आयुर्वेदिक मसाज के इन 7 प्रकारों के बारे में जानें

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 08, 2015

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आयुर्वेद एक प्राचीन विज्ञान है जो कई बीमारियों के उपचार के लिए हर्बल सामग्री का उपयोग करता है, आयुर्वेदिक मसाज के अपने ही कितने स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक और सौंदर्य लाभ हैं।
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    आयुर्वेदिक मालिश


    आयुर्वेदिक मालिश सभी शारीरिक कष्ट को दूर करता है, विभिन्न भयानक अपंगताओं को नियंत्रित करता है, मध्य वय संलक्षण से बचाव करता है, उम्र वृद्धि की प्रक्रिया को धीमा करता है एवं बेकार पड़े हुये ऊतकों की मरम्मत कर शरीर तथा मन को असीमित उपचारात्मक शक्तियां प्रदान करता है। यह शरीर को पुनर्जीवित करता है, स्मरण शक्ति बढ़ाता है, पौरूष एवं जीवन शक्ति में सुधार लाता है एवं शारीरिक एवं मानसिक रूप से चुस्त बनाता है। इसके बारे में हम आपको विस्‍तार से बता रहे हैं।
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    पिझिचिल


    एक आरामदेह, शमक एवं पुन: यौवन प्रदान करने वाला उपचार है जिसमें औषधियुक्त नर्म तेल संपूर्ण शरीर (सिर एवं गर्दन को छोड़कर) पर एक निश्चित समय के लिये निरंतर धार के रूप में उड़ेला जाता है। ’पिझिचिल’ का अक्षरश: अर्थ ’निचोड़ना’ हैI यहां, नर्म तेल को मरीज के शरीर के ऊपर तेल के पात्र में समय-समय पर डुबाये हुये कपड़े के द्वारा निचोड़ा जाता है। पिझिचिल के प्रयोग की सलाह आंशिक पक्षाघात के निरस्तीकरण, लकवा एवं मांशपेशियों में तनाव के द्वारा उत्पन्न बीमारियों - तथा मांशपेशियों को प्रभावित करने वाली अन्य अपकर्षक बीमरियों के लिये दी जाती हैं।
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    नजवराकीझ


    सभी प्रकार के वात रोगों, जोड़ों में दर्द, मांशपेशियों के अपक्षय, त्वचा विकार, चोट एवं अभिघात के स्वास्थ्य्लाभ की अवधि, गठिया, आम कमजोरी, लकवा आदि के लिये चिकित्सा है। औषधियुक्त तेल के प्रयोग के बाद, औषधियुक्त दूध-दलिया के पुलिंदे के प्रयोग के द्वारा आपके संपूर्ण शरीर का पूर्ण शरीर मालिश कर पसीना निकाला जाता है। यह एक प्रतिरक्षी क्षमता बढ़ाने वाला पुनर्यौवन चिकित्सा है। विभिन्न बीमारियों के लिये उपचार होने के अतिरिक्त, नजवराकीझी आपकी त्वचा में नये प्राण भरता है एवं इसमे चमक लाता है।
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    शिरोधारा


    एक अनोखा उपचार है जहां एक निश्चित अवधि के लिये सिर को विशिष्ट औषधियुक्त तेलों के नियमित धार में स्नान कराया जाता है। यह मानसिक आराम के लिये एक प्रभावकारी चिकित्सा है एव यह अनिद्रा, तनाव, विषाद, घटती हुई मानसिक चुस्ती आदि को ठीक करता है। जब औषधियुक्त छाछ तेल का स्थान लेता है, इस चिकित्सा को तक्रधारा कहा जाता है।
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    शिरोवस्ती


    सामान्य रूप से इस उपचार के पूर्व तेल डालने एवं पसीना निकालने की क्रिया होती है। 6 से 8 फीट लंबा चमड़े का आस्तीन मरीज के सिर पर रखा जाता है। आस्तीन के भीतरी भाग पर अस्तर चढ़ाने के लिये तथा यह सुनिश्चित करने के लिये कि रिसाव न हो, सना हुआ आटा का प्रयोग किया जाता है। तब तेल आस्तीन में उड़ेला जाता है एवं सिर पर कुछ पल रहने दिया जाता है। वहां तेल को कितने देर तक रखा जाये इसका निर्धारण बीमारी की कठोरता से होता है।
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    अभयांगम


    जड़ी-बूटीयुक्त तेल के साथ इस संपूर्ण शरीर मालिश का प्रयोग शरीर के 107 आवश्यक बिन्दुओं के विशेष संबंध में मालिश के लिये किया जाता है यह आपकी त्वचा को मजबूत बनाता है एवं आदर्श स्वास्थ्य तथा दीर्घायुपन को प्राप्त करने के लिये सभी ऊतकों को पुनर्यौवन प्रदान करता है तथा मजबूती देता हैI यह ओजस  को बढ़ाता है एवं इस प्रकार आपके शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है। आपकी आंख के लिये लाभकारी होने के अतिरिक्त, अभयांगम आपको गहरी निद्रा प्रदान करता है।
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    इलाकिझी


    त्वचा में नये प्राण भरने की चिकित्सा है। जड़ी-बूटी संबंधी संबंधी पुलटिस विभिन्न जड़ी-बूटियों एवं औषधियुक्त चूर्ण से बनती है। औषधियुक्त तेलों में गर्म होने के बाद आपके सम्पूर्ण शरीर की मालिश इन पुलटिसों से की जाती है। यह परिसंचरण को बढ़ावा देता है एवं पसीने को बढ़ाता है जो बदले में वर्ज्य पदार्थ को बाहर निकालने में त्वचा की मदद करता है, उसके द्वारा त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार लाता है। इसका प्रयोग जोड़ों के दर्द, मांशपेशी के ऐठनों, तनाव एवं गठिया को रोकने के लिये भी होता है।
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    स्‍नाना



    स्‍नाना भी एक आयुर्वेदिक मालिश है जो कि पूर्वकर्मा विधि का अंग है। औषधीय तिल के तेल को आपकी बीमारी की प्रकृति के आधार पर इस्तेमाल करते हैं। स्‍नाना चिकित्‍सा के लिये दो लोगों की जरुरत पड़ती है, जो मिलकर तंत्रिका समाप्त बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर के रक्त परिसंचरण को सही करते हैं। स्‍नान चिकित्‍सा से शरीर और त्‍वचा के अंदर की हानिकारक गंदगी साफ होती है।वे लोग जिन्‍हें नींद न आने की बीमारी है या फिर दिनभर तनाव रहता है, उनके लिये यह चिकित्‍सा बहुत अच्‍छी है।
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