियो कॉलेरी' नामक बैक्टीरिया से फैलता है। इसका असर आंतों पर होता है। कभी यह बीमारी जानलेवा हुआ करती थी, लेकिन आज चिकित्‍सा विज्ञान की तरक्‍की की वजह से इस बीमारी को काबू कर लिया गया है। लेकिन फिर भी अगर सावधानी न बरती जाये तो यह महामारी का रूप धारण कर लेता है।


causes of choleraइस रोग के लक्षण दो-तीन दिन में नजर आते हैं। इलाज के बाद जब रोगी ठीक हो जाता है, तब भी काफी समय तक ये बैक्टीरिया व्‍यक्ति के शरीर में बने रहते हैं। गंदे पानी का सेवन, दूषित खाद्य पदार्थों का सेवन ही इस रोग की सबसे प्रमुख वजह है। इस बैक्टीरिया के कई प्रकार होते हैं, इसमें रोग के लक्षण के आधार पर संक्रमण के प्रकार का पता लगाया जाता है।

कहीं बाहर जाने से पहले हैजा के बारे में पर्याप्त जानकारी ले लेना जरूरी है। अकसर बाहर का खाना और पानी पीने से हैजा रोग होने की आशंका होती है। इसलिए कहीं भी बाहर जाने से पहले आप हैजा किस तरह फैलता है, इसकी पूरी जानकारी हासिल कर लें। इसके साथ ही सफर के दौरान अपने खाने पीने का पूरा ध्‍यान रखें। ऐसी जगह पर न खायें जहां साफ-सफाई का ध्‍यान न रखा गया हो।

आइए जानें यात्रा के दौरान हैजा रोग से कैसे बचें।

 

  •     जब कही बाहर जाएं तो साथ में पानी या खाना लेकर जाएं।
  •     स्‍वच्‍छ पानी ही पियें।
  •     बाहर का मांसाहारी भोजन करने से बचें।
  •     खुले में रखा हुआ खाना ना खाएं।
  •     खुले में रखे हुए कटे फल न खाएं।
  •     बाहर का ढका हुआ खाना ही खाएं।
  •     मक्खियों को भोजन पर न बैठने दें।
  •     मक्खियों वाली जगह यानी साफा सुथरी जगह पर खाना खाएं या बैठे।
  •     गलियों में बिकने वाला खाना कभी ना खाएं।
  •     अच्छी तरह से पका हुआ खाना ही खाएं।
  •     फलों को खाने से पहले उसे अच्छी तरह से धो लें।  

 

हैजा का उपचार

शरीर में पानी और नमक की मात्रा को तत्काल पूरा कर हैजा का सामान्य और सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है। मरीजों का उपचार मुंह से पुनर्द्रव घोल के जरिये किया जा सकता है। यह घोल चीनी और नमक से बनाया गया मिश्रण है, जिसमें पानी रहता है और इसे समुचित मात्रा में पिया जाता है। डायरिया या आंत्रशोथ के उपचार के लिए पूरी दुनिया में इसी मिश्रण का उपयोग किया जाता है। गंभीर बीमारी में नसों के जरिये यह घोल शरीर के अंदर पहुंचाया जाता है। समुचित तरीके और समय पर इस घोल का सेवन 99 फीसदी मरीजों को जान का कोई खतरा नहीं होता।

एंटीबायोटिक दवाएं बीमारी को गंभीर बनने से रोकती हैं और इसकी अवधि कम करती हैं। लेकिन वे शरीर में पानी की मात्रा बनाये रखने से अधिक महत्वपूर्ण नहीं होतीं। जिस व्यक्ति को गंभीर डायरिया और उल्टी हो तथा वैसे क्षेत्रों में, जहां हैजा फैलता हो, तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

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