गर्भावस्था के दौरान होने वाली खुजली की समस्या से कैसे निपटे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 02, 2015
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Quick Bites

  • गर्भावस्था में खुजली की समस्या खतरनाक।
  • गर्भस्थ शिशु और लिवर के लिए नुकसान।
  • गर्भावस्था के छठे महीने में होती है समस्या।
  • सूरज की रोशनी के संपर्क में ज्यादा आने से बचे।

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती के शरीर में अत्यधिक हारमोनल परिवर्तन होता है। लेकिन कई बार महिलाओं की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है, जिस के कारण उन्हें खुजली जैसी त्वचा संबंधी परेशानियां हो जाती है। आमतौर पर रक्त संचार बढ़ने या पेट की त्वचा की स्ट्रेचिंग की वजह से खुजली होती है लेकिन जब यह बहुत अधिक हो तो यह होने वाले बच्चे के लिए खतरे का इशारा है। ये सुनने में भले ही सामान्य सी बात लगती हो पर पूरे शरीर में खुजली से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को काफी परेशानी हो जाती है।  

गर्भावस्था में खुलजी की समस्या

गर्भावस्था में पेट फूलने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव होता है, जिस से कई महिलाओं को खुजली की समस्या हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं के पूरे शरीर में खुजली रहती है यह गर्भावस्था के दौरान लिवर की किसी गड़बबड़ी के कारण भी हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पेट, हाथ और पैर के पंजों पर तेज खुजली होना उनके लिवर से संबंधित रोग – इंट्राहेप्टिक कोलेस्टासिस ऑफ प्रेग्नेंसी (आईसीपी) के लक्षण हो सकते हैं जिससे जच्चा-बच्चा की जान को खतरा है। आईसीपी की अवस्था में लिवर की केमिकल को प्रवाहित करने की क्षमता खत्म हो जाती है जिससे बाइल एसिड नसों को प्रभावित करता है और त्वचा पर तेज खुजली होती है।अक्सर यह रोग गर्भावस्था के छठे सप्ताह से शुरू होता है। इस दौरान पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाता है।

इस समस्या से कैसे निपटे

अगर आपकी खुजली का समस्या सामान्य हो तो कुछ बातों को लेकर सावधानी बरतें। जिससे ये आपकी खुजली मे आराम देंगी और। खुजली होने वाली जगहों के आसपास मॉश्चाराइजर लगाकर रखें। खुजली होने पर ज्यादा तेजी से ना खुजलायें, बल्कि हाथों से सहला दें। डॉक्टर की सलाह से एंटी-इचिंग वाली क्रीम भी लगा सकती है। विटामिन ई युक्त क्रीम लगाकर भी त्वचा में नमी बनाई जा सकती है। त्वचा को शुष्क होने से बचाने के लिए आप गर्म पानी से स्नान कर सकती है। कमरे में ह्युमीडिफाइर लगा सकते है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क, आनुवंशिकता और ऐस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरौन हारमोन के बढ़ते स्तर पर निंयत्रण रखने की जरूरत है।  जितना हो सके तेज धूप के संपर्क से बचें। जब भी घर से बाहर निकलें एसपीएफ 30 वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

पानी शरीर के भीतर के अवशोषकों को बाहर निकालने में काफी सहायक सिद्ध होता है। इसलिए त्वचा की साफ-सफाई हेतु नियमित 8 से 10 गिलास पानी रोज पिएँ।

 

Image Source-Getty

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