जंगल की आग सेहत पर डालती है क्या असर, जानिए

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 03, 2016
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Quick Bites

  • जंगलों में आग लगने की घटना में हुई है 30% की वृद्धि।
  • जंगल में लगी आग से एक लाख लोगों की जानें गईं।
  • वहीं इस आग के धुएं से पांच लाख लोग बीमार हुए।
  • इस जंगल की आग से बारिश चक्र पूरी तरह गड़बड़ा जाता है।

जंगल में लगी आग से जान-माल की हानि हमेशा से सुर्खियों में छाई रहती है। फिर भी इस पर किसी भी तरह की रोक लगाने में सरकार असमर्थ है। भारत में 2016 में जंगलों में लगने वाली आग में 30% की वृद्धि हुई है। जंगल में लगी आग केवल जगंल की आग नहीं होती बल्कि ये स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों को जन्म देने का एक जरिया होती है।

 

इंडोनेशिया में पांच लाख लोग हुए बीमार

जंगल में लगती आग की विभिषिका इतनी बढ़ गई है कि इंडोनेशिया में लगी आग से एक लाख लोगों के मरने की खबर आई थी। इंडोनेशिया में ये आग पिछले साल लगी थी जिसकी रिपोर्ट अब आई है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 2015 और 2016 में अकेले इंडोनिशिया में पिछले साल गैर कानूनी तरीके से जंगल काटने और उसे आग लगाने से एक लाख लोगों की जानें चली गई थीं और पांच लाख लोग बीमारी के शिकार हुए थे।

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यह रिपोर्ट अमेरिका के हॉवर्ड और कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई है। खैर इस रिपोर्ट को इंडोनेशिया ने महत्वहीन बताया है। इस रिपोर्ट के अनुसार जंगल में लगी आग से निकले जहरीले धुंए से 2015 और 2016 में अकेले इंडोनेशिया में 91,600 लोगों की मौत हुई, जबकि मलेशिया में 6,500 और सिंगापुर में 2,200 लोग मारे गए।


वहीं इंडोनेशिया के सरकारी आंकड़ें इस रिपोर्ट से बिल्कुल अलग तस्वीर बयां करते हैं। इंडोनेशिया के सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2015 में जंगल की आग और धुंए से सिर्फ 24 मौतें हुई थीं। हां, लेकिन आंकड़ों में इस आग के धुएं से पांच लाख से ज्यादा इंडोनेशियाई लोगों के सांस की बीमारियों की चपेट में आने की पुष्टि जरूर की गई है।

जंगल की आग से होती है स्वास्थ्य समस्याएं

मतलब अगर जंगल की आग से होने वाली मौतों को सही ना भी माना जाए तब भी ये जरूर कहा जा सकता है कि जंगल की आग के धुएं से लोग बीमार जरूर पड़ते हैं। यानी कि जंगल में लगी आग के धुंए से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। इसके अलावा इस धुंए से काफी आर्थिक नुकसान भी होता है। जंगल की आग से होने वाले कुछ प्रमुख नुकसान निम्नलिखित हैं।

 

  1. सांस से जुड़ी समस्या होना।
  2. जमीन की उत्पादकता में गिरावट आना।
  3. वनों की सालाना वृद्धि दर में कमी होती है, जिससे वर्षा का घनत्व कम हो जाता है और पृथ्वी पर पानी की कमी होने लगती है।
  4. जंगल की भूमि में नमी की कमी हो जाती है जिससे भूमि बंजर होने लगती है।
  5. बर्फ और ग्लेशियर का पिघलना।


कइयों को लील चुकी है उत्तराखंड में लगी आग

भारत में भी आग की समस्या कई बार काफी नुकसान पहुंचा चुकी है। उत्तराखंड में लगी आग से कइयों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार इस साल गर्मी में उत्तराखंड और हिमाचल में लगी आग से हिमालय के ग्लेशियर्स के पिघलने का खतरा बढ़ गया है। 

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दो घंटे में फैल जाता है एक साल का प्रदुषण

जंगल में लगी आग से सबसे अधिक खतरा पदुषण में बढ़ोतरी का होता है। विशेषज्ञों के अनुसार एक साल में चार से पांच शहरों में प्रदूषण के कारण पर्यावरण जितना दूषित होता है उतना नुकसान पर्यावरण को जंगल की आग से केवल दो घंटे में हो जाता है।


दो साल में जंगलों में आग लगने की लगभग 35 हजार घटनाएं

भारत में पिछले दो सालों में ये देश के विभिन्न जंगलों में आग लगने की 35 हजार घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसकी जानकारी राज्यसभा में लिखित जवाब में केन्द्रीय पर्यावरण एवं जल वायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावेडकर ने दी थी। उनके दिए गए जवाब के अनुसार पिछले दो वर्ष में भारतीय वन सर्वे ने जंगलों में आग लगने की 34, 991 घटनाओं की जानकारी दी है।

 

हालात हो गए हैं खतरनाक और चिंताजनक

पर्यावरणविद पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी ने आग लगने से नष्ट हो चुके जंगलों का दौरा करने के बाद उनकी हालत को खतरनाक और चिंताजनक बताया। इस साल लगी आग पर जोशी कहते हैं कि यह घटनाएं गर्मियों में हर साल होती रही हैं, लेकिन स्थिति कभी इतनी भयावह नहीं हुई। इसके पीछे कई कारण हैं जिनमें से पर्यावरण प्रदूषित होने से बारिश चक्र का पूरी तरह से गड़बड़ाना प्रमुख तौर पर जिम्मेदार है।

 

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