हिप फ्रैक्चर क्‍या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 21, 2012
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hip fracture

कूल्हे की हड्डी के जोड़ का टूटना हिप फ्रैक्चर कहलाता है। शरीर के ऊपरी भाग थाईबोन (फेमर) और पेल्विस में उसके सॉकेट का मध्य भाग है हिप। जब हिप फ्रैक्चर में हमेशा फेमर नामक हड्डी में घाव होता है। फेमर का ऊपरी भाग इनमें से किसी भी तीन जगह पर फ्रैक्चर हो सकता है।

[इसे भी पढ़े : हिप फ्रैक्चर की संभावित अवधि]



फेमर का ऊपरी भाग
हड्डी के अंतिम भाग का गोलाकार हिस्सा जो कि पेल्विस के सॉकेट में फिट हो जाता है।

फेमर की गर्दन
फेमर की ऊपरी सतह की हड्डी उल्टे एल के आकार की होती है।

ट्राकेंटर्स के बीच में या नीचे
फेमर हड्डी प्राकृतिक रूप से हिप के पास घुटने की ओर झुकी होती है। इस जगह पर फेमर की ओर दो हड्डियों का कुबड़ सा निकला होता है। यह गड्ढे कम और अधिक ट्राकेंटर के बने होते हैं।

 

[इसे भी पढ़े : हिप फ्रैक्चर से बचाव]

 

हिप फ्रैक्चर का सबसे आम कारण गिरना होता है। सामान्यत: यह 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में होता है। पर युवाओं से लेकर अस्सी वर्षीय व़ृद्धों को अलग-अलग कारणों से कूल्हे की हड्डी से जुड़ी तकलीफ का शिकार बनना पड़ता है। बूढ़े लोगों में हिप के फ्रैक्चर होने की सम्भावना अधिक रहती है। इस उम्र में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। धिकांश फ्रैक्चर फीमर के आसपास के हिस्से में होते हैं जो समय के साथ-साथ कमजोर पड़ जाता है। हिप का फ्रैक्चर अघात के कारण भी हो सकता है।

कूल्हे में तेज दर्द उठना इसकी शुरुआत हो सकती है, जिसके बाद टांग हिलाने में भी तकलीफ होती है। गिरने से भी यह समस्या उठती है और मोच आने से भी। टांग पर जोर डालने में भी दिक्कत होने लगती है। टांग में अकड़न और प्रभावित क्षेत्र के आसपास सूजन दिखने लगती है।

महिलाओं में हिप फ्रैक्चर होने की आशंका रजोनिवृत्ति के बाद पुरुषों की अपेक्षा दोगुनी हो जाती है। आनुवांशिक कारणों से भी इसका डर बना रहता है। इसलिए डॉक्टर विटामिन डी का सेवन करने की सलाह देते हैं। नियमित व्यायाम को भी डॉक्टर जरूरी बताते हैं। ऐसे स्टीरॉयड्स से बचने की सलाह डॉक्टदर देते हैं जिनका असर हड्डियों की मजबूती पर पड़ता है।

 

[इसे भी पढ़े : हिप फ्रैक्चर का निदान]


इन्हें है ज्यादा खतरा

  • महिलाओं की हड्डियां आमतौर पर अधिक कमजोर होती हैं इसिलए उन्हें इसकी आशंका दोगुनी होती है।
  • अगर किसी के परिवार में भी यह समस्या रही है तो उसमें इसकी आशंका बढ़ जाती है।
  • खाने में विटामिन डी और कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में नहीं लेने से। 
  • कुछ खास तरह की दवाएं जिसका सेवन कर रहे हैं और इसमें स्टीरॉयड्स आदि हो।

 

Read More Article on Hip-Fracture in hindi.

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