क्या करें जब बच्चा मेहमानों के सामने कर दें बदतमीजी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 07, 2017
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Quick Bites

  • तुरंत प्रतिक्रिया करने से बचें।
  • बच्चों के साथ धैर्य से काम लें।
  • बच्चों की हर बात की तह तक जाएं।

बच्चे खासकर टीनएजर का स्वभाव बिल्कुल अलग होता है। वे कब, कहां, किससे कैसी बातें कर दें, उन्हें खुद भी इस बात का अभास नहीं होता। कई बार वे किस बात पर गुस्सा कर जाते हैं, इस बात से भी वे अंजान होते हैं। यही वजह है कि पैरेंट्स भी टीनएजर के स्वभाव से परेशान रहते हैं। ये परेशानी तब और बढ़ जाती है जब उनके टीनएज दूसरों के सामने उनकी इंसल्ट कर बैठते हैं। यह स्थिति काफी हद तक अपमान करने वाली होती है। लेकिन ऐसी स्थिति में मां-बाप को बहुत ज्यादा सूझबूझ से काम लेना होता है। मगर कैसे, यह जानने के लेख को आगे पढ़ें।

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तुरंत प्रतिक्रिया न करें

अगर आपके बच्चे ने एकाएक दूसरों के सामने ऐसी बात कह दी, जो उसे नहीं कहनी चाहिए थी यानी उसने दूसरों के सामने आपका अपमान किया है तो तुरंत प्रतिक्रिया करने से बचें। हो सकता है कि बच्चे के बिहेवियर से आप असहज महसूस करें। लेकिन नार्मल रहने की कोशिश करें। जब आप उसकी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करेंगे यानी उसे नहीं डांटेंगे तभी वे समझेंगे कि मम्मी-पापा उन्हें हर बात में नहीं डांटते। इससे उनके गुस्सैल प्रवृत्ति में कुछ कमी आने की संभावना बढ़ जाएगी।

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धैर्य रखें

अक्सर माता-पिता बच्चों द्वारा अपमानित होने पर उनके साथ मारपीट करने लगते हैं या फिर जोरदार फटकार लगाते हैं ताकि बच्चे को अहसास हो कि उन्होंने कुछ गलत किया है। लेकिन ऐसा करने से बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की बजाय नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दरअसल माता-पिता को ऐसी स्थिति में धैर्य से काम लेना चाहिए। आखिर उनके बच्चे ने दूसरों के सामने उनका अपमान क्यों किया, इस बात को धैर्य से समझने की कोशिश करनी चाहिए। ध्यान रखें कि आपा खो देने समस्या का समाधान नहीं होगा।

बात की तह तक जाएं

अगर बच्चा बार-बार आपका अपमान दूसरों के सामने करे तो समझने की कोशिश करें कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। इस बात की तह तक जाने की कोशिश करें कि कौन सी ऐसी बात है तो उसे परेशान कर रही है। असल में बच्चों को जब कोई बात परेशान करती है या फिर जब माता-पिता बार-बार उन्हें इग्नोर करते हैं तभी बच्चे इस तरह का व्यवहार करते हैं। पैरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों के व्यवहार को समझें और उनकी हर प्रवृत्ति का अपने और उसके नजरिए से विश्लेषण करें।

स्वयं उदाहरण बनें

बच्चे ज्यादातर चीजें अपने माता-पिता से ही सीखते हैं। नोटिस करें कि कहीं आप अक्सर अपने बच्चों को दूसरों के सामने तो नहीं डांटती या फिर बात-बात पर टोकाटाकी करती हैं। अगर आप ऐसा करती हैं, तो बच्चों के साथ अब ऐसा न करें। क्योंकि आपका यही व्यवहार उन्हें नकारात्मक बना रहा है। आप खुद उनके सामने उदारहण बनें। दूसरों के सामने कभी भी न उन्हें डांटें और न ही आप अपने पार्टनर के साथ ही झगड़ा करें।

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