जानें किस तरह ये बच्‍ची कोख में नहीं बल्कि पेट में पली

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 04, 2016
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Quick Bites

  • बच्‍चे का विकास पेट की बजाय गर्भ में होता है।
  • जबकि एक महिला ने बच्‍चे को पेट में ही पाला।
  • आंत की झिल्ली से मिलती रही ब्‍लड की सप्‍लाई।
  • इस तरह के मामलों में संक्रमण का खतरा रहता है।

लखनऊ में एक बेहद ही रोचक मामला सामने आया है। लखनऊ स्थित केजीएमयू में पेट दर्द की शिकायत लेकर जब ये महिला अस्पताल पहुंची तो अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। इस महिला की कोख की बजाय पेट में बच्चा पल रहा था। वो महिला खुद इस बात ये अनजान थी कि वह गर्भ से है। सबसे हैरानी वाली बात है कि बीते नौ महीनों में मां को किसी भी तरह की समस्य़ा नहीं हुई। ऐसा 10 हजार मामलों में से एकाध होता है। इस लेख को पढ़ें और जानें क्‍या है पूरी सच्‍चाई।

 

जब पेट में पला बच्‍चा

बच्चा कोख में होता है तो गर्भनाल की मदद से पोषक तत्व और ब्लड बच्चे को सप्लाई होता है। पर, यह मामला इसलिए भी अनोखा था कि बच्ची को मां की आंत की झिल्ली से ब्लड और पोषक तत्वों की सप्लाई मिल रही थी। यानी बच्‍चे के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्‍वों की कमी भी नहीं हुई।

नहीं हुआ संक्रमण

बच्ची को ब्लड की सप्लाई आंत की झिल्ली से होने के बावजूद मां और बच्ची को कोई संक्रमण न होना भी अनोखा है। अगर आंत की झिल्ली के रक्त प्रवाह में थोड़ा भी दिक्कत होती तो दोनों की जान मुश्किल में पड़ जाती। अमूमन इस तरह के मामलों में संक्रमण का खतरा रहता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। कोख में छेद होने पर बच्चा पेट में बड़ा होने लगता है। एबॉर्शन की वजह से कोख में समस्या हो सकती है जिससे ऐसे मामले हो सकते हैं।

 

अल्‍ट्रासाउंड रिपोर्ट में हुआ खुलासा

कोख के बजाय पेट में बच्चे के पलने वह भी पूरे नौ महीने, शायद ही आपने सुना हो। पेट दर्द की शिकायत पर बंथरा से पहुंची महिला केजीएमयू पहुंची तो अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गईं। चिकित्‍सकों की टीम ने फौरन ऑपरेशन का फैसला किया। दो घंटे चले ऑपरेशन के बाद बच्ची को पेट से निकाला गया। 26 जनवरी को पेट काटकर (नेप्रोटमी) के तहत पानी की थैली में मौजूद बच्ची को सकुशल बाहर निकाला गया। जच्चा और बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। बच्ची का वजन करीब ढाई किलो है।

गर्भावस्था के दौरान नियमित अल्ट्रासाउंड जांच जरूरी है।अल्ट्रासाउंड जांच पहले से हो रही होती तो ये स्थिति पहले ही पता चल जाती। इसलिए गर्भावस्‍था की पुष्टि के बाद नियमित रूप से चिकित्‍सक से संपर्क में रहें और जरूरी जांच भी करायें।

 

Image Source-Getty

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