कैसे करें दांतों की देखभाल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 26, 2012
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Quick Bites

  • दांतों की सही देखभाल करने का तरीका जानना जरूरी है। 
  • दांत घिस जाते हैं और बहुत ज्‍यादा संवेदनशील हो जाते हैं। 
  • मसूड़ों और दांतों दोनों की सही प्रकार सफाई करनी चाहिए। 
  • फिलिंग करवाये बिना भी दांतों में ठंडा-गरम लग सकता है। 

कहते हैं दांत जैसी दूसरी कोई चक्‍की नहीं होती। ये न केवल आपको खूबसूरत बनाते हैं बल्कि इनके बिना आपकी जिंदगी भी बहुत मुश्किल हो जाती है। इतना सब जानते हुए भी हममें से अधिकतर लोग अपने दांतों के प्रति सजग नहीं होते। और आखिर में उन्‍हें कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। जानिये कैसे आप अपने दांतों की सही देखभाल कर सकते हैं। 

 

हम सभी को दांतों से जुड़ी कोई न कोई समस्‍या होती ही रहती है। लेकिन, कम लोग ही छोटी-मोटी समस्‍या के लिए दंत विशेषज्ञ के पास जाते हैं। इस अनदेखी के कारण ही कई बार छोटी-छोटी बीमारियां भी गंभीर हो जाती हैं। अगर आप दांतों की सही देखभाल करें और हर छह महीने में अपने दांतों का नियमित चेकअप करवायें तो समस्‍याओं को समय रहते रोका जा सकता है। 

 

दांतों में ठंडा-गरम लगना, कैविटी (कीड़ा लगना), पायरिया, मुंह से बदबू आना और दांतों का बदरंग होना जैसी बीमारियां सबसे सामान्‍य देखी जाती हैं। अधिकतर लोग इनमें से किसी न किसी परेशानी से दो-चार होते रहते हैं। आइये जानते हैं कि इन परेशानियों के कारण क्‍या हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है।  

 

 

क्‍यों लगता है ठंडा गरम 

दांत टूटने, नींद में किटकिटाने, दांतों के घिसने के बाद, मसूड़ों की जड़ें नजर और कैविटी के कारण दांतों में ठंडा-गरम लगने लगता है। इसके साथ ही ब्रश करते समय दांतों पर ज्‍यादा जोर डालने से भी दांत घिस जाते हैं और बहुत ज्‍यादा संवेदनशील हो जाते हैं। 

 

कैसे बचें 

ब्रश करते समय दांतों पर ज्‍यादा दबाव न डालें। और साथ ही दांतों को पीसने से बचें। 

 

क्‍या है इलाज 

इस समय का इलाज इस बात पर तय होता है कि आखिर आपको दांतों में ठंडा गरम लगने के पीछे कारण क्‍या है। फिर भी डॉक्‍टर खास टूथपेस्‍ट इस्‍तेमाल करने की सलाह देते हैं। आप डॉक्‍टरी सलाह के बिना भी बाजार में मिलने वाले सें‍सेटिव टूथपेस्‍ट इस्‍तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, अगर दो से तीन महीने पेस्‍ट करने के बाद भी आपको आराम न मिले तो आपको डॉक्‍टर को दिखाना चाहिये। 

 

दांत में कीड़ा लगना 

 

क्‍यों होती है समस्‍या 

कई बार दांतों की सही प्रकार से देखभाल नहीं करने पर दांतों में सुराख हो जाता है और इस वजह से यह समस्‍या होती है। इसके साथ ही मुंह में बनने वाला एसिड भी इसके लिए जिम्‍मेदार होता है। हमारे मुंह में बैक्‍टीरिया जरूर होते हैं। और जब खाने के बाद जब हम कुल्‍ला नहीं करते तो ये बैक्‍टीरिया मुंह में ही रह जाते हैं। इन परिस्थितियों में भोजन के कुछ ही देर बाद यह बैक्‍टीरिया मीठे या स्‍टार्च वाली चीजों को स्‍टार्च में बदल देते हैं। बैक्टीरिया युक्‍त यह एसिड और मुंह की लार मिलकर एक चिपचिपा पदार्थ (प्लाक) बनाते हैं। यह चिपचिपा पदार्थ दांतों के साथ चिपककर दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाने लगता है। प्लाक का बैक्टीरिया जब दांतों में सुराख यानी कैविटी कर देता है तो इसे ही कीड़ा लगना अर्थात कैरीज कहते हैं। 

 

कैसे बचें 

इस समस्‍या से बचने के लिए जरूरी है कि आप रात को जरूर ब्रश करके सोयें। इसके साथ मीठी या स्‍टार्च वाली चीजें कम खायें। इन चीजों के सेवन से आपके दांतों पर बुरा असर पड़ता है। खाने के बाद ब्रश या कुल्‍ला जरूर करें। अपने दांतों की साफ-सफाई का पूरा ध्‍यान रखें। 

