साइनस से राहत दिलाये योग

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 19, 2014

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साइनस नाक से संबंधित बीमारी है जो सर्दी के मौसम में होती है, सिरदर्द, नाक बंद होना, अधकपारी, हल्‍का बुखार जैसी समस्‍या होती है, योग के जरिये इस समस्‍या से राहत मिल सकती है।
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    साइनस की समस्‍या

    साइनस नाक से संबंधित समस्‍या है। यह समस्‍या सर्दी के मौसम में अधिक होती है। इसके कारण नाक बंद होना, सिर में दर्द, आधे सिर में बहुत तेज दर्द होना, नाक से पानी गिरना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा हल्का बुखार, आंखों में पलकों के ऊपर या दोनों किनारों पर दर्द रहता है, तनाव के कारण चेहरे पर सूजन भी आती है। यही रोग आगे चलकर अस्थमा, दमा जैसी गंभीर बीमारियों में भी बदल सकता है। लेकिन योग के जरिये इस समस्‍या से बचाव हो सकता है।

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    सूर्य नमस्‍कार

    सूर्य नमस्‍कार को सभी आसनों का सार माना जाता है, इससे साइनस की समस्‍या में आराम मिलता है। सूर्य नमस्कार सुबह के वक्‍त खुले में उगते सूरज की तरफ मुंह करके करना चाहिए। इससे शरीर को ऊर्जा के साथ-साथ विटामिन डी भी मिलता है। इसके 12 आसन होते हैं जिन्‍हें करने से साइनस में आराम मिलता है। यह तनाव कम कर वजन घटाने में भी कारगर है।

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    पश्चिमोत्तानासन

    यह आसन बहुत आसान है और इसे करते वक्‍त थकान भी नहीं लगती है। यह आसन साइनस के साथ-साथ अनिद्रा के उपचार में भी फायदेमंद है। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे बैठ जाएं और दोनों पैरों को फैलाकर एक सीध में रखें, दोनों पैरों को सटाकर रखें। दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं और कमर को एकदम सीधा रखें। फिर झुककर दोनों हाथों से पैरों के दोनों अंगूठे पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके घुटने न मुड़ें और न ही आपके पैर जमीन से ऊपर उठें। साइनस के दौरान सिरदर्द से आराम के लिए भी इसका बहुत महत्व है।

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    हलासन

    यह आसन भी साइनस के साथ-साथ कमर दर्द, गर्दन में दर्द और अनिद्रा से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। इसके लिए जमीन पर पीठ के बल सीधा लेट जाएं। दोनों हाथों को सीधा जमीन पर रखें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ें और दोनों पैरों को ऊपर उठाएं। उसके बाद पैरों को पीछे की तरफ सीधे जमीन पर झुकाएं और पंजों को जमीन से सटाकर रखें। सिर को बिल्कुल सीधा रखें। इस अवस्था में एक से दो मिनट रहें, फिर सांस लेते हुए पैरों को सामान्य अवस्था में ले आएं।

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    उत्तानासन

    इस आसन की मदद से साइनस में आराम तो होगा ही साथ ही सांस से संबंधित अन्य बीमारियों में भी यह मददगार है। यह आपके मूड को तरोताजा भी करता है। इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं। लंबी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की तरफ ले जाएं। फिर आगे झुककर दोनों हाथों से जमीन छुएं। इस दौरान घुटने न मोड़ें। कुछ देर इस मुद्रा में रहने के बाद हाथ पुनः ऊपर की तरफ ले जाएं और सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में खड़े हो जाएं।

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    अनुलोम-विलोम

    इसकी क्रिया सांस संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद तो है ही, साथ ही यह सर्दी-जुकाम और साइनस से होने वाली दूसरी दिक्कतों को भी दूर करती है। इसे करने के लिए सबसे पहले पद्मासन या सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं। फिर अपने दाएं हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद कर लें और बाएं छिद्र से भीतर की ओर सांस खीचें। अब बाएं छिद्र को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद करें। दाएं छिद्र से अंगूठा हटा दें और सांस छोड़ें। अब इसी प्रक्रिया को बाएं छिद्र के साथ दोहराएं। इसे 3 मिनट से 10 मिनट तक रोज करें।

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    धनुरासन

    इस आसन को करने से सांस संबंधी समस्‍यायें दूर होती हैं और साइनस के कारण होने वाला तनाव भी दूर होता है। इसे करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं। अपनी ठुड्डी को जमीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोड़ें और दोनों हाथों से पैरों के पंजे पकड़ें। फिर सांस को अंदर खींचते हुए और बाजू सीधे रखते हुए सिर, कंधे, छाती को जमीन से ऊपर उठाएं। इस स्थिति में सांस सामान्य रखें और चार-पाँच सेकेंड के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पहले छाती, कंधे और ठुड्डी को जमीन की ओर लाएं। पंजों को छोड़ दें और कुछ देर विश्राम करें। इस क्रिया को 3 बार दोहरायें।

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    भुजंगासन

    इसे करने से साइनस में आराम मिलता है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल लेट जायें, दोनों पैरों, एड़ियों और पंजों को आपस में मिलाइए और पूरी तरह जमीन के साथ चिपका लीजिए। अपने शरीर को पैरों की उंगलियों से लेकर नाभि तक के भाग को जमीन से लगाइए। अब हाथों को कंधे के सामने जमीन पर रखिए। दोनों हाथ कंधे के आगे पीछे नहीं होने चाहिएं। हाथों के बल नाभि के ऊपरी भाग को ऊपर की ओर झुकाइए जितना सम्भव हो।

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