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जानें क्या हैं वैकल्पिक चिकित्सा के 8 विकल्प

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 09, 2015
प्राकृतिक चिकित्सा, पाद-चिकित्सा (chiropractic), जड़ी-बूटी चिकित्सा, आयुर्वेद, ध्यान, योग, जैवप्रतिपुष्टि, सम्मोहन, होम्योपैथी, एक्युपंक्चर और पोषण-आधारित उपचार-पद्धतियां वैकल्पिक चिकित्सा के प्रकार हैं।
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    वैकल्पिक चिकित्सा के प्रकार

    चिकित्सा क्षेत्र में भी अलग-अलग पद्धतियां हैं। कुछ मुख्यधारा में शामिल हैं तो कुछ वैकल्पिक पद्धतियां कहलाती हैं, लेकिन लक्ष्य सभी का एक है और वो है, स्वस्थ तन-मन का निर्माण। तो ऐसे में किसी एक ही चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) पर ही निर्भर होकर क्यों रहना। क्योंकि एलोपैथी से जहां तुरंत नतीजे मिलने का दावा किया जाता है, वहीं होमियोपैथी के पैरोकार रोग को जड़ से खत्म करने का दावा करते हैं। वहीं आयुर्वेद अनुशासन व सही खानपान को महत्व देता है और एक्यूप्रेशर-एक्यूपंक्चर जैसी पद्धतियां शारीरिक दर्द को कम करने के लिए प्रयासरत होती हैं। इसके अंतर्गत प्राकृतिक चिकित्सा, पाद-चिकित्सा (chiropractic), जड़ी-बूटी चिकित्सा, आयुर्वेद, ध्यान, योग, जैवप्रतिपुष्टि, सम्मोहन, होम्योपैथी, एक्युपंक्चर और पोषण-आधारित उपचार-पद्धतियां शामिल होती हैं। तो चसिये आज ऐसी ही कुछ वैकल्पिक चिकित्साओं की बात करते हैं, जिनको उपचार विकल्पों के रूप में अपनाया जा सकता है।
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    वैकल्पिक चिकित्सा के प्रकार
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    होमियोपैथी

    उपचार में प्रकृति के नियम बहुत काम आते हैं, होमियोपैथी भी इन्हीं पर आधारित है। होमियोपैथी लक्षणों पर आधारित पद्धति है। इसके अंतर्गत समान रोग में अलग लोगों की दवा अलग हो सकती है। हालांकि हर पद्धति की तरह इसकी भी कुछ सीमाएं हैं। इसमें सामान्य लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है। होमियोपैथी एंटीबायोटिक्स का सही विकल्प है। टॉन्सिल्स, साइनस, यूरिनरी  इन्फेक्शन,  डायरिया, डिसेंट्री, टीबी, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया जैसे संक्रमणों में यह काफी कारगर होती है।
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    होमियोपैथी
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    आयुर्वेद

    आयुर्वेद प्राकृतिक नियमों से उपचार करता है। इसका लक्ष्य मनुष्य का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व आध्यात्मिक कल्याण करना होता है। अथर्व-वेद में आयुर्वेद का उल्लेख मिलता है। आयुर्वेद को सृष्टि के पांच महा-तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश व वायु के अनुसार बांटा गया है। इन्हें पंच-महाभूत भी कहा जाता है जोकि ये ब्रह्मांड को संचालित करते हैं। आयुर्वेद में वात, कफ व पित्त को संतुलित किया जाता है। यदि ये संतुलित होते हैं तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है।
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    आयुर्वेद
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    एक्यूप्रेशर

    वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में एक्यूप्रेशर व एक्यूपंक्चर लोकप्रिय पद्धति है, यह दर्द, तनाव और दबाव से राहत देने में काफी कारगर होता है। इसमें शरीर के कुछ खास पॉइंट्स पर उंगलियों के दबाव से रक्त का प्रवाह ठीक करने का प्रयास किया जाता है। माना जाता है कि ज्यादातर प्रेशर पॉइंट्स  कलाई व उंगलियों के पोर में होते हैं। सही दबाव से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और यह पूरे तंत्रिका-तंत्र को दबाव-मुक्त करते हैं, लेकिन इन पॉइंट्स की सही पहचान प्रेक्टिशनर को ही होती है। एक्यूपंक्चर में सुइयों का प्रयोग किया जाता है। इनके साइड-इफेक्ट नहीं हैं।
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    एक्यूप्रेशर
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    हिप्नोथेरेपी

