खानपान और नियमित व्‍यायाम से संभव है रयूमेटायड अर्थराइटिस से बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 15, 2013
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Quick Bites

  • रयूमेटायड अर्थराइटिस हड्डियों से संबंधित बीमारी है।
  • धूप सेंककर इस बीमारी से किया जा सकता है बचाव।
  • कैल्सियम और प्रोटीनयुक्‍त आहार का सेवन कीजिए।
  • व्‍यायाम और मोटापे को कम करके हो सकता है बचाव।

रयूमेटायड अर्थराइटिस जोड़ों की बीमारी है, इस बीमारी में असहनीय दर्द होता है। खासकर सर्दियों में और सुबह के समय तेज दर्द होता है। इसका दर्द इतना तेज होता है कि घुटनों को मोड़ने में और चलने-फिरने में परेशानी होती है।

Avoid Rheumatoid Arthritisठंड के मौसम में व्‍यक्ति को ज्‍यादा परेशानी होती है इसलिए इस बीमारी से ग्रस्‍त मरीज को ठंड से बचना चाहिए। हालांकि अभी तक इस बीमारी का कोई भी स्‍थाई ईलाज नहीं निकल पाया है लेकिन यदि थोड़ी सी सावधानी बरती जाये तो इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। खानपान में सतर्कता बरती जाये तो इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। आइए हम आपको इस बीमारी से बचाव के तरीके बता रहे हैं।

 

रयूमेटाइड अर्थराइटिस से बचाव के टिप्‍स

 

धूप में रहें

रयूमेटाइड अर्थराइटिस हड्डियों की बीमारी है और इसकी चपेट में हड्डियां आती हैं। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए धूप का सेवन कीजिए, धूप सेंकने से हड्डियां मजबूत होती हैं। सूरज की किरणों में मौजूद विटमिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण की क्षमता को बढ़ाता है जिसके कारण रयूमेटाइड अर्थराइटिस से कुछ हद तक बचाव संभव है।

 

स्‍वस्‍थ खानपान से

आहार के जरिए भी अर्थराइटिस के इस प्रकार से बचाव किया जा सकता है। इसलिए अपने डायट चार्ट में कैल्शियम और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की मात्रा बढाइये। इसके लिए आप दूध और इससे बनी चीजों, दालों, हरी सब्जियों, अमरूद, सेब आदि फलों का नियमित रूप से सेवन करें। इस आहार से आपके शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ेगी और इस बीमारी से बचाव संभव है।

 

वाटर बैग से सिंकाई

यदि आपको अर्थराइटिस के लक्षण दिखें तो रात को सोने से पहले हल्‍के गरम पानी के बैग से हाथ-पैरों की सिंकाईं कीजिए, इससे इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकेगा। यदि आप इस बीमारी की चपेट में आ गये हैं तो इस सेंकाई से आपको इसके दर्द से काफी हद तक राहत मिलेगी।

नियमित व्‍यायाम

रयूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी बीमारी से बचने के लिए जरूरी है नियमित व्‍यायाम। व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करके न केवल आप इस बीमारी से बचाव कर सकते हैं बल्कि फिट भी रह सकते हैं। इसलिए सुबह के समय कम से कम 30 मिनट तक व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या बनायें।

मोटोपे पर नियंत्रण

रयूमेटाइड अर्थराइटिस मोटे लोगों की ज्‍यादा होती है। इसलिए अगर आपका वजन ज्‍यादा है तो जरूरी है कि आप समय रहते उसपर नियंत्रण कीजिए। मोटापे के कारण आपको जोड़ों से संबंधित बीमारी अपना शिकार बना सकती है।

 

पारिवारिक इतिहास

रयूमेटाइड को आनुवांशिक बीमारी भी माना जाता है। यदि आपके परिवार में यह बीमारी किसी को पहले भी हो चुकी है तो यह आपको भी हो सकती है। इसलिए इस बीमारी की जांच समय-समय पर कराते रहें।


जब कभी आपको इस परेशानी से सम्बन्धित लक्षण दिखाई दे तो बिना देर किए किसी कुशल अस्थिरोग चिकित्‍सक से अवश्‍य सलाह लीजिए।

 

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