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अष्टांग योग - परिवृत्त पार्श्वकोणासन

Onlymyhealth Editorial Team, Date:2016-06-14

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इस योग मुद्रा को करने के लिए सीधे तनकर खड़े हो जायें। फिर अपने पैरों में 3-4 फुट का गैप ले आएं। अब बाएं पैर को बायीं ओर 45 डिग्री और दायें पैर को दायीं ओर 90 डिग्री घुमाएं। दाएं घुटने को दायें टखने के ऊपर मोड़ें। शरीर के ऊपरी भाग को दायें घुटने की ओर घुमाएं। अब बांहों को कंधों की ऊंचाई में ले जाएं। हथेलियों को जमीन की दिशा में रखें। सांस छोड़ते हुए हिप्स को आगे की ओर झुकाएं। बायीं हथेली से दाएं पैर के बगल में जमीन को स्पर्श कीजिए और दायीं ओर मुड़कर और दायें हाथ को छत की दिशा में ले जाइये। सिर को दायीं ओर घुमाकर दायें हाथ की उंगलियों की ओर देखिए। इस अवस्था में 15 से 30 सेकेण्ड तक बने रहिए। अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आइये। लेकिन आसन का अभ्यास करते समय शरीर को उतना ही मोड़ना चाहिए जितना आपके लिए आरामदायक हो। शरीर को मोड़ने के लिए अनावश्यक बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। परिवृत्‍त पार्श्वकोणासन योग मुद्रा मेरूदंड, पैर एवं बगल के लिए फायदेमंद होती है। इस योग आसन से शरीर के इन अंगों में स्थित तनाव दूर होता है। इस योग के नियमित अभ्यास से पाचन शक्ति अच्छी रहती है। पैरों और शरीर के ऊपरी भागों में संतुलन और दृढ़ता आती है।
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