 

कैसे करें पहचान 

क्‍या आपकें दांत अब चमचमाते नहीं हैं। क्‍या आपको दांतों पर भूरे और काले धब्‍बे नजर आने लगे हैं। भोजन आपके दांतों में फंसने लगा है। ठंडा - गरम लगता है, तो यह सब कैविटी के लक्षण हैं। आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिये। अगर आप जल्‍द ही इस समस्‍या की ओर ध्‍यान देंगे तो कैविटी को रोका जा सकता है। 

 

जल्‍द पायें राहत 

दांतों में दर्द होने पर सामान्‍य दर्द निवारक दवाओं का सेवन किया जा सकता है। आप पैरासिटामोल , एस्प्रिन , इबो - प्रोफिन आदि का सेवन कर सकते हैं। कुदरती इलाज के तौर पर दांतों में लौंग या उसका तेल भी लगाया जा सकता है। इससे मसूड़ों का दर्द कम हो जाता है। हां, दर्द दूर होने के बाद इसे भूल न जाएं। आपको डॉक्‍टर के पास जाकर फिलिंग जरूर करवानी चाहिये। 

 

दांतों की देखभाल

 

फिलिंग है जरूरी 

फिलिंग करवाये बिना दांतों में ठंडा-गरम और खट्टा मीठा लगता रहता है। इसके बाद आपको दांतों में दर्द भी हो सकता है। समस्‍या अधिक हो जाए तो पस भी बन सकती है। और आगे चलकर आपको रूट कनाल करवाना पड़ सकता है। इसलिए फिलिंग करवाने में देरी न करें। 

 

सांस में बदबू 

मसूड़ों और दांतों की अगर सही प्रकार सफाई न की जाए, तो उनमें सड़न और बीमारी के कारण सांसों में बदबू हो सकती है। कई बार खराब पेट या मुंह की लार का गाढ़ा होना भी इसकी वजह होती है। प्याज और लहसुन आदि खाने से भी मुंह से बदबू आने लगती है। 

 

इलाज : लौंग , इलायची चबाने से इससे छुटकारा मिल जाता है। थोड़ी देर तक शुगर - फ्री च्यूइंगगम चबाने से मुंह की बदबू के अलावा दांतों में फंसा कचरा निकल जाता है और मसाज भी हो जाती है। इसके लिए बाजार में माउथवॉश भी मिलते हैं। 

 

पायरिया 

मुंह से बदबू आने लगे , मसूड़ों में सूजन और खून निकलने लगे और चबाते हुए दर्द होने लगे तो पायरिया हो सकता है। पायरिया होने पर दांत के पीछे सफेद - पीले रंग की परत बन जाती है। कई बार हड्डी गल जाती है और दांत हिलने लगता है।पायरिया की मूल वजह दांतों की ढंग से सफाई न करना है। 

 

इलाज : पायरिया का सर्जिकल और नॉन सर्जिकल दोनों तरह से इलाज होता है। शुरू में इलाज कराने से सर्जरी की नौबत नहीं आती। क्लीनिंग , डीप क्लीनिंग ( मसूड़ों के नीचे ) और फ्लैप सर्जरी से पायरिया का ट्रीटमंट होता है। 

 

दांत निकालना कब जरूरी 

दांत अगर पूरा खोखला हो गया हो , भयंकर इन्फेक्शन हो गया हो , मसूड़ों की बीमारी से दांत हिल गए हों या बीमारी दांतों की जड़ तक पहुंच गई हो तो दांत निकालना जरूरी हो जाता है। 

 

ब्रश करने का सही तरीका 

यों तो हर बार खाने के बाद ब्रश करना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। ऐसे में दिन में कम - से - कम दो बार ब्रश जरूर करें और हर बार खाने के बाद कुल्ला करें। दांतों को तीन - चार मिनट ब्रश करना चाहिए। कई लोग दांतों को बर्तन की तरह मांजते हैं , जोकि गलत है। इससे दांत घिस जाते हैं। आमतौर पर लोग जिस तरह दांत साफ करते हैं , उससे 60-70 फीसदी ही सफाई हो पाती है। दांतों को हमेशा सॉफ्ट ब्रश से हल्के दबाव से धीरे - धीरे साफ करें। मुंह में एक तरफ से ब्रशिंग शुरू कर दूसरी तरफ जाएं। बारी - बारी से हर दांत को साफ करें। ऊपर के दांतों को नीचे की ओर और नीचे के दांतों को ऊपर की ओर ब्रश करें। दांतों के बीच में फंसे कणों को फ्लॉस ( प्लास्टिक का धागा ) से निकालें। इसमें 7-8 मिनट लगते हैं और यह अपने देश में ज्यादा कॉमन नहीं है। दांतों और मसूड़ों के जोड़ों की सफाई भी ढंग से करें। उंगली या ब्रश से धीरे - धीरे मसूड़ों की मालिश करने से वे मजबूत होते हैं। 

