बर्थ कंट्रॉल विड्रोल के बाद इस प्रकार प्राकृतिक तरीके से बनें फर्टाइल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 11, 2016
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Quick Bites

  • कई बार वैज्ञानिक तरीके हमारे फर्टिलिटी को बुरी तरह प्रभावित करते है।
  • बर्थ कंट्रोल हमें किस किस तरह से प्रभावित करते हैं, जानना जरूरी है।
  • अपने डायट चार्ट में ऐसे आहार शामिल करें जिससे फर्टिलिटी बढ़ायी जा सके।
  • बर्थ कंट्रोल पिल छोड़ दें फिर भी गर्भधारण करे में परेशानी आन खड़ी होती है।

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, ठीक इसी तरह बर्थ कंट्रोल भी इससे अछूता नहीं है। असल में कई बार वैज्ञानिक तरीके हमारे फर्टिलिटी को बुरी तरह प्रभावित करते है। नतीजतन बच्चों की चाह रखने वाले दम्पति निराश हो उठते हैं। लेकिन इसमें हताश होने की जरूरत नहीं है। दरअसल बर्थ कंट्रोल तरीकों को छोड़ प्राकृतिक उपायों को अपनाकर हम दोबारा अपनी फर्टिलिटी हासिल कर सकते हैं।

बर्थ कंट्रोल के तरीके 

इससे पहले कि हम फर्टिलिटी बढ़ाने के प्राकृतिक नुस्खों की ओर जाएं, यह जानना आवश्यक है कि बर्थ कंट्रोल हमें किस किस तरह से प्रभावित करते हैं। सबसे आसान और सहज तरीका है दवाईयां। सामान्यतः डाक्टर बर्थ कंट्रोल पिल्स देते हैं जिसमें एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टिन का मिश्रण होता है। कुछ दवाईयों में सिर्फ प्रोजेस्टिन पाया जाता है। लेकिन ज्यादातर महिलाएं मिश्रण युक्त बर्थ कंट्रोल पिल का इस्तेमाल करती हैं। असल में ये दवाईयां अण्डाशय से अण्डे निकलने से रोकती है। इसके अलावा ये दवाईयां सर्वाइकल म्यूकस को मोटा कर देती है जिससे कि वीर्य गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाता। नतीजतन महिला गर्भवती नहीं होती। इसके अलावा भी कई तरीक हैं जिससे बर्थ कंट्रोल किया जाता है। लेकिन वे बाद के उपाय होते हैं, जिनका यहां जिक्र आवश्यक नहीं है। मगर समस्या तब पैदा होती है जब बर्थ कंट्रोल पिल छोड़ दें फिर भी गर्भ धारण करे में परेशानी आन खड़ी होती है। असल में बर्थ कंट्रोल पिल के बाद मासिक धर्म में समस्या होने लगती है जिसके चलते गर्भ धारण नहीं हो पाता।

गर्भधारण के प्राकृतिक तरीके

  • फर्टिलिटी डायट - बर्थ कंट्रोल के तमाम उपायों को छोड़ने के बाद लक्ष्य होता है गर्भ धारण करना। ऐसे में न सिर्फ जीवनशैली में तब्दीलियां करनी होती वरन खानपान में भी बदलाव आवश्यक हो जाता है। अपने डायट चार्ट में ऐसे आहार शामिल करें जिससे फर्टिलिटी बढ़ायी जा सके। अतः ऐसे आहार लेने होते हैं जो हारमोन में तब्दीलियां करें जो कि वास्तव में गर्भ धारण के लिए आवश्यक हैं। अपने आहार में फोलिक एसिड, रिबोफ्लेविन (विटामिन बी2), विटामिन बी6, विटामिन बी12, विटामिन सी, विटामिन ई और ज़िंक आदि शामिल करें।
  • हर्बल मदद लें - यदि खानपान में तब्दीलियों के बावजूद आपको गर्भ धारण में समस्या आ रही है तो हर्बल मदद लेने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। इसकी मद से आपकी मासिक धर्म नियमित हो सकते हैं। साथ ही आवश्यक हारमोन सम्बंधी बदलाव भी हो सकते हैं। यही नहीं दवाईयां लेने के चलते जो महिलाओं में मौजूद अण्डे कमजोर हो जाते हैं, हर्बल मदद से वे वापिस अपनी क्षमता हासिल कर लेते हैं।  उनका स्वास्थ्य बेहतर होता है और गर्भ धारण करने में सहजता है।
  • ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस - यह एक प्रकार की जड़ी बूटी है जो 67 फीसदी महिलाओं में कारगर है। जो महिलाएं ओव्यूलेट नहीं हो पातीं, वे इसक जड़ी बूटी का इस्तेमाल कर आसानी से गर्भ धारण करने की क्षमता हासिल कर सकती है। सैकड़ों वर्षों से पारंपरिक रूप से ट्रिबुलस का उपयोग किया जा रहा है। यह न सिर्फ महिलाओं के लिए लाभकर है वरन पुरुषों के लिए भी इसकी महत्ता कम नहीं है।
  • वाइटेक्स - यह भी एक किस्म की जड़ी बूटी है जो कि महिलाओं में स्त्रीबीजजनन को नियमित करने के लिए लाभकारी है। यह प्रत्येक महिला पर उसकी उपयोगिता अनुसार कारगर है। यही नहीं मासिक धर्म से सम्बंधित तमाम किस्म की समस्याओं के लिए वाइटेक्स बेहद उपयोगी जड़ी बूटी है अतः महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए इसके असर को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
  • उदर मांसपेशी की मसाज - फर्टिलिटी बढ़ाने हेतु उदर मांसपेशी यानी एब्डोमिनल मसाज भी कारगर तरीका है। इससे शरीर को हील किया जाता है। असल में यह मसाज रिप्रोडक्शन सिस्टम के लिए किया जाता है जो उसकी सेहत पर सीधे सीधे असर करता है। यही नहीं स्त्रीबीजजनन को नियंत्रित करता है साथ ही एंडोक्राइन सिस्टम से भी बेहतर तालमेल बैठाता है। उदर मांसपेशी मसाज से गर्भाशय और ओवरीज में रक्त संचार बेहतर होता है जिससे शरीर से टोक्सिन बाहर हो जाते हैं। कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए एब्डोमिनल मसाज बेहतरीन प्राकृतिक उपाय है।

 

Image Source-Getty

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