होली पर मिलावटी मिठाइयों से दूर रहें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 06, 2012
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Milawati Mithaiyo Se Door Rahe
होली में जहां एक ओर रंगों की फुहार का लोग मजा लेते हैं वहीं दूसरी तरफ बिना मिठाइयों और गुझियों के होली अधूरी लगती है। पहले लोग त्योहारों पर घर में ही मिठाइयां बनाते थे लेकिन समय के अभाव में ज्यादातर लोग बाजार से ही बनी हुई गुझिया व मिठाई लेकर आते हैं। लेकिन आजकल बाजार में मौजूद मिठाइयां बहुत मिलावटी हो गई हैं जिनके सेवन से कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं। मिलावटी मिठाई खाने से पेट संबंधी कई बीमारियां हो जाती हैं और फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ जाता है। मिलावट होने पर भी लोग मिठाइ बाहर से ही खरीदते हैं। इन मिठाइयों की खुशबू और डिजाइन देखकर लोग ज्यादा खा लेते हैं जो कि नुकसानदायक होता है। इसलिए होली में जहां तक संभव हो मिलावटी मिठाइयों से दूर रहें।


मिलावटी मिठाई से नुकसान -

  • मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से सबसे ज्यादा नुकसान लीवर को होता है। लीवर में सूजन आ जाती है।
  • मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से आंतों में संक्रमण हो जाता है, जिसके चलते आंतों में सूजन आ जाती है और उसमें छेद हो सकता है।
  • मिलावटी मिठाई खाने से पीलिया होने की संभावना ज्यादा हो जाती है।
  • सिंथेटिक दूध के इस्तेमाल से कैंसर होने का खतरा बढ जाता है।
  • मिलावटी मिठाई के सेवन से फूड प्वाइजनिंग के अलावा उल्टी व दस्त भी हो सकता है।
  • होली में मिलावटी मिठाई, पनीर व घी खाने से सिर दर्द, पेट दर्द व त्वचा रोग हो सकते हैं।
  • मिलावटी मिठाई खाने से शरीर में सूजन हो सकती है।
  • महिलाओं की माहवारी में दिक्कत हो सकती है।
  • ज्यादा मिलावटी मिठाई खाने से खून की कमी भी हो सकती है।

 

मिलावटी खाद्य-पदार्थ कैसे बनते हैं

 

होली में ज्यादातर व्यंजन दूध से बने होते हैं। मिलावटी मावा बनाने के लिए दूध की बजाय दूध पाउडर रसायन, आलू, शकरकंद, रिफाइंड तेल आदि प्रयोग किए जाते हैं। सिंथेटिक दूध बनाने के लिए पानी में डिटर्जेंट पाउडर, तरल जेल, चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड व मोबिल आयल एवं एसेंट पाउडर डालकर दूध को बनाया जाता है। यूरिया का घोल व उसमें पाउडर व मोबिल डालकर भी सिंथेटिक दूध तैयार किया जाता है। इसमें थोड़ा असली दूध मिलाकर सोखता कागज डाला जाता है। इससे नकली मावा व पनीर भी तैयार किया जाता है।


कैसे पहचानें मिलावटी खाद्य-पदार्थ

मावे में मिलावट की पहचान आयोडीन जांच या फिर चखकर उसके स्वाद और रंग से किया जा सकता है। सामान्य तौर पर लोग आयोडीन की जांच नहीं कर पाते। लेकिन मिलावटी मावे से बचने के लिए उसे पूरी तरह जांच परख लीजिए। मिलावटी या नकली मावे का स्वाद व रंग सामान्य से विभिन्न और कुछ खराब होता है। मिलावटी खोवे को उंगलियों में लेकर रगडें यदि उसमें चिकनापन नहीं है तो समझो वह नकली है।

होली के त्योहार में मिलावटी मिठाइयों का सेवन आपको अस्पताल पहुंचा सकता है। इसलिए कोशिश यही होनी चाहिए की होली के व्यंजनों को घर पर ही बनाइए।

 

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