    हिप्नोसिस को ग्रीक शब्द हिप्नोस से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है 'नींद'। इस थेरेपी में हिप्नोटीस्ट आमतौर पर ऐसे अभ्यास का उपयोग करता है जिससे व्यक्ति को उसके निर्देश अंतर्मन तक सुना पड़ें और वह उनका पालन करे। व्यक्ति की इस स्थिति को ट्रांस भी कहा जाता है। ट्रांस में इंसान हिप्नोटीस्ट के आदेशों का पालन करता है, लेकिन इसका ये अर्थ कतई नहीं है की हिप्नोटीस्ट उसके दिमाग पर नियंत्रण पा सकता है या उसकी इच्छाशक्ति के विरुद्ध कोई काम करा सकता है।
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    हिप्नोथेरेपी
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    कैसे काम करती है हिप्नोथेरेपी

    हिप्नोथेरेपी में मूल रूप से सम्मोहनकर्ता लोगों को अपने आदेशों को बाह्यमन से अंतर्मन तक पहुंचना सिखाता है, ताकि शरीर के विकारों को दूर करने में वह मददगार साबित हो। सम्मोहन का उपयोग कई स्थितियों में किया जाता है, मसलन आपातकालीन स्थितियों में, दन्त चिकित्सक के मरीजों में, या अन्य किसी प्रकार के व्यक्ति में जो किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक समस्या से गुजर रहा हो। अध्यन से पता चला कि सम्मोहन रोग प्रतिरक्षण प्रणाली को बढ़ा सकता है, मांशपेशियों एवं रक्त वाहिकाओं को आराम पहुंचा सकता है, एकाग्रता बढाता है, तनाव कम करता है, चिंता दूर करता है तथा  सिगरेट पीने जैसी बुरी आदतों से मुक्ति दिला सकता है।
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    कैसे काम करती है हिप्नोथेरेपी
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    मसाज थेरेपिस्ट

    मसाज थेरेपिस्ट उंगुलियों, हथेलियों और कोहनी का इस्तेमाल करके शरीर की मालिश करता है। इससे शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है, तंत्रिकाओं की सक्रियता बढ़ती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। इन लाभों के चलते ही मसाज थेरेपी को तनाव, थकान, पुरानी बीमारियों और दुर्घटनाओं के कारण शरीर को पहुंची चोटों के ईलाज में उपयोग किया जाता है। मसाज थेरेपिस्ट अपना काम शुरू करने से पहले मसाज के लिए आने वाले मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री, खानपान और जीवनशैली से जुड़ी आदतों का अध्ययन करते हैं। फिर अपने निष्कर्षो के आधार पर उपचार की योजना तैयार करते हैं।
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    मसाज थेरेपिस्ट
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    न्यूरोपैथ

    न्यूरोपैथ, नेचुरोपैथी का ही एक हिस्सा है। इसमें नसों से संबंधित बीमारियों जैसे, पीठ दर्द, सर्वाइकल, ऑर्थराइटिस, डीप पेन, पेट की परेशानी या प्रेशर लिंक में दिक्कत हो तो न्यूरो थेरेपी की मदद से उपचार किया जाता है। न्यूरोपैथ के तीन भाग होते हैं। प्रेशर प्वाइंट, जिसे न्यूरोथेरेपी कहते हैं, दूसरा डाइट प्लान, जिसमें मरीज को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं आदि बताया जाता है, और तीसरा भाग योग उपचार होता है। इसमें कम से कम दस दिनों तक हर दिन उपचार किया जाता है, उसके बाद एक दिन छोड़कर इलाज किया जाता है।
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    न्यूरोपैथ
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    ऑस्टियोपैथी

    ऑस्टियोपैथी अर्थात अस्थिचिकित्सा एक मैनुअल तकनीक है, जिससे शरीर की पूरी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इसकी आधार होलिस्टिक होती है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक आदि पहलुओं को शामिल किया जाता है। ऑस्टियोपैथ मरीज के मसल्स, जोड़ों, कनेक्टिव टिश्यू और लिगामंट्स के जरिए शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को सामान्य करने का प्रयास किया जाता है। ऑस्टियोपैथी आर्थराइटिस के दर्द, डिस्क की समस्याओं, कंधों में जकड़न, सिर दर्द, कूल्हे, गर्दन, और जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, स्पोर्ट्स इंजरी, साइटिका, टेनिस एल्बो, तनाव, सांस की समस्याओं, प्रेग्नंसी से जुड़ी परेशानियां तथा पाचन संबंधी समस्याओं आदि में फायदेमंद साबित होती है।
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    ऑस्टियोपैथी
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