कहीं आपका दिल बीमार तो नहीं, यह रहे लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 28, 2017
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Quick Bites

  • दिल में भी होती है कई तरह की बीमारियां।
  • हर बीमारी  के होते है अलग-अलग लक्षण।  
  • इसके लक्षणों से किया जा सकता है इलाज।  

सभी अंगों की तरह दिल भी कई कारणों से बीमार होता है। दिल की बीमारियों को आम शब्द में हृदय रोग कहा जाता है जिसके अंतर्गत हृदय से संबंधित अनेक बीमारियां एवं परेशानी होती हैं जिसका हृदय पर गलत प्रभाव पड़ता है। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिसीज, एंजाइना, दिल का दौरा आदि बीमारियां आती हैं।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज

इसका सबसे आम लक्षण है एंजाइना या छाती में दर्द। एंजाइना को छाती में भारीपन, असामान्यता, दबाव, दर्द, जलन, ऐंठन या दर्द के अहसास के रूप में पहचाना जा सकता है। कई बार इसे अपच या हार्टबर्न समझने की गलती भी हो जाती है। एंजाइना कंधे, बाहों, गर्दन, गला, जबड़े या पीठ में भी महसूस की जा सकती है। बीमारी के दूसरे लक्षण छोटी-छोटी सांस आना।  पल्पिटेशन। धड़कनों का तेज होना। कमजोरी या चक्कर आना।उल्टी आने का अहसास होना। पसीना आना हो सकते हैं।

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हार्ट अटैक

हार्ट अटैक के दौरान आमतौर पर लक्षण आधे घंटे तक या इससे ज्यादा समय तक रहते हैं और आराम करने या दवा खाने से आराम नहीं मिलता। लक्षणों की शुरुआत मामूली दर्द से होकर गंभीर दर्द तक पहुंच सकती है। कुछ लोगों में हार्ट अटैक का कोई लक्षण सामने नहीं आता, जिसे हम साइलेंट मायोकार्डियल इन्फ्रै क्शन यानी एमआई कहते हैं। ऐसा आमतौर पर उन मरीजों में होता है जो डायबीटीज से पीडि़त होते हैं।जिन लोगों को हार्ट अटैक की आशंका है, वे बिल्कुल देर न करें। फौरन आपातकालीन मदद लें, क्योंकि हार्ट अटैक में फौरन इलाज बेहद जरूरी है। इलाज जितनी जल्दी होगा, मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। सीने, बाहों, कुहनी या छाती की हड्डियों में असहजता, दबाव, भारीपन या दर्द का अहसास।असहजता का पीठ, जबड़े, गले और बाहों तक फैलना। पेट भरा होने, अपच या हार्टबर्न का अहसास होना। पसीना, उल्टी, मितली या कमजोरी महसूस होना। बहुत ज्यादा कमजोरी, घबराहट या सांस का रुक-रुककर आना। दिल की धड़कनों का तेज या अनियमित होना।

हार्ट वाल्व संबंधी बीमारी के लक्षण

हार्ट वाल्व संबंधी बीमारी के लक्षण हमेशा स्थिति की गंभीरता से संबंधित नहीं होते। कई बार ऐसा भी होता है कि कोई लक्षण सामने नहीं आता, जबकि व्यक्ति को हार्ट वाल्व की गंभीर बीमारी होती है, जिसमें फौरन इलाज की जरूरत होती है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि लक्षण काफी गंभीर होते हैं, समस्या भी गंभीर होती है, मगर जांच में वाल्व संबंधी मामूली बीमारी का पता लगता है। पूरी सांस न आना, खासतौर से तब, जब आप अपनी सामान्य नियमित दिनचर्या कर रहे हों या बिस्तर पर सीधे लेटे हों। कमजोरी या बेहोशी महसूस होना। सीने में असहजता महसूस होना। कुछ काम करते वक्त या ठंडी हवा में बाहर निकलने पर छाती पर दबाव या भारीपन महसूस होना। पल्पिटेशन (यह दिल की धड़कनों के तेजी से चलने, अनियमित धड़कन, धड़कनों के चूकने आदि के रूप में महसूस हो सकता है)।

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दिल संबंधी जन्मजात दोष

ऐसे दोषों का जन्म से पहले, जन्म के फौरन बाद या बचपन में भी पता लगाया जा सकता है। कई बार बड़े होने तक इसका पता नहीं लग पाता। यह भी मुमकिन है कि समस्या का कोई लक्षण सामने आए ही नहीं। ऐसे मामलों में कई बार शारीरिक जांच में दिल की मंद ध्वनि से या ईकेजी या चेस्ट एक्सरे में इसका पता लग जाता है। जिन वयस्कों में जन्मजात दिल की बीमारी के लक्षण मौजूद होते हैं, उनमें ऐसा देखा जाता है:जल्दी-जल्दी सांस लेना। शारीरिक व्यायाम करने की सीमित क्षमता। हार्ट फेलियर या वाल्व संबंधी बीमारी के लक्षण दिखना। नवजात और बच्चों में जन्मजात हृदय संबंधी दोष। साइनोसिस (त्वचा, उंगलियों के नाखूनों और होठों पर हल्का नीला रंग दिखाई देना)।तेज सांस लेना और भूख में कमी।
वजन ठीक ढंग से न बढऩा। फेफड़ों में बार-बार इन्फेक्शन होना। एक्सरसाइज करने में दिक्कत।

हृदय रोगो से बचने का सबसे आसान उपाय है, उन लक्षणों को जानना जो आपके लिए घातक हो सकते हैं । ऐसे ही कुछ सामान्‍य लक्षण हैं, जो जटिल भी हो सकते हैं।

ImageCourtesy@Gettyimages

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