होली में दमा के मरी़ज रखें ख्याल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 06, 2012
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Dama ke mareez rakhe khaas khayalहोली के मौके पर आप जी भर कर मस्ती करते हैं। लेकिन कई बार इस मस्ती में आप अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखते हैं, जो आपके लिए हानिकारक है। होली में दमा के मरीजो को खास ख्याल की जरूरत होती है। उनके लिए रंगों से दूर रहना ही ठीक होता है। साथ उन्हें खाने-पीने में भी सावधानी बरतनी  चाहिए। उन्हें ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। थोड़ी सी भी असावधानी आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। आईए जानें दमा के मरीज होली कैसे मनाएं-

सूखे रंगों से होली नहीं खेले

अस्थमा के मरीजों को सूखे रंगों से होली नहीं खेलनी चाहिए। यह उनके लिए काफी नुकसानदेह है। सूखे रंगों के कण रोगी के शरीर के अंदर जा सकते हैं जिससे अस्थमा अटैक आने का खतरा हो सकता है। इसलिए आप थोड़े से गुलाल का इस्तेमाल तिलक लगाने के लिए कर सकते हैं।

चेहरे पर रंग नहीं लगाएं

होली पर लोग इस कदर रंग जाते हैं कि उनको पहचानना मुश्किल हो जाता है। लेकिन अस्थमा के मरीजों को चेहरे पर रंग लगवाने से बचना चाहिए। इससे रंगों के मुंह के अंदर जाने की ज्यादा संभावना होती है।

ठंडई से दूर रहें

होली में लोग जी भर कर ठंडई का मजा लेते हैं लेकिन दमा के मरीजों को ठंडई का सेवन नहीं करना चाहिए। यह आपकी सेहत के लिए सही नहीं है। इसके सेवन से आपको सांस लेने में समस्या हो सकती है। ठंडई में दूध, घी, भांग आदि मिला होता है जो नुकसानदेह है अस्थमा के मरीजों के लिए।

भीड़भाड़ से दूर रहें

होली में अक्सर लोग ग्रुप बनाकर होली खेलते हैं जिसमें छीना झपटी व जबरदस्ती होने की संभावना होती है। दमा के मरीजों को ऐसी जगह जाने से बचना चाहिए। भीड़ में रंग आपके मुंह के अदंर जा सकता है। जिससे आपको परेशानी हो सकती है। इसलिए कम लोगों के साथ आराम से होली खेलें।

हर्बल रंगों का प्रयोग करें

होली खेलने के लिए हर्बल रंगो का इस्तेमाल करें। बाजार में मिलने वाले रंगों में रसायनिक पदार्थ काफी मात्रा में होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आप घर पर भी हर्बल रंग बना सकते है और अपने दोस्तों को वही रंग दें होली खेलने के लिए।

ओवरईटिंग से बचें

अस्थमा के मरीजों को ओवरईटिंग से बचना चाहिए। होली में घर पर कई प्रकार की  मिठाईयां व व्यंजन बनते हैं , जिससे आप खुद पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं और ओवरईटिंग का शिकार हो जाते हैं। आप उतना ही खाएं जितना आपका शरीर इजाजत दें।

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