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रक्त शुद्धिकरण के लिए योग - अनुलोम विलोम

Onlymyhealth Editorial Team, Date:2014-12-31

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अनुलोम विलोम प्राणायाम करने के लिए किसी भी ध्यान आसन में बैठ जाएं। पद्मासन, सिद्धासन, ब्रजासन, या सुखासन में आराम से बैठ जाएं। अपनी कमर को सीधा रखें। बायें हाथ से ध्यान मुद्रा बनायें। अंगूठे से पहली उंगली को मिलायें। इसके साथ ही बाकी की तीन उंगलियों को सीधा रखें। आपकी हथेली का पिछला हिस्सा घुटने पर रखा होना चाहिये। दाहिने हाथ के अंगूठे और बीच की दोनों उंगलियों को जोड़ें। अंगूठे से दायीं नासिका को बंद करें और बायीं नासिका से धीरे-धीरे सांस अंदर लें। इसके बाद उंगलियों से बांयी नासिका को बंद कर दायीं नासिका से सांस छोड़ें। फिर दायीं से ही सांस भीतर खींचें और बायें से सांस छोड़ेंगे। इस प्रकार अनुलोम-विलोम क्रिया का एक चक्र पूरा होता है। जब आप सांस अंदर लेंगे तो आपका पेट धीरे-धीरे बाहर आएगा और जब आप सांस छोड़ेंगे तो पेट धीरे-धीरे अंदर जाएगा। सांस अंदर लेते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपके पेट और फेफड़ों में वायु भर रही है। और जब सांस छोड़ रहे हैं, तो इस भावना को प्रबल करें कि ऊपर से खाली होते-होते पेट अंत तक खाली होता चला जा रहा है। अभ्यास के आरंभ में 10 चक्र से करें और आप इसकी संख्या 30 तक ले जा सकते हैं।
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