 

जीभ की सफाई जरूरी : जीभ को टंग क्लीनर और ब्रश , दोनों से साफ किया जा सकता है। टंग क्लीनर का इस्तेमाल इस तरह करें कि खून न निकले। 

 

कैसा ब्रश सही : ब्रश सॉफ्ट और आगे से पतला होना चाहिए। करीब दो - तीन महीने में या फिर जब ब्रसल्स फैल जाएं , तो ब्रश बदल देना चाहिए। 

 

टूथपेस्ट की भूमिका 

दांतों की सफाई में टूथपेस्ट की ज्यादा भूमिका नहीं होती। यह एक मीडियम है , जो लुब्रिकेशन , फॉमिंग और फ्रेशनिंग का काम करता है। असली एक्शन ब्रश करता है। लेकिन फिर भी अगर टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें , तो उसमें फ्लॉराइड होना चाहिए। यह दांतों में कीड़ा लगने से बचाता है। पिपरमिंट वगैरह से ताजगी का अहसास होता है। टूथपेस्ट मटर के दाने जितना लेना काफी होता है। 

 

पाउडर और मंजन

टूथपाउडर और मंजन के इस्तेमाल से बचें। टूथपाउडर बेशक महीन दिखता है लेकिन काफी खुरदुरा होता है। टूथपाउडर करें तो उंगली से नहीं , बल्कि ब्रश से। मंजन इनेमल को घिस देता है। 

 

दातुनः नीम के दातुन में बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है लेकिन यह दांतों को पूरी तरह साफ नहीं कर पाता। बेहतर विकल्प ब्रश ही है। दातुन करनी ही हो तो पहले उसे अच्छी तरह चबाते रहें। जब दातुन का अगला हिस्सा नरम हो जाए तो फिर उसमें दांत धीरे - धीरे साफ करें। सख्त दातुन दांतों पर जोर - जोर से रगड़ने से दांत घिस जाते हैं। 

 

माउथवॉशः मुंह में अच्छी खुशबू का अहसास कराता है। हाइजीन के लिहाज से अच्छा है लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 

 

नींद में दांत पीसना 

वजह : गुस्सा , तनाव और आदत की वजह से कई लोग नींद में दांत पीसते हैं। इससे आगे जाकर दांत घिस जाते हैं।

 

बचाव : नाइटगार्ड यूज करना चाहिए। 

 

स्केलिंग और पॉलिशिंग 

दांतों पर जमा गंदगी को साफ करने के लिए स्केलिंग और फिर पॉलिशिंग की जाती है। यह हाथ और अल्ट्रासाउंड मशीन दोनों तरीकों से की जाती है। चाय - कॉफी , पान और तंबाकू आदि खाने से बदरंग हुए दांतों को सफेद करने के लिए ब्लीचिंग की जाती है। दांतों की सफेदी करीब डेढ़ - दो साल टिकती है और उसके बाद दोबारा ब्लीचिंग की जरूरत पड़ सकती है। 

 

चेकअप कब कराएं 

अगर कोई परेशानी नहीं है तो कैविटी के लिए अलग से चेकअप कराने की जरूरत नहीं है लेकिन हर छह महीने में एक बार दांतों की पूरी जांच करानी चाहिए। 

 

मुस्कुराते रहें 

मुस्कराहट और अच्छे व खूबसूरत दांतों के बीच दोतरफा संबंध है। सुंदर दांतों से जहां मुस्कराहट अच्छी होती है , वहीं मुस्कराहट से दांत अच्छे बनते हैं। तनाव दांत पीसने की वजह बनता है , जिससे दांत बिगड़ जाते हैं। तनाव से एसिड भी बनता है , जो दांतों को नुकसान पहुंचाता है। 

 

  • बच्चों के दांतों की देखभाल 
  • छोटे बच्चों के मुंह में दूध की बोतल लगाकर न सुलाएं। 
  • चॉकलेट और च्यूइंगम न खिलाएं। खाएं भी तो तुरंत कुल्ला करें। 
  • बच्चे को अंगूठा न चूसने दें। इससे दांत टेढ़े - मेढ़े हो जाते हैं। 
  • डेढ़ साल की उम्र से ही अच्छी तरह ब्रशिंग की आदत डालें। 
  • छह साल से कम उम्र के बच्चों को फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट न दें। 
 
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