बच्चों को सर्दियों में कैसे रखें गरम

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 14, 2014
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Quick Bites

  • बच्चों को ठंड से बचाने के लिए कपड़ें ठीक से पहनाएं।
  • बच्चों को सुलाने से पहले से उनके बिस्तर को गर्म कर लें।
  • रोजाना नहलाने की जगह स्पांजिग की मदद लें।
  • सर्दी-जुकाम होने पर भाप देना अच्छा होता है।

सर्दियों के मौसम में बच्चों को कई तरह के वायरल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। इस दौरान कई तरह के वायरस वातावरण में सक्रिय हो जाते हैं। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण छोटे बच्चे इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं।

baby careसर्दियों में बच्‍चों का खास खयाल रखने की जरूरत होती है। बच्‍चे संवेदनशील होते हैं ऐसे में उनकी खास देखभाल की जानी चाहिए। सर्दियों में बच्चे सबसे ज्यादा मौसमी बुखार की चपेट में आते हैं। इसके अलावा निमोनिया, टाइफाइड, पीलिया, दिमागी बुखार, डेंगू, एंटेरोवायरस, मलेरिया के संक्रमण भी सर्दियों में पहले की तुलना में बढ़ने लगे हैं। आइए जानें कैसे करें सर्दियों में बच्चों की देखभाल।


ठीक से कपड़े पहनाएं

छोटे बच्चों के सिर, पैर और कानों को हमेशा ढककर रखना चाहिए। वे सिर और पैरों से ही ठंड की चपेट में आते हैं। बच्चों को हमेशा दो तीन कपड़े पहना कर रखें क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है जिसकी वजह से उन्हें जल्द सर्दी लग जाती है। बच्चों को कपड़े के अंदर वॉर्मर जरूर पहनाएं उसके बाद टी शर्ट और स्वेटर पहनाएं। ज्यादा ठंड हो तो दो स्वेटर भी पहना सकते हैं। पैरों में भी वॉर्मर पहनाने के बाद ही पाजामा पहनाएं। सर्दियों में कॉटन के बजाय ऊनी जुराबें पहनाएं। घुटनों के बल चलनेवाले बच्चों को हाथों में दस्ताने भी पहनाएं।

साफ-सफाई रखें

नवजातों (एक महीने तक) को दो-तीन दिन छोड़कर नहलाना चाहिए। आप चाहें तो रोजाना गुनगुने पानी में टॉवल भिगोकर स्पॉन्जिंग कर सकते हैं। इससे बड़े बच्चों को रोजाना नहलाना चाहिए। अगर सर्दी-जुकाम है तो एक दिन छोड़कर भी नहला सकते हैं। रोजाना नहलाने से बच्चे कीटाणुओं से दूर रहते हैं। बच्चों को बंद जगह पर नहलाना चाहिए। अगर धूप में नहलाना चाहते हैं तो धूप शीशे से छनकर आनी चाहिए। खिड़की-दरवाजा खोलकर नहलाएंगे तो हवा लग सकती है।

मालिश जरूरी

बच्चे की रोजाना 10-15 मिनट मालिश जरूर करें। इससे बच्चे के मसल्स और जोड़ मजबूत होते हैं। मालिश बादाम, जैतून या बच्चों के तेल, किसी से भी अन्‍य तेल से कर सकते हैं। मालिश हमेशा नीचे से ऊपर की ओर करनी चाहिए। मालिश का असली मकसद खून के दौरे को दिल की तरफ ले जाना है। पैरों और हाथों पर नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें। साथ ही, दोनों हाथों को सीने के बीच रखकर दोनों दिशाओं में दिल बनाते हुए मालिश करें। मालिश और नहाने के बीच 15 मिनट का गैप जरूरी है। मालिश के बाद बच्चे को दोबारा पहने हुए कपड़े ही पहना दें। खुले बदन रहने से ठंड लगने की आशंका होती है।


धूप में बिठाएं

बच्चे को धूप के जरिए विटामिन डी की खुराक दिलाना चाहते हैं तो सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच कभी भी 20-25 मिनट के लिए उसे धूप में खेलने दें। विटामिन डी के मकसद से बच्चे को कपड़ों में पूरा ढंककर पार्क में ले जाएंगे तो कोई फायदा नहीं है। बच्चे के शरीर का कुछ हिस्सा (हाथ और पैर) खुला होना जरूरी है। बेहतर है कि शीशे से धूप अगर कमरे में आती हो तो बच्चे को वहां रखें क्योंकि खुले में रखने से हवा लग सकती है।

सुलाते हुए रखें ध्यान

बच्चे का बिस्तर गर्म रखें। उसके सोने से पहले हॉट वॉटर बॉटल रखकर बिस्तर को गर्म कर लें। बच्चे के सोने से पहले बॉटल वहां से हटा दें। बच्चे के बिस्तर पर पतली रजाई बिछाएं। इससे उसे गर्मी मिलेगी। बिस्तर गर्म रहेगा तो बच्चा अच्छी तरह सोएगा। 6 महीने तक के बच्चे को सिर्फ रूई वाला तकिया लगाएं। यह उसके सिर पर दबाव नहीं डालता और सिर की शेप भी ठीक रखता है। इस उम्र के बाद चाहें तो कोई भी पतला-सा तकिया लगा सकते हैं, लेकिन तकिया सॉफ्ट होना चाहिए।

मौसमी फल और सब्जी खिलाएं

एक साल तक के बच्चों को मां के दूध के अलावा जरूरत पड़ने पर फॉर्म्युला मिल्क (नैन, लैक्टोजन आदि) दें। इसके बाद दो साल के बच्चों को फुल क्रीम दूध दें। यह उम्र बच्चे के दिमाग और आंखों के विकास के लिहाज के काफी अहम होती है। अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है तो उसे मौसमी सब्जियां भी दें। उन्हें सारे फल भी खिला सकते हैं। यह गलत है कि बच्चों को ठंड में संतरा आदि नहीं देना चाहिए। बच्चों के लिए विटामिन-सी बहुत जरूरी है। 7-8 महीने के बच्चे को रोजाना आधा बादाम और आधा काजू पीसकर दे सकते हैं।

सर्दी-जुकाम हो जाए तो

सर्दी-जुकाम हो तो बच्चे को स्टीम दें। 5 मिनट के लिए दिन में 2-3 बार दें। स्टीम देने के लिए स्टीमर का इस्तेमाल करें। बच्चे को अपनी गोद में बिठाकर स्टीम देना बेहतर है। अगर बच्चा सो रहा है तो उसके पास में स्टीमर रख सकते हैं। बच्चे को अकेला न छोड़े, वरना उसके जलने का खतरा होगा। बाथरूम बंद करके उसमें बच्चे को गोद में लेकर भी बैठ सकते हैं। इसके अलावा बच्चे को पानी और तरल चीजें देना जारी रखें, लेकिन ये थोड़े गुनगुने होने चाहिए, फिर चाहे दूध हो या पानी।

 

बच्चों की देखभाल करना बहुत मुश्किल काम है क्योंकि उन्हें कब ठंड लग जाती है इसका पता नहीं लग पाता है। ऐसे में उनकी देखभाल के ये टिप्स आपके काफी काम आएंगे।


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