मछलियों का सेवन आपको कितना करना चाहिए? जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 21, 2016
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Quick Bites

  • मछली में शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स होते हैं।
  • इसमें मर्करी भी होता है जो कि खतरनाक है।
  • मर्करी की अधिकता से न्यूरोलॉजिकल बीमारियां होती हैं।

मछली का सेवन सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो आंखों और बालों के लिए बहुत जरूरी है। आंखों की रोशनी बढ़ानी हो, बालों को घना और खूबसूरत बनाता हो तो लोग मछली खाने की सलाह देते हैं। इसमें प्रोटीन के साथ दूसरे जरूरी मिनरल्स भी होते हैं जो खतरनाक और सामान्य बीमारियों से बचाव करते हैं।


लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि मछली का सेवन कितना करना चाहिए, क्योंकि हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने मछली के अधिक सेवन को नुकसानदेह माना है साथ ही इसकी अधिकता से मौत भी हो सकती है। इस लेख में जानते हैं कि मछली का सेवन कितनी मात्रा में करना सही माना जाता है।

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एक रिपोर्ट के अनुसार

‘नेचर’ नामक पत्रिका में छपे एक रिपोर्ट की मानें तो मछली में मर्करी यानी पारा मौजूद होता है। शरीर में मर्करी का स्तर अधिक हो जाये तो नयूरोलॉजिकल बीमारियां होने लगती हैं और इसके कारण मौत भी हो सकती है।

फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी समुद्र में जाने के कारण मछली में मर्करी की मात्रा बढ़ रही है, जिसके कारण मछली का अधिक सेवन खतरनाक होता जा रहा है। इसके कारण कमजोरी और आंखों की रोशनी भी कम होने लगती है।


मछली में कैसे पहुंचा मर्करी

19वीं और 20वीं सदी को औद्योगिक क्रांति के रूप में देखा जाता है, इसके कारण विज्ञान का अधिक विकास हुआ और फैक्ट्रियों में अधिक से अधिक चीजों का निर्माण होने लगा। फैक्ट्रियों में प्रयोग किये जाने वाले मेथिलमर्करी (यह मर्करी का सबसे खतरनाक प्रकार है) सीधे दूसरी गंदगियों के साथ पानी के रास्ते समुद्र में डाला जाने लगा।

इसकी भयावहता तब दिखी जब 1950-60 के दशक में जापान में ‘मिनामाता बीमारी’ (यह एक न्यूरालोजॉकल सिंड्रोम है जो मर्करी के कारण होता है) के कारण 2000 से अधिक लोगों की जान चली गई। इस प्रकोप के बाद दुनिया को मछली के जरिये इंसान में फैलने वाली बीमारी की भयावहता का पता चला। यह समस्या केवल जापान के आसपास के समुद्री किनारों की नहीं थी, बल्कि यह यूरोप और अमेरिका के देशो में भी दिखी।

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गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक

अगर आप मां बनना चाहती हैं और मछली की शौकीन हैं तो संभल जायें, क्योंकि यह न केवल आपके लिए बल्कि आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अधिक वसायुक्त मछली खाने से गर्भवती महिलाओं की कोख में पल रहे बच्चे का जन्म समय से पहले होने का जोखिम बढ़ जाता है। मैकरेल, सालमोन, शॉर्क और सार्डिन्स जैसी छोटी समुद्री मछलियां अधिक नुकसानदेह हैं। लेकिन आप सप्ताह में दो बार मछली का सेवन कर सकती हैं।


मधुमेह का खतरा

मछली के अधिक सेवन से डायबिटीज का भी खतरा अधिक रहता है। मछली में पाया जाने वाला विषाक्त पदार्थ डायबिटीज के खतरे को बढाता है। छोटी मछलियों में पाया जाने वाला डीडीई (Dichloro Diphenyldichloro Ethylene) केमिकल इसके लिए जिम्मेदार होता है। बड़ी मछलियां जब छोटी मछलियों को खाती हैं तब उनके अंदर यह केमिकल प्रवेश करता है।


मछली का कितना सेवन सही है

अगर आपने यह सुना है कि समुद्र के किनारे रहने वाले लोग मछली का सेवन करते हैं तो आप गलत हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण मछली का अधिक सेवन घातक हो गया है। लेकिन अगर सप्ताह में दो या तीन दिन मछली का सेवन किया जाये तो बुरा नहीं है। अमेरिका स्थित इंवायरमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (ईपीए) की मानें तो एक सामान्य वयस्क एक दिन में 8 माइक्रोग्राम मछली का सेवन कर सकता है। एक सामान्य वजन वाली सालमन मछली में जिसका वजन 13 आउंस हो, उसका सेवन आप कर सकते हैं।

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Image Source : Getty

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