यूं पाएं खर्राटों से मुक्ति

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 12, 2015
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Quick Bites

  • गहरी नींद का संकेत होते है खर्राटे
  • मोटापा हो सकता है इसका कारण
  • हो सकता है पालीसाइटमियो रोग  
  • नॉजल ड्रॉप्स मिलता है आराम

खर्राटे भले ही आपकी गहरी नींद का संकेत हों, लेकिन आपके साथ रहने वाले शख्‍स को इनसे काफी परेशानी हो सकती है। इसके साथ ही खर्राटे कई बीमारियों का इशारा भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप इनसे निजात पाने की कोशिश करें।जर्मन ऑटोलैरिंगोलॉजिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक यदि सोते समय शरीर के ऊपरी हिस्से को हल्की सी ऊंची स्थिति में रखा जाए तो खर्राटों पर काबू पाया जा सकता है। एसोसिएशन के अनुसार वजन कम करने से भी इसमें मदद मिल सकती है।

 

Snort

क्या होेते हैं खर्राटे

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक यदि ये उपाय खर्राटे रोकने में कारगर नहीं होते हैं तो आप निद्रा श्वासरोध बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस बीमारी में सांस लेने के दौरान बीच-बीच में श्वास लेने की क्रिया खतरनाक रूप से रुक जाती है। इस बीमारी से पीडित लोगों को चिकित्सक कंटीन्युअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) उपकरण के उपयोग की सलाह देते हैं। इस उपकरण में एक विशेष प्रकार का मास्क होता है। कभी-कभी तालु के कोमल ऊतक को कठोर बनाने के लिए एक छोटी सी शल्य चिकित्सा की जाती है। जर्मनी के ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि इस चिकित्सा से मरीज अच्छी नींद ले पाते हैं और दिनभर थकान महसूस नहीं करते हैं।

कारण

खर्राटों का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे जीभ का बड़ा होना, पुरानी सर्दी, नाक में मस्से होना या नाक का पर्दा सीधा न होना आदि कारणों से सांस में रुकावट पैदा हो जाती है। अधिक मोटापे के कारण भी खर्राटों की शिकायत हो सकती है। खर्राटे अधिक आने पर पालीसाइटमियो नामक रोग भी हो सकता है। इस रोग में रक्त कणों की संख्या बढ़ने के कारण खून में गांठे पड़ सकती हैं। यदि ये गाँठें उन रक्त वाहिनियों में पहुंच जाएं जो हृदय में रक्त ले जाती हैं तो व्यक्ति को हार्ट अटैक तथा ब्रेन हेमरेज जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

 

Snort

 

इलाज

आपको इसकी समस्‍या से जल्‍द निजात पाने के लिए डॉक्‍टर की सलाह के साथ अपने वजन को कट्रोल में रखना होगा। कुछ मरीजों को करवट लेकर सोने से खर्राटे नहीं आते जबकि कुछ को नॉजल ड्रॉप्स डालने से आराम मिलता है। कुछ मरीजों को मशीन लगाने से भी आराम मिलता है। परेशानी बढ़ने पर गले का ऑपरेशन भी किया जाता है। यदि समस्या बहुत ज्यादा ही गंभीर हो तो गले में ट्रेकिया में छेद कर पीड़ित व्यक्ति को राहत दी जाती है।

ImageCourtesy@gettyimages

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