ऐसे करें अस्‍थमा का निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 24, 2009
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Quick Bites

  • अस्‍थमा में दवाओं का सही समय पर लेना महत्वपूर्ण।
  • अस्‍थमा का सही तरीके से निदान होना जरूरी है।
  • स्पिरोमीटरी अस्‍थमा के लिए सम्पूर्ण जांच है।
  • पीक फ्लो मीटर से फेफड़ों की कार्यप्रणाली पर नजर।

अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए अपने ट्रिगर्स को पहचानना, अपने लक्षणों पर ध्यान रखना, और अपनी दवाओं को सही समय पर लेना महत्वपूर्ण है। लेकिन सबसे पहले इसका सही तरीके से निदान होना जरूरी है। इसके लिए आपका डॉक्टर आपसे दमा के लक्षणों के बारे में पूछेगा कि वो कितने गम्भीर हैं, वह कब और कहां उभरते हैं, अक्सर वो कैसे और कितनी जल्दी-जल्दी होते हैं तथा किन वस्तुओं के प्रयोग से उन लक्षणों से मुक्ति पा सकते हैं। आपका डॉक्टर आपकी एलर्जी और सांस की बीमारियों के लिए आपके परिवार के निजी इतिहास को भी जानना चाहेगा।

asthma in hindi

अस्‍थमा का निदान

आपका डॉक्टर एक परिश्रावक (स्टीथोस्कोप ) के साथ आपकी पीठ की घरघराहट की पहचान करेगा। अस्‍थमा के दौरान हवा के बहाव की राशी को तथा सांस लेने के लिए आप किस प्रकार अपने सीने कि मांसपेशियों का इस्तेमाल कर रहें हैं, सांस लेने को देखने के द्वारा दौरे की गम्भीरता का आंकलन किया जाता हैं। नीले होंठ तथा त्वचा से संकेत मिलता है कि आपको पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिल पा रही है। अन्य परीक्षण भी कार्यालय में किये जा सकते हैं जिसमें आप जबरन सांस बाहर निष्कासित करते हैं तो उस हवा की गति का माप लिया जाता है। यह एक छोटी हाथ से आयोजित एक चोटी-प्रवाह-मीटर से किया जाता है। एक और परीक्षण नाड़ी-ओक्सीमीटरी से खून में ऑक्सीजन की मात्रा को देखने के लिए अपनी ऊंगली की नोक पर प्लास्टिक क्लिप को रख कर किया जाता है।

spirometry in hindi

स्पिरोमीटरी

यह एक और सम्पूर्ण जांच है। यह दमा के निदान कि पुष्टि के लिए और फेफड़ों कि अधिक जानकारी के लिए किया जाता है। इस जांच के दौरान आप उस यंत्र में सांस छोड़ते हैं जिससे हवा के बहाव का आंकलन किया जाता है। आपके दवा देने के बाद इस जांच का एक भाग फिर से दोहराया जा सकता है जिसे ब्रोंचो-डिलेटर कहा जाता है जिससे वायु-मार्ग के आसपास कि मांसपेशियों को आराम मिलता है और हवा प्रवाह में भी सुधार होता है। अगर ब्रोंचो डिलेटर के इस्तेमाल से हवा प्रवाह में सुधार होता है तो यह संकेत है कि आपको अस्‍थमा है। कभी-कभी यह परीक्षण एक चुनौती बन जाता है खास कर जब स्पियो मीटरी सामान्य दिखाई देती है। इस प्रक्रिया में एक दवा सांस के द्वारा अंदर लेते हैं (आमतौर मेथाकॉलिन )यह देखने के लिए मांसपेशियों के भडकने के एक औसत दर्जे का अनुमान लगाया जाये। अस्‍थमा के लोग इस दवा के प्रति अघिक संवेदनशील होते हैं।

peak flow meter in hindi

पीक फ्लो मीटर

पीक फ्लो मीटर में पीक फ्लो रेट में गिरावट की जांच की जाती है यानी पीक फ्लो मीटर एक ऐसा आसान और सस्ता उपकरण है, जिसकी मदद से आप अपने फेफड़ों की कार्यप्रणाली पर नजर रख सकते हैं। यह छोटा सा पोर्टेबल टयूब फेफड़ों में हवा के प्रवाह के त्वरित और आसन माप उपलब्ध कराता है। जब आप जबरन सांस बाहर फेंकते हैं तो यह हवा की गति को नापता है। यह यंत्र रोगियों को घर में उपयोग के लिए भी दिए जाते हैं ताकि अस्‍थमा के भडकने के संकेतों का पता लगाया जा सके।
 
अगर आपके डॉक्टर को संदेह है कि अस्‍थमा किसी एलर्जी से आ रहा है और किसी भी दवा से काबू में नहीं आ रहा, तो खून जांच और त्वचा एलर्जी का परीक्षण किया जाता है। यह रक्त परीक्षण रेडीयो एलर्जोबेट (रसट) कहलाता है यह एक विशेष संभावित एलर्जी में रोगप्रतिकारक को देखता है। त्वचा एलर्जी परीक्षण में संभावित एलर्जी से त्वचा हलके सम्पर्क में होती है यह किसी सुई कि चुभन से या बहुत दिन तक किसी टेप पैच के सम्पर्क में होती है।



Image Source : Getty

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