डेंगू कर देता है मरीजों की हृदयगति में बदलाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 24, 2016
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डेंगु दिल के मरीजों के लिए दोगुना जानलेवा हो सकता है। राष्ट्रीय राजधानी में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच में एक स्टडी की गई है जिसमें इसे दिल के मरीजों के लिए प्राणघातक पाया गया है। अध्ययन में पुष्टि की गई है कि हृदय रोगियों में वेक्टर जनित रोग उनके दिल की बीमारियों के खतरे को  और अधिक बढ़ा सकते हैं। गौरतलब है कि डेंगू वेक्टर-जनित रोग है। वेक्टर-जनित रोग में वे रोग शामिल होते हैं जो मच्छर व कीटों के काटने से फैलते हैं। जैसे डेंगू, चिकनगुनिया आदि।


डेंगू के कारण हाल ही में चार लोगों की मौत हो चुकी है जबकि शहरों में इसके मरीजों की संख्या 310 से ज्यादा हो चुकी है। ये अध्ययन फोर्टिस हेल्थकेयर द्वारा किया गया है। ये अध्ययन पिछले तीन महीनों में दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती हुए 150 डेंगू के मरीजों पर किया गया है।

इस स्टडी में ये भी दावा किया गया है कि अस्पताल में भर्ती हुए उन डेंगु मरीजों में भी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ और इकोकार्डियोग्राफ रीडिंग में भी बदलाव आया है जिनमें पहले से दिल की कोई बीमारी नहीं थी। ऐसे में माना जा रहा है कि जब सामान्य मरीजों में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ और इकोकार्डियोग्राफ रीडिंग बदल जाती है तो दिल के मरीजों में इस रीडिंग में और अधिक बदलाव आ जाता है। इससे माना जा रहा है कि डेंगू दिल के मरीजों के लिए और अधिक जानलेवा हो सकता है।   

फोर्टीस हेल्थकेयर लिमीटेड के क्लीनिकल रिसर्च और एकेडमिक के डीन और एक्सिक्यूटिव डायरेक्टर उपेंद्र कौल का कहना है कि, "हमारा अध्ययन ये भी बताता है कि इसके साथ ही दिल के मरीजों द्वारा ली जाने वाली एस्पीरिन भी कई बार परिणाम सुधारने की जगह बिगाड़ देती है। क्योंकि दिल की बीमारी के दौरान ली जाने वाली एस्पीरिन प्लेटलेट कम कर देती है और ब्लीडिंग बढ़ा देती है। जिससे कि डेंगू दिल के मरीजों के लिए ये दोगुना घातक हो जाता है। "

 

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