मस्तिष्‍क के दौरे से कैसे करें बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 21, 2015
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • तनाव और अवसाद से पड़ता है दिमागी दौरा
  • इससे प्रभावित होती है मस्तिष्क की कोशिकाएं
  • शरीर के एक भाग में लकवा भी लग सकता है
  • न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना लाभदायक।

बीते कुछ सालों के दौरान हमारी जीवनशैली में आए बदलाव का सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्‍य पर भी पड़ा है। कम उम्र में तनाव और अवसाद की बीमारियों ने हमारे जीवन में गहरी पैठ बना ली है। अधिक तनाव और अवसाद के गंभीर परिणाम दिमागी दौरे के रूप में भी देखने को मिलते हैं। इसके चलते अपने हर छोटे-बड़े काम के लिए उसकी निर्भरता किसी दूसरे व्यक्ति पर हो जाती है। अनके मरीजों में बोलने, समझने, लिखने, पढ़ने व स्मृति की क्षमताएं घट जाती हैं।


दिमागी दौरा क्या है

हमारे मस्तिष्क को ठीक से काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की दरकार होती है। यदि मस्तिष्क की कोशिकाओं को उचित मात्रा में निरंतर ऑक्सीजन या अन्य पोषक तत्व न मिलें तो इसकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। इसका परिणाम दिमागी दौरे के रूप में सामने आता है। दिमाग के किसी खास हिस्से को रक्त देने वाली कोशिकाओं में अचानक किसी थक्के के जमने के कारण बाधा उत्पन्न होती है। दिमागी दौरे के बाद एक मिनट के अंदर मस्तिष्क की प्रभावित कोशिकाएं मरने लगती है। मरीज में हिलने तक की ताकत नहीं रहती। मरीज स्वयं की देखभाल करने तक में असमर्थ हो जाता है।



दिमागी दौरे के लक्षण

चेहरे या हाथ-पैरों में एकाएक झुनझुनाहट या कमजोरी आना। शरीर के एक तरफ के भाग में लकवा भी लग सकता है। बोलने या समझने में अचानक रुकावट। एक या दोनों आंखों से दिखाई देने में परेशानी। चलने में परेशानी, चक्कर आना। शरीर को संतुलित करने में परेशानी। गंभीर मरीजों में बेहोशी। किसी कारण के बिना सिर में एकाएक बहुत तेज दर्द होना। अगर किसी व्यक्ति को इनमें से कोई भी लक्षण है या होते है, तो उसे तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। ऐसे में समय बहुत कीमती होता है और जरा सी लापरवाही की कीमत कई बार जान देकर भी चुकानी पड़ सकती है।



दिमागी दौरे के कारण


यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन ऐसे लोगों में ज्यादा होती है, जिन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, डायबिटीज, धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने की आदत होती है। व्यायाम न करने वालों में, मोटे लोगो में, खाने में घी, तली हुई चीजें और चर्बीयुक्त पदार्थ ज्यादा खाने वाले और अत्यघिक शराब पीने वालों में भी यह समस्या होती है। तनाव व आनुवंशिकता इसमें बहुत बड़ा कारण है। तनाव स्तर में काफी वृद्धि हुई है और तनाव एक बीमारी की तरह उभरकर सामने आने लगा है।

 

दिमागी दौरे से बचाव


गतिहीनता को दूर करने में मांसपेशियों के खिंचाव को कम किया जाता है। नियमित व्यायाम भी काफी लाभ पहुंचाता है। लेकिन, पूरी तरह सुधार होने में यह उपाय अपर्याप्त होते हैं। इसलिए डाक्टर मरीज की हालत और गतिहीनता को देखते हुए ही दवाइयां देते हैं। खानपान में कुछ परिवर्तन करके भी इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। आहार में हरी सब्जियां और फलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अत्यधिक वसा व चिकनाईयुक्त खाद्य-पदार्थो और जंक फूड्स से परहेज करना चाहिए। नमक व चीनी का कम प्रयोग भी मदद करता है। वजन नियंत्रित करने के लिए सुबह टहलना चाहिए।


डॉक्टर की सलाह पर हल्के-फुल्के व्यायाम भी करने चाहिए। जो लोग हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज से ग्रस्त है, उन्हे इसे नियंत्रण में रखना चाहिए।

ImageCourtesy@gettyimages

Read more article on Mental Health in hindi

Write a Review
Is it Helpful Article?YES18 Votes 16956 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर