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माता पिता कैसे करें एडीएचडी से पीड़ित बच्चे की देखभाल

Onlymyhealth Editorial Team, Date:2016-06-09

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ए.डी.एच.डी. यानि अटैंशन डैफिसिएट हाईपर एक्टिविटी डिसआर्डर जो बच्‍चों में होने की ज्‍यादा संभावना रहती है। इस मानसिक बीमारी में बच्चों में लापरवाही, असावधानी, अति सक्रियता व आवेग का होना सामान्य है, गंभीर बातों पर भी ध्यान नहीं देना, केयरलैस होना, बातचीत के दौरान बीच-बीच में बोलना, पढ़ाई के दौरान भी दूसरे कामों में उलझे रहना या ध्यान बंटाना आदि लक्षण होते है। लेकिन इन लक्षणों वाला हर बच्चा एडीएचडी का शिकार हो, यह जरूरी भी नहीं। इतना अवश्य है कि एडीएचडी से पीड़ित बच्चों में यह व्यवहार व विकास संबंधी डिसॉर्डर अधिक गंभीर और लंबे समय तक देखने को मिलता है। यही वजह है कि इसकी जांच के लिए बच्चे के व्यवहार का लंबे समय तक अध्ययन किया जाता है। यह समझना जरूरी है कि एडीएचडी के कारण मस्तिष्क में रसायनों का असंतुलन हो जाता है, जिसके कारण बच्चा अपने आवेगों और व्यवहार पर काबू नहीं रख पाता। वह जानकर ऐसा नहीं कर रहा होता। माता-पिता के लिए बच्चे को प्रेम और सकारात्मक भावनाओं के साथ संभालना जरूरी है।
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